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सपा का राज था, तीन साल में बंद नहीं करा पाए स्लॉटर हाउस
बरेली।
Updated Mon, 27 Mar 2017 01:02 AM IST
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SP's rule was that the slaughter house could not be closed in three years.
- फोटो : बरेली, अमर उजाला
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नए निजाम सख्त हुए तो नगर निगम ने शाहदाना में पिछले कई सालों से चल रहे स्लॉटर हाउस पर तुरंत ताला डलवा दिया। जबकि इस स्लॉटर हाउस को बंद करने की जरूरत तीन साल पहले ही प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने जताई थी। यह मानक के विपरीत चल रहा था और इसमें पशु चिकित्सा अधिकारी तक तैनात नहीं था। नगर निगम इनसे वसूली भी कर रहा था।
नगर निगम के अधिकारी पूर्व सरकार की शह पर नियम कानून तक भूल गए थे। शाहदाना में चल रहे स्लॉटर हाउस में प्रतिदिन 50 से अधिक बकरे काटे जाते थे। एक बकरे की कीमत नगर निगम 25 रुपए वसूलता था। नियम के मुताबिक यहां एक पशु चिकित्सक होना चाहिए था जो पशुओं की जांच करके उनकी कटान की अनुमति दे सके। साथ ही पशुआें का पोस्टमार्टम भी होना चाहिए था। लेकिन यहां पशु चिकित्सक की गैर मौजूदगी में बीमार पशु भी काट दिए जाते थे। इस स्लॉटर हाउस से शाहदाना के अलावा आसपास इलाकों के 100 से अधिक मीट विक्रे ता जुड़े थे। बताया जा रहा है कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने तीन साल पहले इसका निरीक्षण करके इसे मानकों के विपरीत पाया था और इसे बंद करने के निर्देश दिए थे। लेकिन निगम अपनी जिद पर इसे चलाता रहा। इसकी बकायदा रसीद भी काटकर दी जा रही थी।
भैंस भी काटे जा रहे थे इस स्लॉटर हाउस में
नगर निगम से जुड़े सूत्रों ने बताया कि इस स्लॉटर हाउस में बकरी के साथ भैंस भी काटे जा रहे थे। दरअसल, शाहदाना इलाके में अधिकतर दुकानें भैंस के मीट विक्रेताओं की अधिक हैं। बकरा मीट कारोबारी कम हैं। अधिकतर बकरा मीट विक्रेता एक दिन में एक से दो बकरे ही बेच पाते हैं। इनको वे अपने दुकान पर ही काट लेते हैं। ऐसे में इन्हें स्लॉटर हाउस लाने की जरूरत नहीं समझते। लेकिन भैंस मीट विक्रेता अधिक हैं, इसलिए इस स्लॉटर हाउस का उपयोग भैंस के मीट में भी होता था। इसका पैसा निगम वसूल रहा था लेकिन कागजों पर सिर्फ बकरा ही दर्ज है।
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नगर निगम के अधिकारी पूर्व सरकार की शह पर नियम कानून तक भूल गए थे। शाहदाना में चल रहे स्लॉटर हाउस में प्रतिदिन 50 से अधिक बकरे काटे जाते थे। एक बकरे की कीमत नगर निगम 25 रुपए वसूलता था। नियम के मुताबिक यहां एक पशु चिकित्सक होना चाहिए था जो पशुओं की जांच करके उनकी कटान की अनुमति दे सके। साथ ही पशुआें का पोस्टमार्टम भी होना चाहिए था। लेकिन यहां पशु चिकित्सक की गैर मौजूदगी में बीमार पशु भी काट दिए जाते थे। इस स्लॉटर हाउस से शाहदाना के अलावा आसपास इलाकों के 100 से अधिक मीट विक्रे ता जुड़े थे। बताया जा रहा है कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने तीन साल पहले इसका निरीक्षण करके इसे मानकों के विपरीत पाया था और इसे बंद करने के निर्देश दिए थे। लेकिन निगम अपनी जिद पर इसे चलाता रहा। इसकी बकायदा रसीद भी काटकर दी जा रही थी।
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भैंस भी काटे जा रहे थे इस स्लॉटर हाउस में
नगर निगम से जुड़े सूत्रों ने बताया कि इस स्लॉटर हाउस में बकरी के साथ भैंस भी काटे जा रहे थे। दरअसल, शाहदाना इलाके में अधिकतर दुकानें भैंस के मीट विक्रेताओं की अधिक हैं। बकरा मीट कारोबारी कम हैं। अधिकतर बकरा मीट विक्रेता एक दिन में एक से दो बकरे ही बेच पाते हैं। इनको वे अपने दुकान पर ही काट लेते हैं। ऐसे में इन्हें स्लॉटर हाउस लाने की जरूरत नहीं समझते। लेकिन भैंस मीट विक्रेता अधिक हैं, इसलिए इस स्लॉटर हाउस का उपयोग भैंस के मीट में भी होता था। इसका पैसा निगम वसूल रहा था लेकिन कागजों पर सिर्फ बकरा ही दर्ज है।
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