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मिल गई मोस्टवांटेड हंसिया
ब्ययूराो, अमर उजाला बरेली।
Updated Sun, 19 Jun 2016 12:29 AM IST
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सौतन की हत्या में लोअर कोर्ट से उम्र कैद की सजा होने के बाद हाईकोर्ट से जमानत पर रिहा हुई हंसिया 30 साल से फरार चल रही थी। 80 साल की मोस्टवांटेड हंसिया आखिरकार पुलिस को मिल गई। पांच थानों की पुलिस उसे लंबे समय से तलाश कर रही थी। हंसिया अपनी लड़की के पास दिल्ली में रह रही थी और बीसलपुर में में किसी रिश्तेदार के घर आई थी। हाईकोर्ट के आदेश पर पुलिस ने बीसलपुर से गिरफ्तार कर सीजेएम कोर्ट में पेश किया। चूंकि न्यायालय से उसके नाम कोई वारंट नहीं था, तो उसे छोड़ दिया गया। पुलिस ने हंसिया के परिवार वालों से लिखवाकर ले लिया कि मुकदमे की तारीख पर उसे उच्च न्यायालय में पेश होना पड़ेगा।
थाना बारादरी के मोहल्ला कालीबाड़ी में रहने के दौरान 35 साल पहले 1981 में हंसिया ने पति रामगोपाल के साथ मिलकर अपनी सौतन जशोदा देवी की लाठी डंडों से पीटकर हत्या कर दी थी। पुलिस ने इस मामले में हंसिया और उसके पति के खिलाफ मुकदमा लिखकर जेल भेजा था। निचली अदालत ने उम्र कैद की सजा सुना दी थी। अदालत के फैसले के खिलाफ हंसिया और उसके पति ने 1983 में हाईकोर्ट में अपील की। इसके बाद हंसिया और उसके पति को जमानत मिल गई। इसके बाद दोनों उच्च न्यायालय की किसी तारीख पर हाजिर नहीं हुए। हाईकोर्ट ने दोनों को हाजिर कराने के लिए वारंट जारी किए। पुलिस हंसिया को पकड़ नहीं पा रही थी। 11 मई को हाईकोर्ट ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए एसएसपी बरेली को हंसिया और उसके पति को गिरफ्तार कर पेश करने के आदेश दिए थे। एसएसपी आरके भारद्वाज ने पुलिस की दो टीमें हंसिया को पकड़ने के लिए लगाई थीं।
बीसलपुर के केंचुआ से मिली
हंसिया की बेटी की शादी बीसलपुर (पीलीभीत) के केचुंआ गांव में हुई थी। पुलिस की टीम हंसिया को तलाश करने के लिए गांव गई थी। वहां से पता चला कि हंसिया अपनी बेटी के साथ दिल्ली में कहीं रह रही है। पुलिस ने हंसिया के परिवार वालों के माध्यम से उस पर बरेली आने का दबाव बनाया। इंस्पेक्टर बारादरी कमरूल हसन का कहना है कि हंसिया दिल्ली से बीसलपुर केंचुआ गांव आई थी। वहां से वह खुद ही थाने आ गई। इसके बाद उसे सीजेएम कोर्ट में पेश किया गया। कोर्ट ने वारंट न होने पर उसे जेल नहीं भेजा। पुलिस ने उससे लिखवाकर ले लिया कि हाईकोर्ट की जुलाई के दूसरे हफ्ते में पड़ने वाली तारीख पर उसे हाजिर होना पड़ेगा। अगर हंसिया नहीं मिलती तो एसएसपी को हाईकोर्ट में पेश होकर जवाब देना पड़ता।
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थाना बारादरी के मोहल्ला कालीबाड़ी में रहने के दौरान 35 साल पहले 1981 में हंसिया ने पति रामगोपाल के साथ मिलकर अपनी सौतन जशोदा देवी की लाठी डंडों से पीटकर हत्या कर दी थी। पुलिस ने इस मामले में हंसिया और उसके पति के खिलाफ मुकदमा लिखकर जेल भेजा था। निचली अदालत ने उम्र कैद की सजा सुना दी थी। अदालत के फैसले के खिलाफ हंसिया और उसके पति ने 1983 में हाईकोर्ट में अपील की। इसके बाद हंसिया और उसके पति को जमानत मिल गई। इसके बाद दोनों उच्च न्यायालय की किसी तारीख पर हाजिर नहीं हुए। हाईकोर्ट ने दोनों को हाजिर कराने के लिए वारंट जारी किए। पुलिस हंसिया को पकड़ नहीं पा रही थी। 11 मई को हाईकोर्ट ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए एसएसपी बरेली को हंसिया और उसके पति को गिरफ्तार कर पेश करने के आदेश दिए थे। एसएसपी आरके भारद्वाज ने पुलिस की दो टीमें हंसिया को पकड़ने के लिए लगाई थीं।
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बीसलपुर के केंचुआ से मिली
हंसिया की बेटी की शादी बीसलपुर (पीलीभीत) के केचुंआ गांव में हुई थी। पुलिस की टीम हंसिया को तलाश करने के लिए गांव गई थी। वहां से पता चला कि हंसिया अपनी बेटी के साथ दिल्ली में कहीं रह रही है। पुलिस ने हंसिया के परिवार वालों के माध्यम से उस पर बरेली आने का दबाव बनाया। इंस्पेक्टर बारादरी कमरूल हसन का कहना है कि हंसिया दिल्ली से बीसलपुर केंचुआ गांव आई थी। वहां से वह खुद ही थाने आ गई। इसके बाद उसे सीजेएम कोर्ट में पेश किया गया। कोर्ट ने वारंट न होने पर उसे जेल नहीं भेजा। पुलिस ने उससे लिखवाकर ले लिया कि हाईकोर्ट की जुलाई के दूसरे हफ्ते में पड़ने वाली तारीख पर उसे हाजिर होना पड़ेगा। अगर हंसिया नहीं मिलती तो एसएसपी को हाईकोर्ट में पेश होकर जवाब देना पड़ता।
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