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मनचाही तैनाती की ‘चाहत’ का अब क्या होगा
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,बरेली
Updated Thu, 12 Apr 2018 09:45 PM IST
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बेसिक शिक्षा परिषद के अंग्रेजी मीडियम स्कूलों में अध्यापकों की मनचाही तैनाती के लिए नियमों की जमकर अनदेखी हुई। बेसिक शिक्षा विभाग में कई अफसरों ने शासनादेश का उल्लंघन करने में भी गुरेज नहीं किया। कुछ टीचर्स की शिकायत के बाद विभागीय अफसरों का यह कारनामा सामने आया तो पूर्व में हुई सभी नियुक्तियों को निरस्त कर दिया गया है। अब नए सिरे से अप्वाइंटमेंट के लिए शिक्षकों की फिर से काउंसलिंग होगी। इसकी जिम्मेदारी भी बीएसए को दे दी गई है।
कॉन्वेंट स्कूलों को टक्कर देने के लिए 81 जूनियर हाईस्कूलों में इस सत्र से अंग्रेजी मीडियम में पढ़ाई होनी थी। प्रत्येक स्कूल में एक प्रधानाध्यापक और चार सहायक शिक्षकों की नियुक्तियां होनी थी। इसके लिए बेसिक शिक्षा परिषद के सचिव ने गाइडलाइंस जारी की थी। इसके तहत पहले दिव्यांग, फिर महिला और सबसे आखिर में पुरुष टीचर्स की काउंसलिंग होनी थी, लेकिन विभागीय अधिकारियों ने इस आदेश की अवहेलना करते हुए टीचर्स को उनकी मनचाही जगहों पर तैनाती दे दी। बताते हैं कि नियुक्तियों का यह खेल सुविधा शुल्क से खेला गया। इधर, नियुक्तियों में गड़बड़ी के विरोध में कई शिक्षिकाओं ने मोर्चा खोल दिया। उन्होंने यह मामला डीएम तक पहुंचा दिया। शिक्षिकाओं ने यह भी आरोप लगाया कि अंग्रेजी स्कूलों में टीचर्स की तैनाती के लिए 28 मार्च को डायट में जो काउंसलिंग हुई है, उसमें शासनादेश की अनदेखी हुई है। इस मामले की जांच में शिक्षकों के आरोप सही मिलने के बाद विभाग को पूर्व में हुई काउंसलिंग को निरस्त करना पड़ा है। सीडीओ सत्येंद्र कुमार का कहना है कि टीचर्स की नियुक्ति शासन से मिले आदेश के अनुरूप ही होनी चाहिए।
अफसरों की मनमानी से बच्चों को परेशानी
बेसिक शिक्षा विभाग को दो अप्रैल से इंग्लिश मीडियम स्कूलों का संचालन करना था लेकिन यहां टीचर्स की तैनाती न हो पाने से इन स्कूलों में पढ़ाई भी नहीं हो पा रही है। काउंसलिंग के पहले टीचर्स की ट्रेनिंग कराने के मामले में विभागीय अधिकारियों पर अंगुली उठी। अब तैनाती करने में शासनादेश के उल्लंघन का मामला सामने आया है। इसके बाद यह फिर से काउंसलिंग होनी है। इससे इन स्कूलों के संचालन में लगातार देरी हो रही है।
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कॉन्वेंट स्कूलों को टक्कर देने के लिए 81 जूनियर हाईस्कूलों में इस सत्र से अंग्रेजी मीडियम में पढ़ाई होनी थी। प्रत्येक स्कूल में एक प्रधानाध्यापक और चार सहायक शिक्षकों की नियुक्तियां होनी थी। इसके लिए बेसिक शिक्षा परिषद के सचिव ने गाइडलाइंस जारी की थी। इसके तहत पहले दिव्यांग, फिर महिला और सबसे आखिर में पुरुष टीचर्स की काउंसलिंग होनी थी, लेकिन विभागीय अधिकारियों ने इस आदेश की अवहेलना करते हुए टीचर्स को उनकी मनचाही जगहों पर तैनाती दे दी। बताते हैं कि नियुक्तियों का यह खेल सुविधा शुल्क से खेला गया। इधर, नियुक्तियों में गड़बड़ी के विरोध में कई शिक्षिकाओं ने मोर्चा खोल दिया। उन्होंने यह मामला डीएम तक पहुंचा दिया। शिक्षिकाओं ने यह भी आरोप लगाया कि अंग्रेजी स्कूलों में टीचर्स की तैनाती के लिए 28 मार्च को डायट में जो काउंसलिंग हुई है, उसमें शासनादेश की अनदेखी हुई है। इस मामले की जांच में शिक्षकों के आरोप सही मिलने के बाद विभाग को पूर्व में हुई काउंसलिंग को निरस्त करना पड़ा है। सीडीओ सत्येंद्र कुमार का कहना है कि टीचर्स की नियुक्ति शासन से मिले आदेश के अनुरूप ही होनी चाहिए।
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अफसरों की मनमानी से बच्चों को परेशानी
बेसिक शिक्षा विभाग को दो अप्रैल से इंग्लिश मीडियम स्कूलों का संचालन करना था लेकिन यहां टीचर्स की तैनाती न हो पाने से इन स्कूलों में पढ़ाई भी नहीं हो पा रही है। काउंसलिंग के पहले टीचर्स की ट्रेनिंग कराने के मामले में विभागीय अधिकारियों पर अंगुली उठी। अब तैनाती करने में शासनादेश के उल्लंघन का मामला सामने आया है। इसके बाद यह फिर से काउंसलिंग होनी है। इससे इन स्कूलों के संचालन में लगातार देरी हो रही है।
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