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Aligarh News: मंडी में दुकान नहीं, फिर भी लाइसेंस से खुला करोड़ों का खेल
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वित्त मंत्रालय और एनसीआरबी लखनऊ द्वारा चिन्हित एसटीआर केस में पुलिस ने शन्नौ ट्रेडर्स के खाते में 11.55 करोड़ रुपये के संदिग्ध लेनदेन का खुलासा किया है। मामले में उप निरीक्षक विवेक सेंगर की रिपोर्ट पर कार्रवाई की गई है। धनीपुर मंडी के फर्जी लाइसेंस से खाता खोलकर रकम के लेनदेन का आरोप है।
जांच में सामने आया कि शन्नौ पत्नी शकील निवासी मोहल्ला कस्सावान के बैंक खाते में पांच जून से 21 दिसंबर 2024 के बीच 11.55 करोड़ रुपये जमा हुए। इनमें 10.24 करोड़ रुपये पति की फर्म अल सना ट्रेडर्स से और 1.08 करोड़ रुपये अन्य फर्मों से आए। पूछताछ में महिला ने बताया कि पति-पत्नी भैंस-भैंसा खरीदकर मीट फैक्टरी को बेचते हैं और कंपनी की रकम पहले पति के खाते में आने के बाद सिविल स्कोर बढ़ाने के लिए उसके खाते में भेजी जाती थी।
जांच में शन्नौ ट्रेडर्स के केवाईसी में धनीपुर मंडी का लाइसेंस लगा मिला, जिसमें 49 लाख रुपये वार्षिक टर्नओवर दर्शाया गया था। मंडी सचिव मुकेश त्रिपाठी ने पुलिस को लिखित रूप से बताया कि इस लाइसेंस पर मंडी में आज तक कोई लेनदेन नहीं हुआ और न फर्म के नाम दुकान आवंटित है। पुलिस के अनुसार लाइसेंस का इस्तेमाल खाते और बड़े लेनदेन को वैध दिखाने में किया गया। मामले में वित्तीय धोखाधड़ी समेत अन्य पहलुओं की जांच की जा रही है।
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अन्य खातों से 50 लाख का एंगल भी
पुलिस का मानना है कि यह मामला सिर्फ सिविल बढ़ाने का नहीं, बल्कि मंडी लाइसेंस के दुरुपयोग, टर्नओवर छिपाने और मीट कारोबार के पैसे को घुमाकर वित्तीय प्रणाली को धोखा देने का है। प्रथम दृष्टया यह वित्तीय धोखाधड़ी का मामला बनता है।
- एसटीआर बैंक से भारत सरकार के पास गई थी। उसकी जांच में सामने आया कि करंट खाते में लिमिट से कई गुना अधिक पैसा आया है। इस मामले में शन्नो के खिलाफ धोखाधड़ी की रिपोर्ट दर्ज की गई है। पुलिस विवेचना कर रही है। - अनिवेश कुमार, सीओ।
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जांच में सामने आया कि शन्नौ पत्नी शकील निवासी मोहल्ला कस्सावान के बैंक खाते में पांच जून से 21 दिसंबर 2024 के बीच 11.55 करोड़ रुपये जमा हुए। इनमें 10.24 करोड़ रुपये पति की फर्म अल सना ट्रेडर्स से और 1.08 करोड़ रुपये अन्य फर्मों से आए। पूछताछ में महिला ने बताया कि पति-पत्नी भैंस-भैंसा खरीदकर मीट फैक्टरी को बेचते हैं और कंपनी की रकम पहले पति के खाते में आने के बाद सिविल स्कोर बढ़ाने के लिए उसके खाते में भेजी जाती थी।
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जांच में शन्नौ ट्रेडर्स के केवाईसी में धनीपुर मंडी का लाइसेंस लगा मिला, जिसमें 49 लाख रुपये वार्षिक टर्नओवर दर्शाया गया था। मंडी सचिव मुकेश त्रिपाठी ने पुलिस को लिखित रूप से बताया कि इस लाइसेंस पर मंडी में आज तक कोई लेनदेन नहीं हुआ और न फर्म के नाम दुकान आवंटित है। पुलिस के अनुसार लाइसेंस का इस्तेमाल खाते और बड़े लेनदेन को वैध दिखाने में किया गया। मामले में वित्तीय धोखाधड़ी समेत अन्य पहलुओं की जांच की जा रही है।
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अन्य खातों से 50 लाख का एंगल भी
पुलिस का मानना है कि यह मामला सिर्फ सिविल बढ़ाने का नहीं, बल्कि मंडी लाइसेंस के दुरुपयोग, टर्नओवर छिपाने और मीट कारोबार के पैसे को घुमाकर वित्तीय प्रणाली को धोखा देने का है। प्रथम दृष्टया यह वित्तीय धोखाधड़ी का मामला बनता है।
- एसटीआर बैंक से भारत सरकार के पास गई थी। उसकी जांच में सामने आया कि करंट खाते में लिमिट से कई गुना अधिक पैसा आया है। इस मामले में शन्नो के खिलाफ धोखाधड़ी की रिपोर्ट दर्ज की गई है। पुलिस विवेचना कर रही है। - अनिवेश कुमार, सीओ।