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भ्रूण हत्या के चक्कर में मां को ही मार डाला!
ब्यूरो, अमर उजाला बरेली
Updated Sun, 18 Sep 2016 02:00 AM IST
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शहर के मिनी बाईपास स्थित खुसरो अस्पताल में तीन माह की गर्भवती 29 वर्षीय हीराकली की बीती रात गर्भपात के बाद अत्यधिक रक्त बहने से मौत हो गई। अस्पताल और महिला का पति गर्भपात की बात से इनकार कर रहा है जबकि पुलिस ने जो पंचनामा भराया उसमें गर्भपात कराने का जिक्र है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी यह बात साफ हुई है कि गर्भाशय फटने से रक्तस्राव हुआ, गर्भ में कोई भ्रूण भी नहीं पाया गया। अस्पताल के स्टाफ ने भी ‘सफाई’ की बात कही। तीन दिन पहले ही इस महिला का रामपुर बाग के एक सेंटर में अल्ट्रासाउंड किया गया था। बताया जा रहा कि गर्भ में कन्या भ्रूण था। इस मामले का खुलासा तब हुआ जब अगरास गांव की रहने वाली इस महिला के पति रामबाबू ने सुबह अस्पताल में डाक्टर पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए हंगामा किया। गांव से भी कई लोग आ गए थे। पति ने थाने में दी गई तहरीर में बताया कि उसने पेट दर्द की शिकायत पर पत्नी को डाक्टर को दिखाया था और उसे भर्ती कर लिया गया था। रात को उसकी हालत गंभीर बता कर हायर सेंटर के लिए रेफर किया गया। अस्पताल वालों ने एंबुलेंस बुलवाई, परिजन उसे पहले खुशलोक और फिर गंगाशील अस्पताल ले गए जहां डॉक्टरों ने हालत देख कर हाथ खड़े कर दिए। दोबारा खुसरो अस्पताल में लाने पर वहां के डाक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने अभी रिपोर्ट दर्ज नहीं की है। पति का कहना है कि भर्ती होने से पहले वह ठीक थी लेकिन इलाज करने वाली डॉक्टर कह रही हैं कि रक्तस्राव पहले से हो रहा था।
परिवार वालों ने बताया कि हंगामा होते ही अस्पताल के डॉक्टर भी महिला की फाइल लेकर भाग गए। परिवार वालों की मांग पर हुए पोस्टमार्टम में मौत की वजह गर्भाशय फटने से अधिक रक्तस्राव बताया गया है। विशेषज्ञ बता रहे हैं कि तीन माह में गर्भाशय तभी फट सकता है जब मारपीट हुई हो या फिर सफाई के दौरान अंदर नुकसान पहुंचा है।
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परिवार वालों ने बताया कि हंगामा होते ही अस्पताल के डॉक्टर भी महिला की फाइल लेकर भाग गए। परिवार वालों की मांग पर हुए पोस्टमार्टम में मौत की वजह गर्भाशय फटने से अधिक रक्तस्राव बताया गया है। विशेषज्ञ बता रहे हैं कि तीन माह में गर्भाशय तभी फट सकता है जब मारपीट हुई हो या फिर सफाई के दौरान अंदर नुकसान पहुंचा है।
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