गलत निकली ध्वजारोहण पर फतवे की बात

बरेली, ब्यूरो Updated Tue, 11 Oct 2016 01:24 AM IST
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उत्तराखंड के सितारगंज में राष्ट्रीय ध्वज फहराने को लेकर जिस फतवे पर हंगामा खड़ा किया गया था दरअसल ऐसा फतवा जारी हुआ ही नहीं था। शनिवार को वहां कहा गया था कि यह फतवा दरगाह आला हजरत के मंजरे इस्लाम दारुल इफ्ता से जारी किया गया था जबकि पुलिस जांच में यह साबित हो गया कि यहां से कोई फतवा जारी नहीं हुआ। अब इस मुद्दे पर दारुल इफ्ता ने कड़ा रवैया अपनाया है। दरगाह ने अब ऐसे लोगों के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर करने की घोषणा की है।
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 सितारगंज के कुछ लोगों ने एक धार्मिक नेता का यह कह कर विरोध किया ता कि उन्होंने एक दरगाह पर उर्स के दौरान स्वतंत्रता दिवस (15 अगस्त) को राष्ट्रीय ध्वज फहराया और उनके खिलाफ दरगाह आला हजरत स्थित दारुल इफ्ता मंजरे इस्लाम से फतवा जारी हो गया है।  इस पर वहां के लोगों ने इस फतवे के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर इसे राष्ट्रीय ध्वज का अपमान बताते हुए फतवा जारी करने वालों पर राष्ट्रदोह लका मुकदमा करने तक की मांग कर डाली।      
इस मामले में दरगाह आला हजरत से जुड़े संगठन टीटीएस के राष्ट्रीय महासचिव मुफ्ती मोहम्मद सलीम नूरी ने इस  प्रेस को बताया है कि मरकजे अहले सुन्नत बरेली से दारुल इफ्ता और यहां से जारी किए जाने वाले फतवों का महत्व पूरी दुनिया में है। यहां से जो फतवे में न कोई भेदभाव किया जाता है और न ही पक्षपात, न ही किसी के दबाव में कोई फतवा जारी किया जाता है। इसीलिए बरेली के फतवों की गरिमा है।  
उन्होंने कहा कि इसमें सितारगंज के मोहम्मद ताहिर मियां ने और उनके समर्थकों ने बरेली शरीफ के दारुल इफ्ता पर यह झूठा आरोप लगाया कि उन्होंने जब 15 अगस्त को राष्ट्रीय ध्वज फहराया तो उनका हुक्का पानी बंद करने का फतवा जारी किया गया। इस तरह का कोई भी फतवा दारुल उलूम से जारी नहीं किया गया। जबकि थाने में तहरीर देने वालों ने एक दूसरे प्रकरण में जारी किए गए फतवे की उर्दू कापी देकर वहां के प्रशासन व मीडिया को गुमराह किया। जिसका खुलासा वहां की पुलिस ने फतवे का हिंदी अनुवाद कराकर कहा कि यह राष्ट्र विरोधी होने का कोई मामला नहीं बनता। शिकायतकर्ताओं ने पुलिस को गुमराह किया है।      
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