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करमपुर चौधरी और कुतुबखाना मस्जिद प्रकरण में तल्खी और बढ़ी
बरेली
Updated Fri, 05 Jun 2015 01:18 AM IST
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हजरत शाह सकलैन एकेडमी के सरपरस्त हाजी मुमताज मियां ने कहा कि अधिकारियों के आश्वासन के बाद भी पुलिस ने करमपुर चौधरी के मदरसा जामे शाह शराफत में हो रहे जलसे में सकलैनियों पर पथराव करने वाले गिरफ्तार नहीं किए गए। यही वजह है कि हमलावरों से हौसलें बुलंद हैं और उन्होंने मदरसे के बोर्ड पर कालिख पोत दी। खुराफातियों पर पुलिस का खौफ नहीं है। हमलावरों की गिरफ्तारी नहीं हुई तो पूरे देश के सकलैनी सिलसिले के लोग सड़कों पर उतरकर आंदोलन करेंगे। सरकार के किसी नेता की खुशामद करने नहीं जाएंगे।
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दरगाह हजरत शाह शराफत मियां के मेहमान खाने में पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि मदरसे में जलसे के दौरान पथराव करके सकलैनी सिलसिले के 14 लोगों को जख्मी कर दिया गया। घटना को आठ दिन गुजर जाने के बाद भी पुलिस ने अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की है। सिर्फ तीन लोगों को अभी तक पक ड़ा गया है। पुलिस-प्रशासन के अधिकारियों ने इमामों की गिरफ्तारी के लिए आश्वासन दिया था। लेकिन इमामों की गिरफ्तारी नहीं हो पाई है। इससे हिंदुस्तान भर के सकलैनियों में गुस्सा है। हम अमन के लिए कोई भी पहल होती तो तैयार हैं, लेकिन पहले भी समझौता हो चुका है। रजवी सिलसिले के लोगों ने अभी तक कोई समझौता नहीं माना है। हमारे सब्र का बांध टूट रहा है। मदरसे के नाम पर कालिख पोतकर हमारे दादा पीर को अपमानित करने की कोशिश की गई है। जल्द ही हमलावरों की गिरफ्तारी नहीं की तो हजरत सकलैन एकेडमी की 164 ईकाइयां हैं, उन सभी स्थानों पर आंदोलन होगा। हम इंसाफ के लिए सरकार के किसी प्रतिनिधि की खुशामद करने के लिए नहीं जाएंगे। हमने बसपा की सरकार में आंदोलन किया है। सपा की सरकार में भी कर लेंगे। इस मौके पर हमजा सक लैनी, मुनीफ सकलैनी, आफताब सक लैनी, हजरत शाह एकेडमी के प्रदेश अध्यक्ष लतीफ कु रैशी, जाहिद सक लैनी, मुन्ने सकलैनी, इंतजार सकलैनी आदि मौजूद रहे।
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हमें धोखे से बुलाकर पीटा गया: कासिम खां
बरेली। करमपुर चौधरी गांव की जामा मस्जिद के इमाम मौलाना कासिम खां ने कहा कि मौलाना इस्लाम ने उन्हें धोखा देकर बुलाया था। उनके कहने पर उन्होंने गांव से जलसे के लिए चंदा भी करा दिया था। मस्जिद में ऐलान करके जलसे में पहुंचने के लिए कहा था। उन्हें यह मालूम नहीं था कि मौलाना इस्लाम ने उन्हें फंसाने की साजिश की है। जलसे में निजामत करने वाले आला हजरत को छोड़कर बाकी सभी के नारे लगा रहे थे। उसने माइक लेकर आला हजरत का नारा लगाया तो बाहर के गांव से बुलाए गए सक लैनियों ने उन्हें पकड़कर हमला कर दिया। इससे करमपुर चौधरी गांव के कुछ लड़कों को गुस्सा आ गया। दोनों सिलसिलों के लोगों में मारपीट हुई, लेकिन पुलिस एक तरफा कार्रवाई कर रही है। मौलाना इस्लाम के खिलाफ भी तो कार्रवाई होनी चाहिए। बिना परमीशन के जलसा उन्होंने कराया ही क्यों। लोगों को गुमराह करके जलसे के लिए चंदा क्यों लिया। घटना की सही जानकारी करनी है तो पुलिस गांव में लोगों को इकट्ठा करके जानकारी क र ले।
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