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कर्मचारी नेता की मौत के बाद कत्था फैक्ट्री में हंगामा

बरेली Updated Tue, 07 Apr 2015 01:37 AM IST
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इज्जतनगर की कत्था फैक्ट्री में कार्यरत कर्मचारी नेता की काम के दौरान मौत हो गई। इसके बाद परिवार के लोग और कर्मचारी एकजुट हो गए। काम बंद करके चार घंटे डायरेक्टर के दफ्तर के बाहर शव रखकर उन्होंने प्रदर्शन किया। लंबी वार्ता के बाद समझौता हुआ तो शव को पोस्टमार्टम के लिए भिजवाया जा सका।
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कत्था फैक्ट्री नाम से मशहूर इंडियन वुड प्रोडक्ट कंपनी लिमिटेड में चिप्स मशीन सुपरवाइजर पद पर कार्यरत राजपाल सिंह फैक्ट्री कैंपस में ही परिवार के साथ रहते थे। वे इंटक यूनियन इकाई के महामंत्री थे। सोमवार को ड्यूटी पर आए। दोपहर साढ़े ग्यारह बजे करीब सीने में दर्द की शिकायत हुई। साथी कर्मचारी उन्हें घर ले गए। वहां से अस्पताल जाते वक्त राजपाल की मौत हो गई। दोपहर के वक्त सूचना मिलते ही कर्मचारियों ने काम ठप कर दिया। शाम करीब पांच बजे राजपाल के शव को फैक्ट्री में डायरेक्टर के कार्यालय के बाहर लाकर रख दिया गया। सूचना पर इज्जततनगर थाना प्रभारी कमल यादव भा काफी फोर्स लेकर आ गए। इसी फैक्ट्री में काम करने वाले राजपाल के भाई कामेश, आलोकनगर के सभासद विक्रम सिंह और यूनियन के नेताओं को डायरेक्टर केके धवन और एचआर हेड एके राय ने वार्ता के लिए बुलवा लिया। कंपनी अफसरों और कर्मचारियों के बीच कई दौर की लंबी वार्ता हुई। अफसर अपने कर्मचारी की मृत्यु के  बाद देय भुगतान संबंधी प्रक्रिया अपनाने की बात कह रहे थे तो राजपाल के परिवार का तर्क था कि काम करते वक्त मौत होने के इस मामले में मुआवजे की निश्चित रकम पहले ही तय की जाए। रात नौ बजे करीब दोनों पक्षों में समझौते के बाद शव को पोस्टमार्टम हाउस ले जाया गया। बाकी मांगों पर सहमति के साथ ही पच्चीस हजार रुपये की आर्थिक मदद परिवार को तत्काल दे दी गई। कर्मचारियों ने भी गतिरोध खत्म होने की घोषणा की। मंगलवार को पोस्टमार्टम के बाद अंत्येष्टि की जाएगी। राजपाल के परिवार में पत्नी माला के अलावा दस साल का बेटा अभय और आठ साल की बेटी अंकिता है।


तीखे आरोप लगाए प्रबंधन पर
राजपाल के रिश्तेदारों और कर्मचारियों ने प्रबंधन पर तीखे आरोप लगाए। बहनोई सतीश चौहान ने बताया कि कर्मचारी हितों पर राजपाल के आवाज उठाने से अफसर नाराज रहते थे। डायरेक्टर ने उन्हें नेतागिरी न छोड़ने पर निलंबित करने की चेतावनी दे रखी थी। शायद राजपाल की जान इसी डिप्रेशन में गई। उन्होंने कहा कि काम के दौरान तबियत खराब होने पर न तो अफसर राजपाल को देखने आए और न प्राथमिक इलाज कराया। ऐसा होता तो उनकी जान बच जाती।

वर्जन
जैसे ही पता लगा कि राजपाल की तबियत खराब है उनसे इलाज कराने को कहा गया। वह स्वेच्छा से ही घर गए। मृत्यु के कई घंटे बाद शव को दफ्तर के बाहर लाकर रख दिया गया। यह अच्छी बात नहीं है। हम तो अपने सभी कर्मचारियों के हितों का ध्यान रखते हैं। राजपाल के परिवार को भी सभी आवश्यक सहूलियत दी जाएंगी। - एके राय, एचआर हेड 

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