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Pilibhit News: तीन माह से बाघ ने जमा रखा है डेरा, कई जानवरों को बना चुका निवाला
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बाघ के हमले में किसान की मौत के बाद लगी लोगों की भीड़।
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पूरनपुर। शांतिनगर गांव की सीमा में शुक्रवार को किसान की बाघ के हमले में मौत की घटना ने ग्रामीणों के उस डर को सच कर दिया, जिसे वे पिछले करीब तीन माह से अपने बीच महसूस कर रहे थे।
ग्रामीणों के मुताबिक, क्षेत्र में लगातार बाघ की मौजूदगी देखी जा रही है। बाघ कई बार आबादी के आसपास और खेतों में दिखाई दे चुका है। इस दौरान उसने कई पालतू और अन्य जानवरों को भी अपना शिकार बनाया है। लगातार बाघ की मौजूदगी के बावजूद ग्रामीणों का कहना है कि उसकी दहशत कम करने के लिए प्रभावी कदम नहीं उठाए गए।
बता दें कि इस मामले को लेकर 25 अगस्त को संवाद न्यूज एजेंसी की खबर अमर उजाला ने प्रकाशित किया था, लेकिन इसके बाद भी वन विभाग नहीं चेता और एक ग्रामीण की जान चली गई।
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शांतिनगर गांव के लोगों के मुताबिक, खेतों के आसपास बाघ की चहलकदमी अक्सर देखी जाती रही है। बाघ के डर से शाम ढलने के बाद लोग खेतों की ओर जाने से बचते हैं। किसान दिन में भी अकेले खेतों पर जाने से कतराने लगे हैं। शुक्रवार को मुंशी पर हुए हमले के बाद ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। घटना के बाद बड़ी संख्या में ग्रामीण गांव के तिराहे पर एकत्र हो गए। शव को सड़क पर रखकर ग्रामीणों ने जाम लगा दिया। उनकी मांग थी कि वन विभाग की टीम तत्काल मौके पर पहुंचे और बाघ को पकड़ने के लिए अभियान चलाए। ग्रामीणों का कहना था कि जब तक बाघ पकड़ा नहीं जाता, तब तक क्षेत्र में इसी तरह का खतरा बना रहेगा।
देर रात तक ग्रामीणों का हंगामा जारी रहा। पुलिस टीम मौके पर मौजूद रही और ग्रामीणों को समझाने का प्रयास करती रही। सीओ विधि भूषण ने बताया कि थाना पुलिस मौके पर पहुंचकर स्थिति को संभाला। ग्रामीणों को आश्वासन दिया गया है। संवाद
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ग्रामीणों के मुताबिक, क्षेत्र में लगातार बाघ की मौजूदगी देखी जा रही है। बाघ कई बार आबादी के आसपास और खेतों में दिखाई दे चुका है। इस दौरान उसने कई पालतू और अन्य जानवरों को भी अपना शिकार बनाया है। लगातार बाघ की मौजूदगी के बावजूद ग्रामीणों का कहना है कि उसकी दहशत कम करने के लिए प्रभावी कदम नहीं उठाए गए।
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बता दें कि इस मामले को लेकर 25 अगस्त को संवाद न्यूज एजेंसी की खबर अमर उजाला ने प्रकाशित किया था, लेकिन इसके बाद भी वन विभाग नहीं चेता और एक ग्रामीण की जान चली गई।
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शांतिनगर गांव के लोगों के मुताबिक, खेतों के आसपास बाघ की चहलकदमी अक्सर देखी जाती रही है। बाघ के डर से शाम ढलने के बाद लोग खेतों की ओर जाने से बचते हैं। किसान दिन में भी अकेले खेतों पर जाने से कतराने लगे हैं। शुक्रवार को मुंशी पर हुए हमले के बाद ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। घटना के बाद बड़ी संख्या में ग्रामीण गांव के तिराहे पर एकत्र हो गए। शव को सड़क पर रखकर ग्रामीणों ने जाम लगा दिया। उनकी मांग थी कि वन विभाग की टीम तत्काल मौके पर पहुंचे और बाघ को पकड़ने के लिए अभियान चलाए। ग्रामीणों का कहना था कि जब तक बाघ पकड़ा नहीं जाता, तब तक क्षेत्र में इसी तरह का खतरा बना रहेगा।
देर रात तक ग्रामीणों का हंगामा जारी रहा। पुलिस टीम मौके पर मौजूद रही और ग्रामीणों को समझाने का प्रयास करती रही। सीओ विधि भूषण ने बताया कि थाना पुलिस मौके पर पहुंचकर स्थिति को संभाला। ग्रामीणों को आश्वासन दिया गया है। संवाद