सोनू की दादी ने बनाई थी भागने की योजना
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पठान गैंग सेहरामऊ दक्षिणी (शाहजहांपुर) के गांव पसगवां भरगवां में डेरा डालकर रह रहा था। वर्ष 2014 में इस गैंग ने रोजा में रिटायर्ड पतरौल राम लड़ैते की पत्नी रामबेटी और पांचवीं में पढ़ने वाले बेटे विजय की बेरहमी से हत्या कर घर में लूटपाट की थी। इसके बाद इस गैंग ने रुद्रपुर (उत्तराखंड) में भी डकैती डाली। रोजा पुलिस ने घटना का खुलासा कर खान उर्फ पठान, मेहरान उर्फ दिवाना, सोनू उर्फ फौलाद, असलम आदि को जेल भेजा था। रुद्रपुर में चल रहे डकैती के मुकदमे में पेशी के लिए इन बदमाशों को पुलिस वहां भी लेकर जाती थी।
फरवरी में सोनू की दादी सिंगरिया शाहजहांपुर जेल में उनसे मुलाकात करने पहुंची और इसी दौरान रुद्रपुर में पेशी से लौटने के दौरान फरार होने की योजना बनी। इससे पहले सिंगरिया अपने परिवार को गांव पसगवां भरगवां से हटाकर संभल में हसनपुर रोड पर सितारा मस्जिद के पास डेरा डाल चुकी थी। 16 मार्च को रुद्रपुर में पेशी के दौरान भी सिंगरिया इन बदमाशों से मिली। उनसे भागकर सीधे संभल आने को कहा। योजना के तहत बदमाशों ने भोजीपुरा के बिलवा से पहले लघु शंका की बात कहते हुए गाड़ी रुकवाई। पुलिस वालों ने गाड़ी रोकने में आनाकानी की तो वे उनसे भिड़ने को तैयार हो गए। सोनू ने बताया कि पुलिस के गाड़ी रोकते ही मेहरान, पठान उर्फ खान मय हथकड़ी के भाग निकले। फिर वह भी गाड़ी से कूदकर दूसरी तरफ भागा। पुलिस ने फायरिंग की तो वह खेत में लेट गया और रात भर वहीं छिपा रहा। 17 मार्च को भोर में ही वह पैदल चलकर जंक्शन पहुंचा और यहां से ट्रेन पकड़कर संभल में हसनपुर रोड पर अपने परिवार के डेरे पर पहुंच गया।
00
अखबार से पता चला, मेहरान मारा गया
सोनू ने बताया कि वह पढ़ना-लिखना नहीं जानता लेकिन दूसरे साथियों का क्या हुआ यह जानने के लिए संभल पहुंचने से पहले रास्ते में अखबार खरीदा और एक व्यक्ति से पढ़वाया। अखबार में छपी खबर से ही उसे पता चला कि कस्टडी से उसके साथ भागा मेहरान पुलिस की गोली से मारा गया।
00
ऐसे मिली थी पसगवां भरगवां में शरण
सेहरामऊ दक्षिणी का गांव पसगवां भरगवां शाहजहांपुर के एक हिस्ट्रीशीटर और पत्रकार प्रदीप शुक्ला के हत्यारोपी डॉक्टर का पैतृक गांव है। वे शहर में रहते हैं लेकिन गांव में उनका दबदबा है। सोनू ने बताया कि दो साल पहले उनके गैंग की मुलाकात हिस्ट्रीशीटर से हुई थी जिसने उनके कुनबे को डेरा डालने के लिए जगह दिलाई। पहले हिस्ट्रीशीटर के एक विरोधी जनप्रतिनिधि ने विरोध किया लेकिन बाद में उसके गिरोह को इस जनप्रतिनिधि का भी संरक्षण मिल गया। रोजा डबल मर्डर में पकड़े जाने के बाद उनका कुनबा संभल चला गया।