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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Bareilly News ›   Anguri Tanda is given from childhood as training of crime

अंगूरी टांडा में बचपन से ही दी जाती है अपराध की ट्रेनिंग

Fri, 29 Sep 2017 02:26 AM IST
बरेली
बरेली Updated Fri, 29 Sep 2017 02:26 AM IST
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जिला मुख्यालय से महज सात किमी दूर रामगंगा की कटरी में बसा अंगूरी टांडा गांव जरायम की नर्सरी है। यहां बच्चों को कच्ची उम्र में जरायम का ककहरा सिखाया जाता है। लूट, डकैती की वारदातों के साथ यहां के लोग अब मादक पदार्थों की तस्करी के धंधे में भी उतर आए हैं। जिले में कच्छा बनियान गिरोह के एक के बाद एक डकैती की ताबड़तोड़ वारदातों को अंजाम देने के बाद इस गांव में बसे पंखिया जाति के बदमाश पुलिस के टारगेट पर हैं। माना जा रहा है कि डकैती की वारदातों में पंखियों का ही हाथ हो सकता है। दरअसल ये लोग भी कच्छा बनियान पहनकर लूटपाट करते हैं।  
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एक वक्त था, जब पंखियों के गिरोहों की कटरी इलाके में खासी दहशत थी। रात की तो बात छोड़िए, दिन में भी लोग उधर से गुजरने में कतराते थे। पंखियां कटरी से होकर निकलने वाले बैल गाड़ियों के काफिलों को लूट लेते थे। वक्त बीता तो कटरी के बदमाशों में वर्चस्व को लेकर गैंगवार होने लगी। उस दौरान सुभाषनगर थाने के हिस्ट्रीशीटर इशहाक और कुख्यात बदमाश अमरीन का गैंग सबसे ज्यादा ताकतवर माना जाता था। अक्सर दोनों गिरोह आमने-सामने आ जाते थे। अक्सर गोलियों की तड़तड़ाहट से कटरी इलाका गूंजता था। सुभाषनगर थाने में इश्हाक के खिलाफ 40 से ज्यादा मामले दर्ज हैं, जबकि अमरीन को पुलिस ने एनकाउंटर में ठिकाने लगा दिया।   
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वारदात के बाद नेताओं के यहां लेते हैं शरण  
शहर के दो बड़े नेताओं की भी अंगूरी टाडा गांव को जरायम का गढ़ बनाने में अहम भूमिका रही है। इनके संरक्षण में अंगुरी टांडा के पंखियों ने बड़ी-बड़ी वारदातें की हैं। सूत्रों के मुताबिक वारदात को अंजाम देने के पंखिया अक्सर अपने इन्हीं राजनीतिक आकाओं के यहां पनाह लेते रहे हैं। उनसे पुलिस की मिलीभगत भी किसी से छिपी नहीं है। रामगंगा चौकी के ठीक यह गांव बसा हुआ है। अधिकारियों के दबाव में पुलिस जब भी कोई कार्रवाई करती है तो बदमाश गांव छोड़कर कटरी इलाके में भाग जाते हैं। 
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दिन में बैंड बजाते और तांगा चलाते हैं बदमाश  
रामगंगा कटरी क्षेत्र जिन बदमाशों की दहशत से थर्राता है, वे दिखावे के लिए बैंड बाजा बजाने, तांगा चलाने और सब्जियों पर पॉलिश करने का काम करते हैं, लेकिन सूरज ढलते ही डंडे, रॉड लेकर लूट के इरादे से निकल पड़ते हैं।  

बच्चों से बिकवाते हैं स्मैक की पुड़िया 
लूटपाट और डकैती के लिए कुख्यात बदमाश पिछले कुछ सालों से मादक पदार्थों की तस्करी भी करने लगे हैं। इस गांव के छोटे-छोटे लड़के आस-पास के गांवों में स्मैक की पुड़िया बेचते मिल जाते हैं। एक पुड़िया 50 से 100 रुपये के बीच बेची जाती है। आज भी इस गांव में युवकों की शादी तभी होती है, जब वह लूट की पांच से आठ वारदातों को अंजाम दे चुका होता है। 

अनवार और मुन्ना हैं पुलिस के टारगेट पर 
अंगूरी टांडा में कादर खां उर्फ साधू, निसार खां और सादिर खां को बिहार में वारदात के दौरान मार दिया गया था। पुलिस के टारगेट पर अब भी जाहिद, मजफूज उर्फ मुन्ना, अनवार उर्फ बीड़ी उर्फ सफलू सहित दर्जनों बदमाश हैं। क्राइम ब्रांच ने अंगूरी टांडा में दबिश देकर करीब 18 पंखियों को हिरासत में लिया है। इनमें चिरागो, साबिर पंखिया, आसद आदि हैं। उन्हें सुभाषनगर थाने में रखा गया है। 


पंखियों के ठिकानों पर पुलिस ने छापामारी की है। कई बदमाशों को उठाकर पूछताछ की जा रही है। अपराध और अपराधी को पनपने नहीं दिया जाएगा। रेंज में इनके ठिकानों पर पुलिस कार्रवाई कर रही है। 
- एसके भगत, आईजी बरेली रेंज 
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