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आईटीआई में एडमिशन नहीं मिला तो ट्रेन से कट गया
ब्ययूराो, अमर उजाला बरेली।
Updated Sat, 06 Aug 2016 01:03 AM IST
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आइटीआई में एडमिशन न मिलने पर घर वालों ने डांटा तो 17 साल के छात्र ने ट्रेन से कटकर जान दे दी। वह दाखिले के लिए जरूरी कागज समय पर जमा नहीं कर पाया था। उसकी मौत से घर में कोहराम मच गया।
सिरौली के अटाफुंदापुर गांव के पूरनलाल मौर्य के बेटे प्रवेंद्र कुमार ने इसी साल लभारी के बाबा हरदेव सिंह इंटर कालेज से इंटरमीडिएट की परीक्षा पास की थी। उसने आईटीआई करने के लिए बरेली के एक कॉलेज में फार्म डाला था। काउंसलिंग में वह पास हो गया। बृहस्पतिवार को वह बरेली गया था। जाति प्रमाण पत्र वह घर ही भूल गया। इस कारण उसका एडमिशन नहीं हो पाया और घर वापस आ गया। हालांकि प्रवेश की अंतिम तारीख आठ अगस्त थी। ग्रामीणों के अनुसार उसकी लापरवाही पर घर वालों ने उसे डांट दिया था। इससे नाराज होकर शुक्रवार की सुबह वह घर वालों को बताए बिना ही साइकिल लेकर चला गया। बड़े भाई धर्मपाल ने गांव में उसकी तलाश की। फिर दबतरा रेलवे स्टेशन पहुंच गए। वहां ट्रेन से कटकर युवक की मौत की जानकारी मिली तो ट्रैक पर पहुंच गए। दो हिस्सों में कटा शव प्रवेंद्र का ही था। उन्होंने घर वालों को इसकी जानकारी दी तो कोहराम मच गया। उसकी जेब में साइकिल की चाबी और एक पर्ची मिली है। पर्ची में परिवार के सभी सदस्यों के नाम और जयहिंद लिखा था। जीआरपी ने शव का पंचनामा भरकर पोस्टमार्टम के लिए बदायूं भेज दिया है।
बदहवास हो गई मां
प्रवेंद्र दो भाइयों और एक बहन में सबसे छोटा था। पढ़ाई में अव्वल होने के साथ-साथ अपनी पिता की दुकान में भी हाथ बंटाता था। मां मुन्नी देवी का रो रोकर बुरा हाल है। मौत की सूचना मिलते ही वह बेहोश हो गईं। खेती करने वाले बड़े भाई धर्मपाल और बहन रुचि को भी लोग समझाते रहे।
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सिरौली के अटाफुंदापुर गांव के पूरनलाल मौर्य के बेटे प्रवेंद्र कुमार ने इसी साल लभारी के बाबा हरदेव सिंह इंटर कालेज से इंटरमीडिएट की परीक्षा पास की थी। उसने आईटीआई करने के लिए बरेली के एक कॉलेज में फार्म डाला था। काउंसलिंग में वह पास हो गया। बृहस्पतिवार को वह बरेली गया था। जाति प्रमाण पत्र वह घर ही भूल गया। इस कारण उसका एडमिशन नहीं हो पाया और घर वापस आ गया। हालांकि प्रवेश की अंतिम तारीख आठ अगस्त थी। ग्रामीणों के अनुसार उसकी लापरवाही पर घर वालों ने उसे डांट दिया था। इससे नाराज होकर शुक्रवार की सुबह वह घर वालों को बताए बिना ही साइकिल लेकर चला गया। बड़े भाई धर्मपाल ने गांव में उसकी तलाश की। फिर दबतरा रेलवे स्टेशन पहुंच गए। वहां ट्रेन से कटकर युवक की मौत की जानकारी मिली तो ट्रैक पर पहुंच गए। दो हिस्सों में कटा शव प्रवेंद्र का ही था। उन्होंने घर वालों को इसकी जानकारी दी तो कोहराम मच गया। उसकी जेब में साइकिल की चाबी और एक पर्ची मिली है। पर्ची में परिवार के सभी सदस्यों के नाम और जयहिंद लिखा था। जीआरपी ने शव का पंचनामा भरकर पोस्टमार्टम के लिए बदायूं भेज दिया है।
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बदहवास हो गई मां
प्रवेंद्र दो भाइयों और एक बहन में सबसे छोटा था। पढ़ाई में अव्वल होने के साथ-साथ अपनी पिता की दुकान में भी हाथ बंटाता था। मां मुन्नी देवी का रो रोकर बुरा हाल है। मौत की सूचना मिलते ही वह बेहोश हो गईं। खेती करने वाले बड़े भाई धर्मपाल और बहन रुचि को भी लोग समझाते रहे।
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