{"_id":"58d7efd14f1c1b14301a22fc","slug":"33-prosecution-of-sheila-now-will-end","type":"story","status":"publish","title_hn":"शहला के 33 मुकदमे अब खत्म होेंगे","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
शहला के 33 मुकदमे अब खत्म होेंगे
बरेली।
Updated Mon, 27 Mar 2017 01:13 AM IST
विज्ञापन
33 prosecution of Sheila Now will end
- फोटो : अमर उजाला
सपा सरकार के कद्दावर मंत्री शिवपाल यादव का करीबी होने के कारण नगर पालिका परिषद, नवाबगंज की चेयरमैन शहला ताहिर ने भाजपा जिलाध्यक्ष और दुकानदारों के खिलाफ 33 मुकदमे लिखाए थे, जिन्हें अब योगी सरकार में खत्म करने की तैयारी चल रही है।
15 फरवरी 2015 में नवाबगंज के तत्कालीन प्रभारी निरीक्षक जवाहर लाल ने आला अधिकारियों के निर्देशों को दर किनार करते हुए एक ही दिन में भाजपा जिलाध्यक्ष रविंद्र सिंह राठौर समेत 38 लोगों के खिलाफ शहला ताहिर की तहरीर पर 33 मुकदमे लिखकर सबको हैरानी में डाल दिया था।
शहला का आरोप है कि नगर पालिका का चेयरमैन रहने के दौरान 2001 में रविंद्र सिंह राठौर ने धोखाधड़ी और कूट रचित दस्तावेज तैयार करके दुकानों का आवंटन किया है। इसमें उनके कुछ साथी भी शामिल थे। आरोप दुकानों से लूटपाट का भी था।
विज्ञापन
सत्ता की हनक में शहला ने मुकदमे तो इंस्पेक्टर को इस्तेमाल करके लिखा दिए थे, लेकिन अधिकारियों ने सपा सरकार में भी इन मुकदमों को गंभीरता से नहीं लिया था। हालांकि शहला अधिकारियों पर कार्रवाई के लिए दबाव बनाती रहीं। तत्कालीन एसएसपी धर्मवीर यादव ने सभी मुकदमों को क्राइम ब्रांच को ट्रांसफर करके पेंडिंग में डलवा दिया। इन दिनों क्राइम ब्रांच के सात इंस्पेक्टर इन मुकदमों की विवेचना कर रहे हैं। इस मामले में तीन विवेचकों से बात हुई। तीनों का कहना है कि शहला ताहिर किसी मुकदमे में ऐसा सुबूत नहीं दे पाईं कि चार्जशीट लगाई जा सके। इसलिए इन मुकदमों में फाइनल रिपोर्ट ही लगनी है।
यह था मामला
शहला ताहिर 1995 में चेयरमैन चुनी गईं। इस दौरान उन्होंने कस्बे में दुकानों का निर्माण कराने के बाद कार्यकाल खत्म होने से पहले ही उनका आवंटन कर दिया, जबकि दुकानों का निर्माण पूरा नहीं हो पाया था। दुकानों के आवंटन के नाम पर नगर पालिका के खाते में सिर्फ 1.80 लाख रुपये की जमा हुए। वर्ष 2000 में रविंद्र कुमार राठौर नए चेयरमैन चुने गए तो उन्होंने डीएम से परमीशन लेकर दुकानों का निर्माण पूरा कराकर उनका 50 लाख रुपये में खुला आवंटन कर दिया। शहला को यह बात गवारा नहीं हुई। रविंद्र कुमार राठौर का कार्यकाल खत्म होने के बाद फिर से वह चेयरमैन बनीं तो दुकानों के आवंटन निरस्त कराने के लिए कार्रवाई शुरू कर दी गई।
मैंने लीगल तरीके से दुकानों का आवंटन किया था। बावजूद इसके शहला ताहिर ने मुकदमा लिखा दिया। जीत हमेशा सच्चाई की होती है। सारे अधिकारी भी जानते थे झूठे मुकदमे लिखे गए हैं। शहला ताहिर ने गुरु गोविंद पार्क को तोड़कर दुकानें बनाने के बाद अपने चहेतों को मामूली रकम में आवंटित कर दिया। नगर पालिका परिषद, नवाबगंज में करोड़ों का घाटा हुआ है। सभी मामलों की जांच होगी। इतना ही नहीं जिले भर में हमारे कार्यकर्ताओं के खिलाफ और भी झूठे मुकदमे लिखाए गए हैं उन्हें भी खत्म कराया जाएगा।
-रविंद्र सिंह राठौर, भाजपा जिलाध्यक्ष
शहला ताहिर द्वारा लिखाए गए मुकदमों की विवेचना की नए सिरे से समीक्षा करके आगे की कार्रवाई कराई जाएगी। आरोप साबित नहीं होने पर सभी मुकदमों की फाइल को बंद करा दिया जाएगा।
-आशुतोष कुमार, डीआईजी
क्राइम ब्रांच को फाइनल रिपोर्ट लगाने तो दो। हमारे पास जो सुबूत हैं, उन्हें पेश किया जाएगा। इसके अलावा जैसे परिस्थिति होगी उसी हिसाब से हम भी कानूनी लड़ाई लड़ेंगे।
- शहला ताहिर, चेयरमैन, नगर पालिका परिषद, नवाबगंज
विज्ञापन
15 फरवरी 2015 में नवाबगंज के तत्कालीन प्रभारी निरीक्षक जवाहर लाल ने आला अधिकारियों के निर्देशों को दर किनार करते हुए एक ही दिन में भाजपा जिलाध्यक्ष रविंद्र सिंह राठौर समेत 38 लोगों के खिलाफ शहला ताहिर की तहरीर पर 33 मुकदमे लिखकर सबको हैरानी में डाल दिया था।
विज्ञापन
शहला का आरोप है कि नगर पालिका का चेयरमैन रहने के दौरान 2001 में रविंद्र सिंह राठौर ने धोखाधड़ी और कूट रचित दस्तावेज तैयार करके दुकानों का आवंटन किया है। इसमें उनके कुछ साथी भी शामिल थे। आरोप दुकानों से लूटपाट का भी था।
विज्ञापन
सत्ता की हनक में शहला ने मुकदमे तो इंस्पेक्टर को इस्तेमाल करके लिखा दिए थे, लेकिन अधिकारियों ने सपा सरकार में भी इन मुकदमों को गंभीरता से नहीं लिया था। हालांकि शहला अधिकारियों पर कार्रवाई के लिए दबाव बनाती रहीं। तत्कालीन एसएसपी धर्मवीर यादव ने सभी मुकदमों को क्राइम ब्रांच को ट्रांसफर करके पेंडिंग में डलवा दिया। इन दिनों क्राइम ब्रांच के सात इंस्पेक्टर इन मुकदमों की विवेचना कर रहे हैं। इस मामले में तीन विवेचकों से बात हुई। तीनों का कहना है कि शहला ताहिर किसी मुकदमे में ऐसा सुबूत नहीं दे पाईं कि चार्जशीट लगाई जा सके। इसलिए इन मुकदमों में फाइनल रिपोर्ट ही लगनी है।
यह था मामला
शहला ताहिर 1995 में चेयरमैन चुनी गईं। इस दौरान उन्होंने कस्बे में दुकानों का निर्माण कराने के बाद कार्यकाल खत्म होने से पहले ही उनका आवंटन कर दिया, जबकि दुकानों का निर्माण पूरा नहीं हो पाया था। दुकानों के आवंटन के नाम पर नगर पालिका के खाते में सिर्फ 1.80 लाख रुपये की जमा हुए। वर्ष 2000 में रविंद्र कुमार राठौर नए चेयरमैन चुने गए तो उन्होंने डीएम से परमीशन लेकर दुकानों का निर्माण पूरा कराकर उनका 50 लाख रुपये में खुला आवंटन कर दिया। शहला को यह बात गवारा नहीं हुई। रविंद्र कुमार राठौर का कार्यकाल खत्म होने के बाद फिर से वह चेयरमैन बनीं तो दुकानों के आवंटन निरस्त कराने के लिए कार्रवाई शुरू कर दी गई।
मैंने लीगल तरीके से दुकानों का आवंटन किया था। बावजूद इसके शहला ताहिर ने मुकदमा लिखा दिया। जीत हमेशा सच्चाई की होती है। सारे अधिकारी भी जानते थे झूठे मुकदमे लिखे गए हैं। शहला ताहिर ने गुरु गोविंद पार्क को तोड़कर दुकानें बनाने के बाद अपने चहेतों को मामूली रकम में आवंटित कर दिया। नगर पालिका परिषद, नवाबगंज में करोड़ों का घाटा हुआ है। सभी मामलों की जांच होगी। इतना ही नहीं जिले भर में हमारे कार्यकर्ताओं के खिलाफ और भी झूठे मुकदमे लिखाए गए हैं उन्हें भी खत्म कराया जाएगा।
-रविंद्र सिंह राठौर, भाजपा जिलाध्यक्ष
शहला ताहिर द्वारा लिखाए गए मुकदमों की विवेचना की नए सिरे से समीक्षा करके आगे की कार्रवाई कराई जाएगी। आरोप साबित नहीं होने पर सभी मुकदमों की फाइल को बंद करा दिया जाएगा।
-आशुतोष कुमार, डीआईजी
क्राइम ब्रांच को फाइनल रिपोर्ट लगाने तो दो। हमारे पास जो सुबूत हैं, उन्हें पेश किया जाएगा। इसके अलावा जैसे परिस्थिति होगी उसी हिसाब से हम भी कानूनी लड़ाई लड़ेंगे।
- शहला ताहिर, चेयरमैन, नगर पालिका परिषद, नवाबगंज