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मेरठ के गैंग ने उड़ाए थे बैंक से 20 लाख रुपये

Tue, 18 Sep 2018 12:36 AM IST
Updated Tue, 18 Sep 2018 12:36 AM IST
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मेरठ के गैंग ने उड़ाए थे बैंक से 20 लाख रुपये
सिविल लाइंस स्थित आईसीआईसीआई बैंक से 20 लाख रुपये मेरठ के मोहन गैंग ने उड़ाए थे। क्राइम ब्रांच ने कानपुर के दो बदमाशों को गिरफ्तार कर घटना का खुलासा कर दिया। उनके कब्जे से डेढ़ लाख रुपये और चोरी के रुपयों से खरीदी गई बाइक बरामद हुई है।
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सीएमएस कंपनी के कर्मचारी 19 जुलाई को रुपये जमा करने के लिए सिविल लाइंस स्थित आईसीआईसीआई बैंक में पहुंचे थे। वहां से उनका 20 लाख रुपयों से भरा बैग चोरी हो गया था। पुलिस ने इस मामले में कानपुर देहात के थाना सिकंदरा स्थित पटेल चौक के पास सुनील के मकान में किराये पर रहने वाले अजय उर्फ नरेश और कानपुर नगर में थाना कल्याणपुर में बिठूर रोड निवासी रोहित उर्फ दीपेंद्र उर्फ चिंकी को गिरफ्तार किया है। उनके कब्जे से 220 सीसी पल्सर बाइक और डेढ़ लाख रुपये बरामद हुए हैं। अजय उर्फ नरेश मूलरूप से उन्नाव में थाना गंगाघाट के मोहल्ला गांधीनगर का रहने वाला है। उसने दो लाख रुपये अपनी बेटी के बैंक खाते में भी जमा किए। प्रेसवार्ता के दौरान एसपी (क्राइम) रमेश भारतीय ने बताया कि घटना छह बदमाशों ने अंजाम दी, इनमें मेरठ का मोहन, कानपुर का अमित, अलीगढ़ का सागर फरार है। इनके गैंग का एक सदस्य मनीष भांतू कुछ दिन पहले मुरादाबाद में जेल चला गया है। यह गैंग यूपी के अलावा मध्य प्रदेश और राजस्थान में भी वारदातें करता है। गैंग का सरगना मेरठ का मोहन है, उसी ने बैंक में रेकी की थी। खुलासा करने वाली टीम में सीओ प्रथम कुलदीप कुमार, कोतवाली इंस्पेक्टर गीतेश कपिल, क्राइम ब्रांच से एसआई जावेद खान, अब्बास हैदर और गिरीश जोशी शामिल रहे।
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बाइक से सफर और कानपुर में बंटवारा
बदमाशों ने बताया कि वे पूरा सफर बाइकों पर ही करते हैं। आईसीआईसीआई बैंक में वारदात के बाद तीन पल्सर बाइक पर सभी कानपुर पहुंचे। वहां रुपयों का बंटवारा किया। सभी को तीन-तीन लाख रुपये मिले। बाकी खाने-पीने में खर्च हो गए और एक बाइक खरीद ली।
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फर्जी आईडी पर रुके थे शहर में
वारदात को अंजाम देने से पहले बदमाश शहर के पारस होटल में फर्जी आईडी से रुके थे। उनका कहना है कि वे जिस शहर में जाते थे, उसी दिन वारदात को अंजाम देकर भाग निकलते थे। अगर पहले दिन सफलता नहीं मिलती थी तो होटल में रुक जाते थे और घटना को अंजाम देने के बाद ही लौटते थे।
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