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डॉक्टर के खाते से साइबर ठग ने उड़ाये 15.5 लाख
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बरेली। ईसाईयों की पुलिया स्थित दयावती अस्पताल के संचालक आथ्रोपेडिक डॉ. जितेंद्र अग्रवाल के खाते से साइबर ठगों ने 15.5 लाख रुपये उड़ा लिए। डॉक्टर ने एसएसपी मुनिराज जी. से जांच कराकर कार्रवाई करने और रकम रिकवर कराने की गुजारिश की है। मामले की रिपोर्ट कोतवाली में दर्ज कराई गई है।
डॉक्टर के मुताबिक करीब पंद्रह दिन पहले उन्होंने आइडिया से एयरटेल में अपनी सिम कार्ड पोर्ट कराया था। मंगलवार दोपहर एक निजी नंबर से फोन आया और दूसरी तरफ से बोल रहे व्यक्ति ने अपना नाम अरुण कुमार जेटली बताया। खुद को एयरटेल कंपनी का कर्मचारी बताकर नए सिम के एक्टीवेशन के बाद होने वाली प्रक्रिया करने को कहा। जितेंद्र को फोन पर आया एक कोड का मैसेज उसे बताने को कहा। जितेंद्र के मुताबिक वह कोड उनके बैंक खाते से संबंधित किसी लेनदेन का ओटीपी था। जितेंद्र ने फोन काट दिया। जिसके बाद वह व्यक्ति नंबर बदल-बदलकर फोन करता रहा। उसी वक्त से उनके खाते से रुपयों का आहरण शुरू हो गया। जितेंद्र ने बैंक के क्षेत्रीय मैनेजर से बात करने की कोशिश की तो उसने बताया कि वह छुट्टी पर है। लौटकर मामले की जांच करेंगे। टोल फ्री नंबर पर फोन करके पर वह भी नहीं मिला। ओटीपी आने के तुरंत बाद जितेंद्र ने कंपनी के वेबसाइट पर जाके अपने खाते से जुड़े एटीएम कार्ड बंद कर दिए थे। एयरटेल के ऑफिस जाकर सिम भी बंद करा दिया। जितेंद्र का आरोप है कि बैंक के कर्मचारियों ने मिलकर उनके खाते से रुपये चोरी किए हैं।
डिजीटल खातों में ट्रांसफर हुए रुपये
साइबर ठगों ने उनके खाते की जानकारी लेने के बाद 25 और 26 दिसंबर को 32 ट्रांजेक्शन करके 15.5 लाख रुपये खाते से निकाल लिए। साइबर सेल के मुताबिक, अधिकांश रुपया डिजिटल खातों में ट्रांसफर किया गया। इंस्पेक्टर गीतेश कपिल के मुताबिक ऑनलाइन खरीदारी के ट्रांजेक्शन को निरस्त कराने की कोशिश की जा रही है।
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डॉक्टर के मुताबिक करीब पंद्रह दिन पहले उन्होंने आइडिया से एयरटेल में अपनी सिम कार्ड पोर्ट कराया था। मंगलवार दोपहर एक निजी नंबर से फोन आया और दूसरी तरफ से बोल रहे व्यक्ति ने अपना नाम अरुण कुमार जेटली बताया। खुद को एयरटेल कंपनी का कर्मचारी बताकर नए सिम के एक्टीवेशन के बाद होने वाली प्रक्रिया करने को कहा। जितेंद्र को फोन पर आया एक कोड का मैसेज उसे बताने को कहा। जितेंद्र के मुताबिक वह कोड उनके बैंक खाते से संबंधित किसी लेनदेन का ओटीपी था। जितेंद्र ने फोन काट दिया। जिसके बाद वह व्यक्ति नंबर बदल-बदलकर फोन करता रहा। उसी वक्त से उनके खाते से रुपयों का आहरण शुरू हो गया। जितेंद्र ने बैंक के क्षेत्रीय मैनेजर से बात करने की कोशिश की तो उसने बताया कि वह छुट्टी पर है। लौटकर मामले की जांच करेंगे। टोल फ्री नंबर पर फोन करके पर वह भी नहीं मिला। ओटीपी आने के तुरंत बाद जितेंद्र ने कंपनी के वेबसाइट पर जाके अपने खाते से जुड़े एटीएम कार्ड बंद कर दिए थे। एयरटेल के ऑफिस जाकर सिम भी बंद करा दिया। जितेंद्र का आरोप है कि बैंक के कर्मचारियों ने मिलकर उनके खाते से रुपये चोरी किए हैं।
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डिजीटल खातों में ट्रांसफर हुए रुपये
साइबर ठगों ने उनके खाते की जानकारी लेने के बाद 25 और 26 दिसंबर को 32 ट्रांजेक्शन करके 15.5 लाख रुपये खाते से निकाल लिए। साइबर सेल के मुताबिक, अधिकांश रुपया डिजिटल खातों में ट्रांसफर किया गया। इंस्पेक्टर गीतेश कपिल के मुताबिक ऑनलाइन खरीदारी के ट्रांजेक्शन को निरस्त कराने की कोशिश की जा रही है।
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