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वह कप्तान साहब के यहां काम कर चुका है, तुम कुछ नहीं कर पाओगे
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बरेली। मारपीट के मामूली मामलों में किस तरह पुलिसवाले अपना उल्लू सीधा करने के लिए अफसरों के नाम का इस्तेमाल करते हैं, यह इज्जतनगर थाना क्षेत्र की एक घटना से साबित होता है। यहां सिपाही ने एक ग्रामीण को यह कहकर फैसले के लिए धमकाया कि दूसरे पक्ष का व्यक्ति एसएसपी और उनके दफ्तर में तैनात इंस्पेक्टर के घर काम कर चुका है, इसलिए तुम कहीं शिकायत कर लो, उसका कुछ नहीं बिगड़ेगा। पीड़ित परिवार ने जब मंगलवार को एसएसपी से शिकायत की तो उन्होंने धैर्य से बात सुनकर इज्जतनगर इंस्पेक्टर को पीड़ित परिवार की मदद और सिपाही की भूमिका की जांच के आदेश दिए।
कलारी निवासी मुकद्दर अली ने अपने दिव्यांग बेटे साजिद और बेटी शादाब के साथ एसएसपी मुनिराज जी से शिकायत की। कहा कि बीमार बेटी को दवा दिलाने बेटा गांव के डॉक्टर के यहां गया तो वह नहीं मिले। तब यह लोग पड़ोस के टेलर की दुकान पर कपड़े लेने चले गए। वहां गांव के कुछ लड़के आपस में गालीगलौज कर रहे थे। उनके बेटे को देख उसकी दिव्यांगता का मजाक उड़ाते हुए कमेंट कसने लगे। उनकी बेटी ने मना किया तो झगड़ा और मारपीट करने लगे। संभ्रांत लोगों ने किसी तरह बचाव किया। उनकी रिपोर्ट पुलिस ने नहीं लिखी तो उन्होंने सीएम के जनसुनवाई पोर्टल पर शिकायत की। उनके परिवार में 26 अप्रैल को शादी थी। तब दूसरे पक्ष के लोग दो सिपाहियों के साथ उनके घर में घुसे। आरोप लगाया कि मारपीट, महिलाओं से अभद्रता के साथ जेवर लूट ले गए। इसके बाद से वे रिपोर्ट लिखाना चाहते थे पर सुनवाई न हुई। उल्टे एक सिपाही ने उन्हें फोन करके फैसले की सलाह दी। उसने बताया कि एक आरोपी पहले एसएसपी के यहां काम कर चुका है। अधिकारियों का उस पर पूरा हाथ है। तुम कहीं भी कितनी शिकायतें कर लो, कुछ होना नहीं है। बताया कि उसने सिपाही की यह बात रिकार्ड कर ली। एसएसपी ने पीड़ित परिवार की बात सुनकर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। इंस्पेक्टर से कहा है कि वे ये भी जांच करें कि उनका जिक्र किस आधार पर किया गया।
मुकद्दर अली पक्ष के खिलाफ एनसीआर दर्ज है। उसे शांतिभंग में जेल भेजा जाना है। इसी सिलसिले में पुलिस उसके घर गई पर वह भाग गया। मारपीट, लूट जैसे आरोप निराधार हैं। सिपाही ने उसे फुसलाकर बुलाने के लिए फोन किया था। दूसरे पक्ष के किसी व्यक्ति के कप्तान साहब के यहां काम करने की बात सिपाही ने क्यों कही? इसकी जांच की जाएगी।
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- मनोज त्यागी, इंस्पेक्टर इज्जतनगर
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कलारी निवासी मुकद्दर अली ने अपने दिव्यांग बेटे साजिद और बेटी शादाब के साथ एसएसपी मुनिराज जी से शिकायत की। कहा कि बीमार बेटी को दवा दिलाने बेटा गांव के डॉक्टर के यहां गया तो वह नहीं मिले। तब यह लोग पड़ोस के टेलर की दुकान पर कपड़े लेने चले गए। वहां गांव के कुछ लड़के आपस में गालीगलौज कर रहे थे। उनके बेटे को देख उसकी दिव्यांगता का मजाक उड़ाते हुए कमेंट कसने लगे। उनकी बेटी ने मना किया तो झगड़ा और मारपीट करने लगे। संभ्रांत लोगों ने किसी तरह बचाव किया। उनकी रिपोर्ट पुलिस ने नहीं लिखी तो उन्होंने सीएम के जनसुनवाई पोर्टल पर शिकायत की। उनके परिवार में 26 अप्रैल को शादी थी। तब दूसरे पक्ष के लोग दो सिपाहियों के साथ उनके घर में घुसे। आरोप लगाया कि मारपीट, महिलाओं से अभद्रता के साथ जेवर लूट ले गए। इसके बाद से वे रिपोर्ट लिखाना चाहते थे पर सुनवाई न हुई। उल्टे एक सिपाही ने उन्हें फोन करके फैसले की सलाह दी। उसने बताया कि एक आरोपी पहले एसएसपी के यहां काम कर चुका है। अधिकारियों का उस पर पूरा हाथ है। तुम कहीं भी कितनी शिकायतें कर लो, कुछ होना नहीं है। बताया कि उसने सिपाही की यह बात रिकार्ड कर ली। एसएसपी ने पीड़ित परिवार की बात सुनकर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। इंस्पेक्टर से कहा है कि वे ये भी जांच करें कि उनका जिक्र किस आधार पर किया गया।
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मुकद्दर अली पक्ष के खिलाफ एनसीआर दर्ज है। उसे शांतिभंग में जेल भेजा जाना है। इसी सिलसिले में पुलिस उसके घर गई पर वह भाग गया। मारपीट, लूट जैसे आरोप निराधार हैं। सिपाही ने उसे फुसलाकर बुलाने के लिए फोन किया था। दूसरे पक्ष के किसी व्यक्ति के कप्तान साहब के यहां काम करने की बात सिपाही ने क्यों कही? इसकी जांच की जाएगी।
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- मनोज त्यागी, इंस्पेक्टर इज्जतनगर