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कश्मीरियों के खिलाफ नफरत का माहौल, खुफिया अमला बेखबर
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बरेली। आतंकवाद का कोई धर्म नहीं होता और हर व्यक्ति अपराधी नहीं होता। इसके बावजूद पुलवामा की घटना के बाद शहर से देहात तक कश्मीर से रोजी-रोटी की तलाश में आए लोगों के खिलाफ नफरत का माहौल पैदा हो रहा है। मगर खुफिया अमले के अफसर इस नाजुक माहौल में भी आंखें मूंदे बैठे हैं। गुस्साए लोग कश्मीरियों को भगा रहे हैं और पुलिस की संवेदनशीलता यह कि उन्हें मामले की जानकारी हंगामे के बाद हो रही है।
मंगलवार को विहिप कार्यकर्ताओं ने अर्बन हाट से कश्मीरी दुकानदारों को हटवा दिया। विहिप के पदाधिकारी जब मौके पर हंगामा करने लगे तो स्थानीय लोगों के जरिये बारादरी पुलिस को सूचना मिली और इंस्पेक्टर कृष्णवीर सिंह ने मौके पर आकर स्थिति संभाली। उन्होंने वरिष्ठ अधिकारियों को घटना की जानकारी दी तो बाद में सिटी मजिस्ट्रेट भी पहुंचे। इससे एक दिन पहले फरीदपुर से कश्मीरी दुकानदारों को भगा दिया गया। दोनों ही जगह कई दिन पहले से कश्मीरी व्यापारी कारोबार कर रहे थे। इसके बावजूद खुफिया अमले के पास कोई इनपुट नहीं था। अभी भी जिले में कितने कश्मीरी हैं, वे क्या कर रहे हैं? कहां रह रहे हैं? इनमें कितने संदिग्ध हैं? कितने कश्मीरी छात्र जिले में पढ़ाई कर रहे हैं, जैसे विषयों पर खुफिया अमले को कोई ठोस जानकारी नहीं है। चुनाव से पहले संवेदनशील मामलों की जानकारी जुटाने के बजाय अमला आंखें मूंदे बैठा है। इसके चलते उच्च अधिकारियों तक समय रहते सटीक जानकारी नहीं पहुंच रही है।
सब कश्मीरी अपराधी नहीं हैं। नफरत की सोच लोगों को मन से निकालनी होगी। पुलिस पूरी निगरानी कर रही है कि किसी कश्मीरी के साथ कोई अप्रिय घटना न हो। अगर किसी स्तर पर लापरवाही है तो उसे दूर कराया जाएगा। - मुनिराज जी. एसएसपी
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मंगलवार को विहिप कार्यकर्ताओं ने अर्बन हाट से कश्मीरी दुकानदारों को हटवा दिया। विहिप के पदाधिकारी जब मौके पर हंगामा करने लगे तो स्थानीय लोगों के जरिये बारादरी पुलिस को सूचना मिली और इंस्पेक्टर कृष्णवीर सिंह ने मौके पर आकर स्थिति संभाली। उन्होंने वरिष्ठ अधिकारियों को घटना की जानकारी दी तो बाद में सिटी मजिस्ट्रेट भी पहुंचे। इससे एक दिन पहले फरीदपुर से कश्मीरी दुकानदारों को भगा दिया गया। दोनों ही जगह कई दिन पहले से कश्मीरी व्यापारी कारोबार कर रहे थे। इसके बावजूद खुफिया अमले के पास कोई इनपुट नहीं था। अभी भी जिले में कितने कश्मीरी हैं, वे क्या कर रहे हैं? कहां रह रहे हैं? इनमें कितने संदिग्ध हैं? कितने कश्मीरी छात्र जिले में पढ़ाई कर रहे हैं, जैसे विषयों पर खुफिया अमले को कोई ठोस जानकारी नहीं है। चुनाव से पहले संवेदनशील मामलों की जानकारी जुटाने के बजाय अमला आंखें मूंदे बैठा है। इसके चलते उच्च अधिकारियों तक समय रहते सटीक जानकारी नहीं पहुंच रही है।
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सब कश्मीरी अपराधी नहीं हैं। नफरत की सोच लोगों को मन से निकालनी होगी। पुलिस पूरी निगरानी कर रही है कि किसी कश्मीरी के साथ कोई अप्रिय घटना न हो। अगर किसी स्तर पर लापरवाही है तो उसे दूर कराया जाएगा। - मुनिराज जी. एसएसपी
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