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टनकपुर ब्राडगेज के लिए अभी और करें इंतजार
Updated Wed, 14 Jun 2017 10:04 PM IST
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बरेली।
ओवरलोडिंग बंद होने से बढ़े गिट्टी बालू के दामों से मझोला-टनकपुर ब्राडगेज के काम पर असर पड़ा है। मैटेरियल की शार्टेज से चेयरमैन रेलवे बोर्ड का जून तक ट्रैक तैयार करने का दावा हवाई साबित हो गया। अब रेलवे निर्माण विभाग बोर्ड के प्रेशर को झेलते हुए अगले दो महीने में इसे तैयार करने की कवायद में जुट गया है।
बरेली-पीलीभीत मीटरगेज को ब्राडगेज में तब्दील करने के बाद पीलीभीत-टनकपुर ब्राडगेज का काम शुरू हुआ था। मार्च में रिटायर्ड हो चुके जीएम राजीव मिश्रा ने मझोला तक काम पूरा कराते हुए गाड़ियों का संचालन शुरू करा दिया था, जबकि मझोला से टनकपुर तक 36 किलोमीटर का सेक्शन बनना रह गया था। मार्च में ही इज्जतनगर डिवीजन के काम की समीक्षा करने आए चेयरमैन रेलवे बोर्ड एके अग्रवाल ने टनकपुर ब्राडगेज जून तक पूरा होने का दावा किया था, लेकिन अभी इस महीने काम पूरा होने की उम्मीद नहीं है। इसकी वजह ओवरलोडिंग बंद होने से गिट्टी और बालू के दाम बढ़ना है, जिससे मैटेरियल की शार्टेज हो गई है। टनकपुर के अलावा सितारगंज, लालकुआं तक से जुगाड़ से मैटेरियल मंगवाया जा रहा है।
रेलवे सूत्रों के मुताबिक रेल लाइन सर्विस का काम पूरा हो गया है। मैटेरियल शार्टेज से सिविल वर्क जैसे प्लेटफार्म आदि बनाने में देरी हो रही है। सूत्रों के मुताबिक ट्रेेनें दौड़ने में अभी दो महीने और लग सकते हैं।
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मशीन पैकिंग में लगेगा एक माह
मझोला-टनकपुर के बीच रेल बिछाने का काम पूरा हो गया है। अभी बैल्डिंग का काम चल रहा है। मशीन पैकिंग का काम भी होना है, जिसके लिए मशीन गोरखपुर मुख्यालय से आएगी, इस कार्य में एक महीना लगेगा। इसके बाद सीआरएस निरीक्षण होगा, तब कहीं जाकर टनकपुर के लिए ट्रेन सुविधा मिल पाएगी।
मझोला-टनकपुर सेक्शन का निर्माण चल रहा है। ओवरलोडिंग के कारण मैटेरियल की शार्टेज की वजह से कुछ दिक्कत आई है। फिर भी रेलवे निर्माण विभाग को तेजी से काम करने को कहा गया है।
- निखिल पांडेय, डीआरएम
बरेली जंक्शन पर भी नहीं लग पाई लिफ्ट
रेलवे में अधिकारी यात्री सुविधाएं देने के सिर्फ दावे ही कर देते हैं, लेकिन समय पर काम नहीं हो पाता। बरेली जंक्शन पर लिफ्ट और स्वत: संचालित सीढ़ियां लगाने का मैटेरियल काफी दिनों से आकर यहां पड़ा हुआ है। चेयरमैन रेलवे बोर्ड के दौरे के दौरान यहां आए उत्तर रेलवे के मुरादाबाद मंडल के डीआरएम प्रमोद कुमार ने 15 अप्रैल से जंक्शन पर लिफ्ट और स्वत: संचालित सीढ़ियां लगाने का काम शुरू करने का दावा किया था, लेकिन अभी तक काम शुरू नहीं हो पाया।
रेल मंत्री का वायदा भी पूरा नहीं हो पाया
रेल अधिकारियों का दावा ही नहीं, बल्कि रेल मंत्री का वायदा भी बरेली के लिए हवा साबित हो रहा है। रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने एक साल पहले बरेली दौरे के दौरान साउथ के लिए ट्रेन चलाने का वायदा किया था। यही नहीं केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री संतोष गंगवार ने हाल ही में आए रेल मंत्री सुरेश प्रभु से लखनऊ में खड़ी रहने वाले पुष्पक एक्सप्रेस और दिल्ली में खड़ी रहने वाली मंडोर एक्सप्रेस को बरेली से चलाने की मंच से मांग की थी, लेकिन रेल मंत्री ने इसे तो अनसुना कर ही दिया था। साथ ही पिछली बार साउथ के लिए चलाने के किए गए अपने वायदे पर भी कोई टिप्पणी नहीं की थी।
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ओवरलोडिंग बंद होने से बढ़े गिट्टी बालू के दामों से मझोला-टनकपुर ब्राडगेज के काम पर असर पड़ा है। मैटेरियल की शार्टेज से चेयरमैन रेलवे बोर्ड का जून तक ट्रैक तैयार करने का दावा हवाई साबित हो गया। अब रेलवे निर्माण विभाग बोर्ड के प्रेशर को झेलते हुए अगले दो महीने में इसे तैयार करने की कवायद में जुट गया है।
बरेली-पीलीभीत मीटरगेज को ब्राडगेज में तब्दील करने के बाद पीलीभीत-टनकपुर ब्राडगेज का काम शुरू हुआ था। मार्च में रिटायर्ड हो चुके जीएम राजीव मिश्रा ने मझोला तक काम पूरा कराते हुए गाड़ियों का संचालन शुरू करा दिया था, जबकि मझोला से टनकपुर तक 36 किलोमीटर का सेक्शन बनना रह गया था। मार्च में ही इज्जतनगर डिवीजन के काम की समीक्षा करने आए चेयरमैन रेलवे बोर्ड एके अग्रवाल ने टनकपुर ब्राडगेज जून तक पूरा होने का दावा किया था, लेकिन अभी इस महीने काम पूरा होने की उम्मीद नहीं है। इसकी वजह ओवरलोडिंग बंद होने से गिट्टी और बालू के दाम बढ़ना है, जिससे मैटेरियल की शार्टेज हो गई है। टनकपुर के अलावा सितारगंज, लालकुआं तक से जुगाड़ से मैटेरियल मंगवाया जा रहा है।
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रेलवे सूत्रों के मुताबिक रेल लाइन सर्विस का काम पूरा हो गया है। मैटेरियल शार्टेज से सिविल वर्क जैसे प्लेटफार्म आदि बनाने में देरी हो रही है। सूत्रों के मुताबिक ट्रेेनें दौड़ने में अभी दो महीने और लग सकते हैं।
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मशीन पैकिंग में लगेगा एक माह
मझोला-टनकपुर के बीच रेल बिछाने का काम पूरा हो गया है। अभी बैल्डिंग का काम चल रहा है। मशीन पैकिंग का काम भी होना है, जिसके लिए मशीन गोरखपुर मुख्यालय से आएगी, इस कार्य में एक महीना लगेगा। इसके बाद सीआरएस निरीक्षण होगा, तब कहीं जाकर टनकपुर के लिए ट्रेन सुविधा मिल पाएगी।
मझोला-टनकपुर सेक्शन का निर्माण चल रहा है। ओवरलोडिंग के कारण मैटेरियल की शार्टेज की वजह से कुछ दिक्कत आई है। फिर भी रेलवे निर्माण विभाग को तेजी से काम करने को कहा गया है।
- निखिल पांडेय, डीआरएम
बरेली जंक्शन पर भी नहीं लग पाई लिफ्ट
रेलवे में अधिकारी यात्री सुविधाएं देने के सिर्फ दावे ही कर देते हैं, लेकिन समय पर काम नहीं हो पाता। बरेली जंक्शन पर लिफ्ट और स्वत: संचालित सीढ़ियां लगाने का मैटेरियल काफी दिनों से आकर यहां पड़ा हुआ है। चेयरमैन रेलवे बोर्ड के दौरे के दौरान यहां आए उत्तर रेलवे के मुरादाबाद मंडल के डीआरएम प्रमोद कुमार ने 15 अप्रैल से जंक्शन पर लिफ्ट और स्वत: संचालित सीढ़ियां लगाने का काम शुरू करने का दावा किया था, लेकिन अभी तक काम शुरू नहीं हो पाया।
रेल मंत्री का वायदा भी पूरा नहीं हो पाया
रेल अधिकारियों का दावा ही नहीं, बल्कि रेल मंत्री का वायदा भी बरेली के लिए हवा साबित हो रहा है। रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने एक साल पहले बरेली दौरे के दौरान साउथ के लिए ट्रेन चलाने का वायदा किया था। यही नहीं केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री संतोष गंगवार ने हाल ही में आए रेल मंत्री सुरेश प्रभु से लखनऊ में खड़ी रहने वाले पुष्पक एक्सप्रेस और दिल्ली में खड़ी रहने वाली मंडोर एक्सप्रेस को बरेली से चलाने की मंच से मांग की थी, लेकिन रेल मंत्री ने इसे तो अनसुना कर ही दिया था। साथ ही पिछली बार साउथ के लिए चलाने के किए गए अपने वायदे पर भी कोई टिप्पणी नहीं की थी।