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प्यास बुझाने के लिए बेघर हुआ और मुसीबतों से जूझते हुए मारा गया तेंदुआ
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बरेली। दो लोगों पर हमले की नाकाम कोशिश करने के बाद हाफिजगंज इलाके में मारे गए तेंदुए की मौत की कहानी दर्दनाक है। आईवीआरआई में पोस्टमार्टम के बाद अब तक तेंदुए की मौत के जो राज सामने आए हैं, वह जता रहे हैं कि उस पर एक एक कर कई मुसीबतें टूटीं और आखिरकार भूख मिटाने के लिए शिकार की तलाश करते हुए वह खुद मौत का शिकार हो गया। आईवीआरआई के वैज्ञानिकों ने प्रारंभिक जांच के बाद बताया था कि तेंदुए के शरीर पर चोट का कोई निशान नहीं पाया गया था लेकिन अब पता चला है कि तेंदुए के सिर और जबड़े पर गंभीर चोटें थीं। उसका एक दांत भी टूट गया था। उसका जो अगला पंजा कटा मिला, वह भी उसकी मौत के बाद काटा गया था। हालांकि यह अभी साफ नहीं है कि पंजा कैसे कटा और किसने काटा।
माना जा रहा है कि यह तेंदुआ पानी की तलाश में जंगल छोड़कर बाहर निकला था और भटकते-भटकते हाफिजगंज इलाके में पहुंच गया। यहां 16 मई को उसने दो लोगों पर हमला करने की कोशिश की थी, जिसके बाद उसकी लाश मिली तो वन विभाग ने करीब सौ लोगों के खिलाफ उसे पीटकर मार डालने की रिपोर्ट दर्ज करा दी थी। आईवीआरआई में उसका पोस्टमार्टम हुआ था तो उसके आमाशय में कुछ नहीं पाया गया यानी वह कई दिनों से भूखा-प्यासा भटक रहा था। हालांकि विस्तृत पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी उसकी मौत की सही वजह पता नहीं लग पाई है, यह जरूर साफ हुआ है कि तेंदुए का जो अगला पंजा कटा मिला था वह उसकी मौत के बाद कटा था। यह पंजा किसी ने काटा या किसी जंगली जीव ने खाया यह अभी साफ नहीं हो सका है। वैसे पंजा धारदार हथियार से काटा हुआ नहीं लग रहा है। आईवीआरआई ने यह जांच रिपोर्ट वन विभाग को भेजी है।
आईवीआरआई के वरिष्ठ वैज्ञानिक एके शर्मा ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया कि तेंदुए के जबड़े, जीभ समेत शरीर के तीन स्थानों पर ट्रिचिनेला परजीवी भी पाया गया है। उसके सिर और जबड़े पर गंभीर चोटें मिली हैं। इससे तेंदुए का एक दांत भी टूट गया था। तेंदुए की मांसपेशियों में मिले परजीवी के अलावा विसरा में कुछ और जांच की जानी है। इसके बाद ही मौत का कराण स्पष्ट हो सकेगा।
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उत्तराखंड की सीमा तक मिले बाघ के पगमार्क
बहेड़ी। जुगनूनागर और भाटिया फार्म के इलाके में बाघ की मौजूदगी की तस्दीक वन विभाग ने कर दी है। सोमवार को पहुंची वन विभाग की टीम ने बाघ के पगमार्क के फोटो खींचकर लखनऊ और बरेली के अधिकारियों को भेजे हैं। टीम ने बाघ के मूवमेंट का इलाका देखा तो वह सीमा के गांवों से लेकर उत्तराखंड के इलाके तक निकला। यूपी वन विभाग ने उत्तराखंड वन विभाग को भी सतर्क किया है। बाघ की सटीक लोकेशन ट्रेस होने के बाद उसे पकड़ने के लिए टीम बुलाई जाएगी।
जुगनूनागर और भाटिया फार्म इलाके में दो माह बाद बाघ ने फिर दस्तक दी है। आरएसएस के जिला संघ चालक शशांक भाटिया ने विधायक से मिलकर इस मामले को रखा था। सोमवार को वन विभाग की टीम गांव पहुंची और बाघ के पकमार्क देखे। वन विभाग के भारत भूषण भट्ट व बलवंत सिंह ने ग्रामीणों को अलर्ट किया है कि वह शाम को गांव के बाहर न निकलें और पशुओं को सुरक्षित स्थान पर रखें। बाघ दिखने पर तत्काल उन्हें सूचना दें।
पगमार्क देखने से बाघ के प्रतीत होते हैं लेकिन उसका मूवमेंट एरिया पकड़ में नहीं आ रहा है। निशान उत्तराखंड के गांवों तक मिले हैं। बाघ का मूवमेंट स्पष्ट होते ही उसको पकड़ लिया जाएगा। फिलहाल लोगों को सतर्कता बरतने के लिए कहा है। - रवींद्र सक्सेना, रेंजर बहेड़ी
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माना जा रहा है कि यह तेंदुआ पानी की तलाश में जंगल छोड़कर बाहर निकला था और भटकते-भटकते हाफिजगंज इलाके में पहुंच गया। यहां 16 मई को उसने दो लोगों पर हमला करने की कोशिश की थी, जिसके बाद उसकी लाश मिली तो वन विभाग ने करीब सौ लोगों के खिलाफ उसे पीटकर मार डालने की रिपोर्ट दर्ज करा दी थी। आईवीआरआई में उसका पोस्टमार्टम हुआ था तो उसके आमाशय में कुछ नहीं पाया गया यानी वह कई दिनों से भूखा-प्यासा भटक रहा था। हालांकि विस्तृत पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी उसकी मौत की सही वजह पता नहीं लग पाई है, यह जरूर साफ हुआ है कि तेंदुए का जो अगला पंजा कटा मिला था वह उसकी मौत के बाद कटा था। यह पंजा किसी ने काटा या किसी जंगली जीव ने खाया यह अभी साफ नहीं हो सका है। वैसे पंजा धारदार हथियार से काटा हुआ नहीं लग रहा है। आईवीआरआई ने यह जांच रिपोर्ट वन विभाग को भेजी है।
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आईवीआरआई के वरिष्ठ वैज्ञानिक एके शर्मा ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया कि तेंदुए के जबड़े, जीभ समेत शरीर के तीन स्थानों पर ट्रिचिनेला परजीवी भी पाया गया है। उसके सिर और जबड़े पर गंभीर चोटें मिली हैं। इससे तेंदुए का एक दांत भी टूट गया था। तेंदुए की मांसपेशियों में मिले परजीवी के अलावा विसरा में कुछ और जांच की जानी है। इसके बाद ही मौत का कराण स्पष्ट हो सकेगा।
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उत्तराखंड की सीमा तक मिले बाघ के पगमार्क
बहेड़ी। जुगनूनागर और भाटिया फार्म के इलाके में बाघ की मौजूदगी की तस्दीक वन विभाग ने कर दी है। सोमवार को पहुंची वन विभाग की टीम ने बाघ के पगमार्क के फोटो खींचकर लखनऊ और बरेली के अधिकारियों को भेजे हैं। टीम ने बाघ के मूवमेंट का इलाका देखा तो वह सीमा के गांवों से लेकर उत्तराखंड के इलाके तक निकला। यूपी वन विभाग ने उत्तराखंड वन विभाग को भी सतर्क किया है। बाघ की सटीक लोकेशन ट्रेस होने के बाद उसे पकड़ने के लिए टीम बुलाई जाएगी।
जुगनूनागर और भाटिया फार्म इलाके में दो माह बाद बाघ ने फिर दस्तक दी है। आरएसएस के जिला संघ चालक शशांक भाटिया ने विधायक से मिलकर इस मामले को रखा था। सोमवार को वन विभाग की टीम गांव पहुंची और बाघ के पकमार्क देखे। वन विभाग के भारत भूषण भट्ट व बलवंत सिंह ने ग्रामीणों को अलर्ट किया है कि वह शाम को गांव के बाहर न निकलें और पशुओं को सुरक्षित स्थान पर रखें। बाघ दिखने पर तत्काल उन्हें सूचना दें।
पगमार्क देखने से बाघ के प्रतीत होते हैं लेकिन उसका मूवमेंट एरिया पकड़ में नहीं आ रहा है। निशान उत्तराखंड के गांवों तक मिले हैं। बाघ का मूवमेंट स्पष्ट होते ही उसको पकड़ लिया जाएगा। फिलहाल लोगों को सतर्कता बरतने के लिए कहा है। - रवींद्र सक्सेना, रेंजर बहेड़ी