{"_id":"5c5c95a0bdec222ee0737582","slug":"151549571488-bareilly-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"पिता की लाश के पास कहता रहा मासूम अर्नव.. पापा उठो","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
पिता की लाश के पास कहता रहा मासूम अर्नव.. पापा उठो
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बरेली। पत्नी डॉली से विवाद के बाद डॉ. मानवेंद्र अवसादग्रस्त हो गए थे। क्लीनिक पर बैठने के बजाय नशे में डूबे रहने से लोगों से मिलना-जुलना भी कम हो गया था। यही वजह रही कि खुद को गोली मारकर खुदकुशी करने के बाद डॉक्टर की लाश चार दिन तक कमरे में पड़ी रही जबकि उनकी ससुराल सिर्फ दो किमी की दूरी पर है। बृहस्पतिवार को गाजियाबाद में रहने वाली मानवेंद्र की मां के कहने पर बेटे अर्नव के पहुंचने पर घर का दरवाजा खुला मिला था। अंदर कमरे के अंधेरे में मासूम अर्नव को खून नजर नहीं आया। पिता की लाश को हिलाकर उठाने की कोशिशों के बाद वह घबराकर घर की तरफ भागा था जिसके बाद खुदकुशी की बात खुली। उनकी पत्नी करीब दो घंटे बाद राजेंद्र नगर पहुंची। पति की लाश के पास बिलखने लगीं तो मोहल्ले की महिलाओं ने उन्हें संभाला।
डॉ. मानवेंद्र सिंह के पिता एमपी सिंह पुलिस में दरोगा थे। मुजफ्फरनगर में तैनाती के दौरान 2010 में उनकी हार्ट अटैक से मौत हुई थी। मानवेंद्र के दो छोटे भाई तन्वेंद्र, भुवनेंद्र सिंह और बहन कंचन सिंह हैं। तन्वेंद्र सिंह भी दरोगा हैं और सीतापुर में तैनात हैं। भुवनेंद्र गाजियाबाद में बैंक मैनेजर हैं। बहन कंचन भी डॉक्टर हैं। मानवेंद्र ने भी बीडीएस की पढ़ाई गाजियाबाद के निजी कॉलेज से की थी। पिता की मौत के बाद मां सरला अपने बेटे भुवनेंद्र के साथ गाजियाबाद में रहने लगी थी। पड़ोसियों के मुताबिक 30 जनवरी को मानवेंद्र गाजियाबाद गए थे। दो फरवरी को राजेंद्रनगर वापस लौटे थे। लेकिन फिर वह घर में दिखे नहीं।
झगड़े की आवाजें सुनते थे पड़ोसी
आईवीआरआई से रिटायर्ड टेक्निकल ऑफिसर श्याम लाल की बेटी डॉली से मानवेंद्र की शादी 2009 में हुई थी। पड़ोसियों के मुताबिक पहले मानवेंद्र इतनी शराब नहीं पीते थे, लेकिन धीरे-धीरे नशे की लत बढ़ती चली गई। घर से आए दिन झगड़े की आवाजें आती थी। झगड़े के दौरान दीवार पर हाथ मारना, शीशे टूटने की घटनाओं का जिक्र पड़ोसियों ने किया। बताया गया कि इन्हीं झगड़ों की वजह से डॉली इंद्रानगर में शिफ्ट हुई थी।
विज्ञापन
सीसी कैमरों की रिकार्डिंग नहीं जांच सकी पुलिस
डॉक्टर के साथ पढ़ाई करने वाले एसपी निगम ने बताया कि बीते एक साल से उनसे भी बातचीत नहीं हो रही थी। घर के बाहर सीसी कैमरा लगा मिला, लेकिन रिकार्डिंग जांचने के लिए बिजली नहीं थी। घर के अंदर कमरे में बेड पर पड़ी लाश के अतिरिक्त ज्यादा सामान नहीं था। पुलिस को घर से कोई सुसाइड नोट भी नहीं मिला।
विज्ञापन
डॉ. मानवेंद्र सिंह के पिता एमपी सिंह पुलिस में दरोगा थे। मुजफ्फरनगर में तैनाती के दौरान 2010 में उनकी हार्ट अटैक से मौत हुई थी। मानवेंद्र के दो छोटे भाई तन्वेंद्र, भुवनेंद्र सिंह और बहन कंचन सिंह हैं। तन्वेंद्र सिंह भी दरोगा हैं और सीतापुर में तैनात हैं। भुवनेंद्र गाजियाबाद में बैंक मैनेजर हैं। बहन कंचन भी डॉक्टर हैं। मानवेंद्र ने भी बीडीएस की पढ़ाई गाजियाबाद के निजी कॉलेज से की थी। पिता की मौत के बाद मां सरला अपने बेटे भुवनेंद्र के साथ गाजियाबाद में रहने लगी थी। पड़ोसियों के मुताबिक 30 जनवरी को मानवेंद्र गाजियाबाद गए थे। दो फरवरी को राजेंद्रनगर वापस लौटे थे। लेकिन फिर वह घर में दिखे नहीं।
विज्ञापन
झगड़े की आवाजें सुनते थे पड़ोसी
आईवीआरआई से रिटायर्ड टेक्निकल ऑफिसर श्याम लाल की बेटी डॉली से मानवेंद्र की शादी 2009 में हुई थी। पड़ोसियों के मुताबिक पहले मानवेंद्र इतनी शराब नहीं पीते थे, लेकिन धीरे-धीरे नशे की लत बढ़ती चली गई। घर से आए दिन झगड़े की आवाजें आती थी। झगड़े के दौरान दीवार पर हाथ मारना, शीशे टूटने की घटनाओं का जिक्र पड़ोसियों ने किया। बताया गया कि इन्हीं झगड़ों की वजह से डॉली इंद्रानगर में शिफ्ट हुई थी।
विज्ञापन
सीसी कैमरों की रिकार्डिंग नहीं जांच सकी पुलिस
डॉक्टर के साथ पढ़ाई करने वाले एसपी निगम ने बताया कि बीते एक साल से उनसे भी बातचीत नहीं हो रही थी। घर के बाहर सीसी कैमरा लगा मिला, लेकिन रिकार्डिंग जांचने के लिए बिजली नहीं थी। घर के अंदर कमरे में बेड पर पड़ी लाश के अतिरिक्त ज्यादा सामान नहीं था। पुलिस को घर से कोई सुसाइड नोट भी नहीं मिला।