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बाल के व्यवसायी से नहीं हुई थी लूट
Updated Thu, 15 Jun 2017 06:16 PM IST
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बरेली।
हाफिजगंज में लूट होने के चार दिन बाद खुदकशी करने वाले व्यवसायी राजाराम के केस में नया मोड़ आ गया है। पुलिस की कहानी के मुताबिक वारदात वाले दिन व्यवसायी के साथ मारपीट हुई थी, लेकिन लूटपाट की कहानी उसकी खुद की गढ़ी हुई थी। पुलिस जांच में सामने आया है कि लूट के दिन व्यवसायी ने सिविल लाइंस के एक्सेस बैंक से सुबह करीब 9.30 बजे करीब 28 हजार रुपये निकाले थे लेकिन उसी दिन उसने बैंक ऑफ बड़ौदा के अपने खाते में 28 हजार रुपये जमा भी कर दिये थे। जिन 14 हजार की रकम को वह घर से लेकर चलने की बात कहा रहा था, उसकी पत्नी ने बताया कि वह सिर्फ ढाई हजार ही लेकर निकले थे। ऐसे में पुलिस की जांच में लूट की बात सही नहीं निकल रही थी।
एसपी देहात ख्याति गर्ग ने बताया कि व्यवसायी का उसके साढृू भाई से 12 हजार का लेनदेन था। ऐसा माना जा रहा है कि लूट की कहानी इसलिए गढ़ी गई ताकि लेनदेन से राहत मिल सके। लेकिन पुलिस का दबाव बढ़ने के बाद व्यवसायी खुद ही दबाव में आ गया। उसको महसूस होने लगा कि परिवार के सामने सच आने के बाद उसकी बेइज्जती होगी। जिसके चलते उसने खुदकशी की।
यह पूरा मामला
बता दें कि गांव जगराजपुर के चौकीदार भगवानदास के दो बेटों में छोटे राजाराम (25) के साथ लूट होने के चार दिन बाद उसका शव गन्ने के खेत में यूकेलिप्टिस के पेड़ से लटकता हुआ मिला था। परिवार के लोगों का आरोप लगाया था कि राजाराम ने पुलिस प्रताड़ना से परेशान होकर खुदकशी की है। परिवार के लोगों ने बताया कि सोमवार को वह बरेली से इंवर्टर लेने के लिए गया था। बजरंग ढाबा के पास गांव के विकास पुत्र राजेंद्र से उसकी मुलाकात हुई थी। राजाराम ने राजेंद्र को इंवर्टर देकर कहा था कि रिठौरा पुलिस चौकी से फोन आया है। उसको जाना है, वह इंटर्वर को घर पर दे दें। जब देर रात वह घर नहीं पहुंचा तो खोजबीन शुरू हुई। रात करीब नौ बजे राजाराम का शव गांव के बाहर रामदास के गन्ने के खेत के किनारे यूकेलिप्टिस के पेड़ पर रस्सी से लटका मिला था।
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हाफिजगंज में लूट होने के चार दिन बाद खुदकशी करने वाले व्यवसायी राजाराम के केस में नया मोड़ आ गया है। पुलिस की कहानी के मुताबिक वारदात वाले दिन व्यवसायी के साथ मारपीट हुई थी, लेकिन लूटपाट की कहानी उसकी खुद की गढ़ी हुई थी। पुलिस जांच में सामने आया है कि लूट के दिन व्यवसायी ने सिविल लाइंस के एक्सेस बैंक से सुबह करीब 9.30 बजे करीब 28 हजार रुपये निकाले थे लेकिन उसी दिन उसने बैंक ऑफ बड़ौदा के अपने खाते में 28 हजार रुपये जमा भी कर दिये थे। जिन 14 हजार की रकम को वह घर से लेकर चलने की बात कहा रहा था, उसकी पत्नी ने बताया कि वह सिर्फ ढाई हजार ही लेकर निकले थे। ऐसे में पुलिस की जांच में लूट की बात सही नहीं निकल रही थी।
एसपी देहात ख्याति गर्ग ने बताया कि व्यवसायी का उसके साढृू भाई से 12 हजार का लेनदेन था। ऐसा माना जा रहा है कि लूट की कहानी इसलिए गढ़ी गई ताकि लेनदेन से राहत मिल सके। लेकिन पुलिस का दबाव बढ़ने के बाद व्यवसायी खुद ही दबाव में आ गया। उसको महसूस होने लगा कि परिवार के सामने सच आने के बाद उसकी बेइज्जती होगी। जिसके चलते उसने खुदकशी की।
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यह पूरा मामला
बता दें कि गांव जगराजपुर के चौकीदार भगवानदास के दो बेटों में छोटे राजाराम (25) के साथ लूट होने के चार दिन बाद उसका शव गन्ने के खेत में यूकेलिप्टिस के पेड़ से लटकता हुआ मिला था। परिवार के लोगों का आरोप लगाया था कि राजाराम ने पुलिस प्रताड़ना से परेशान होकर खुदकशी की है। परिवार के लोगों ने बताया कि सोमवार को वह बरेली से इंवर्टर लेने के लिए गया था। बजरंग ढाबा के पास गांव के विकास पुत्र राजेंद्र से उसकी मुलाकात हुई थी। राजाराम ने राजेंद्र को इंवर्टर देकर कहा था कि रिठौरा पुलिस चौकी से फोन आया है। उसको जाना है, वह इंटर्वर को घर पर दे दें। जब देर रात वह घर नहीं पहुंचा तो खोजबीन शुरू हुई। रात करीब नौ बजे राजाराम का शव गांव के बाहर रामदास के गन्ने के खेत के किनारे यूकेलिप्टिस के पेड़ पर रस्सी से लटका मिला था।
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