{"_id":"5daa20e58ebc3e01656ea0e2","slug":"crime-bareilly-news-bly3807111160","type":"story","status":"publish","title_hn":"बेटी ने प्रेमी से कराई थी पिता की हत्या, दो आरोपियों संग गई जेल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बेटी ने प्रेमी से कराई थी पिता की हत्या, दो आरोपियों संग गई जेल
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बरेली/भुता। भुता के चर्चित बाबूराम हत्याकांड का शुक्रवार को सनसनीखेज खुलासा हुआ। बाबूराम की बेटी, उसके पीलीभीत निवासी प्रेमी और प्रेमी के दोस्त को पुलिस ने कोर्ट में पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया। प्रेसवार्ता में एसएसपी ने बताया कि हत्या की वजह बेटी की आजादी में बाधक बनना रहा। बेटी को ये भी उम्मीद थी कि पिता की मौत के बाद उसे बेशकीमती जमीन और प्रॉपर्टी में हिस्सा मिल जाएगा। बाबूराम का बेटी के प्रति उपेक्षात्मक रवैया भी बेटी के गुस्से की वजह रहा। हालांकि आरोपी युवती खुद को बेगुनाह बता रही थी, लेकिन उसका भाई खुलासे से खुश था।
भुता कस्बा निवासी 60 साल के बाबूराम गंगवार का शव आठ अक्तूबर को गांव मल्लपुर में गन्ने के खेत में मिला था। रिपोर्ट थाना भुता में बेटे विमल ने अज्ञात के खिलाफ दर्ज कराई थी। तब से पुलिस खुलासे के लिए घटना की कड़ियां जोड़ रही थी। सर्विलांस से क्लू मिलने के बाद पुलिस ने कुछ सुराग जुटाकर खुलासा कर दिया। भुता तिराहे पर बाइक समेत दो युवकों और बाबूराम की बेटी माधुरी की गिरफ्तारी दिखाई गई। आरोपियों में प्रदीप कुमार निवासी मुड़िया हुलास थाना बरखेड़ा, पीलीभीत और पीलीभीत के ही बिलसंडा थाने के गांव मानपुर का निवासी उसका साथी सुरेंद्र पाल शामिल थे। प्रदीप ने खुद को माधुरी का प्रेमी बताकर हत्या करने की बात स्वीकार की। प्रदीप ने बताया कि वह बरेली की एक हर्बल उत्पाद बेचने वाली कंपनी में नौकरी करता था। माधुरी और सुरेंद्र भी इसी कंपनी में काम करते थे। माधुरी से उसके संबंध थे। माधुरी के कहने पर प्रदीप पांच अक्तूबर को साथी सुरेंद्र के साथ बाबूराम से मिला था। इसके बाद प्रदीप और सुरेंद्र बाबूराम को गन्ना की फसल दिखाने के बहाने बाइक पर पर बैठाकर ले गए। खेत में तमंचे से गोली मारकर उनकी हत्या कर दी और फिर भाग गए। मामला शांत होने पर आगे की योजना प्रेमिका माधुरी से मिलने आने की थी।
आरोपी माधुरी ने बताया कि पिता बाबूराम का उसके प्रति अच्छा व्यवहार नहीं था। वह अपनी 36 बीघा बेशकीमती जमीन इकलौते बेटे विमल को देना चाहते थे। उन्होंने माधुरी पर जरूरत से ज्यादा बंदिशें लगा रखी थीं। हर बात की टोकाटाकी थी, जबकि विमल पर कोई अंकुश नहीं था। इससे माधुरी बहुत आहत थी। तब उसने पिता को मारने की योजना बना ली। आरोपियों से दो तमंचे और कारतूस भी मिले।
विज्ञापन
कटा सिर और हाथ नहीं मिला, गोली की बात ने उलझाया
बाबूराम का कटा सिर और हाथ पुलिस को नहीं मिल सका। पोस्टमार्टम में गला काटने से मौत की पुष्टि हुई थी, जबकि आरोपियों ने सिर में गोली मारने की बात स्वीकार की है। एसएसपी के मुताबिक दो दिन शव पड़ा रहने से शायद जानवर ये अंग ले गए होंगे। इससे शव पर घाव था और खून बह रहा था। उनका कहना था कि बाद में पुलिस को हाथ के कुछ अवशेष पास के खेत से मिले भी थे।
..तो फंस जाते जमीन के खरीददार
कुछ समय पहले सड़क किनारे की दो बीघा जमीन बेचने के लिए बाबूराम ने स्टांप पर लिखकर राजेंद्र गंगवार तथा देवेंद्र से बयाने में लाखों रुपये ले लिए थे। अभी तक बैनामा नहीं हुआ था, इसे लेकर दोनों पक्षों में विवाद था। हत्या के बाद पुलिस को शक था कि इन्हीं दोनों का हाथ रहा होगा। राजेंद्र को पकड़ा भी गया। देवेंद्र के फरार होने से शक और बढ़ गया।
भाई बोला- पिता ने छुड़वाई थी बहन की नौकरी
पिता की हत्या में आरोपी बेटी माधुरी थाने में शांत बैठी थी। उससे बात की तो बस इतना कहा कि फर्जी फंसाया गया है। भाई विमल ने बताया कि शक होने पर प्रदीप से घर आने को मना किया था। पिता को संबंधों का पता लगा तो बहन माधुरी की नौकरी छुड़वा दी। ये लोग पहले शहर के एक इंटर कॉलेज में 12वीं में साथ पढ़ते थे और बाद में साथ नौकरी करने लगे।
विज्ञापन
भुता कस्बा निवासी 60 साल के बाबूराम गंगवार का शव आठ अक्तूबर को गांव मल्लपुर में गन्ने के खेत में मिला था। रिपोर्ट थाना भुता में बेटे विमल ने अज्ञात के खिलाफ दर्ज कराई थी। तब से पुलिस खुलासे के लिए घटना की कड़ियां जोड़ रही थी। सर्विलांस से क्लू मिलने के बाद पुलिस ने कुछ सुराग जुटाकर खुलासा कर दिया। भुता तिराहे पर बाइक समेत दो युवकों और बाबूराम की बेटी माधुरी की गिरफ्तारी दिखाई गई। आरोपियों में प्रदीप कुमार निवासी मुड़िया हुलास थाना बरखेड़ा, पीलीभीत और पीलीभीत के ही बिलसंडा थाने के गांव मानपुर का निवासी उसका साथी सुरेंद्र पाल शामिल थे। प्रदीप ने खुद को माधुरी का प्रेमी बताकर हत्या करने की बात स्वीकार की। प्रदीप ने बताया कि वह बरेली की एक हर्बल उत्पाद बेचने वाली कंपनी में नौकरी करता था। माधुरी और सुरेंद्र भी इसी कंपनी में काम करते थे। माधुरी से उसके संबंध थे। माधुरी के कहने पर प्रदीप पांच अक्तूबर को साथी सुरेंद्र के साथ बाबूराम से मिला था। इसके बाद प्रदीप और सुरेंद्र बाबूराम को गन्ना की फसल दिखाने के बहाने बाइक पर पर बैठाकर ले गए। खेत में तमंचे से गोली मारकर उनकी हत्या कर दी और फिर भाग गए। मामला शांत होने पर आगे की योजना प्रेमिका माधुरी से मिलने आने की थी।
विज्ञापन
आरोपी माधुरी ने बताया कि पिता बाबूराम का उसके प्रति अच्छा व्यवहार नहीं था। वह अपनी 36 बीघा बेशकीमती जमीन इकलौते बेटे विमल को देना चाहते थे। उन्होंने माधुरी पर जरूरत से ज्यादा बंदिशें लगा रखी थीं। हर बात की टोकाटाकी थी, जबकि विमल पर कोई अंकुश नहीं था। इससे माधुरी बहुत आहत थी। तब उसने पिता को मारने की योजना बना ली। आरोपियों से दो तमंचे और कारतूस भी मिले।
विज्ञापन
कटा सिर और हाथ नहीं मिला, गोली की बात ने उलझाया
बाबूराम का कटा सिर और हाथ पुलिस को नहीं मिल सका। पोस्टमार्टम में गला काटने से मौत की पुष्टि हुई थी, जबकि आरोपियों ने सिर में गोली मारने की बात स्वीकार की है। एसएसपी के मुताबिक दो दिन शव पड़ा रहने से शायद जानवर ये अंग ले गए होंगे। इससे शव पर घाव था और खून बह रहा था। उनका कहना था कि बाद में पुलिस को हाथ के कुछ अवशेष पास के खेत से मिले भी थे।
..तो फंस जाते जमीन के खरीददार
कुछ समय पहले सड़क किनारे की दो बीघा जमीन बेचने के लिए बाबूराम ने स्टांप पर लिखकर राजेंद्र गंगवार तथा देवेंद्र से बयाने में लाखों रुपये ले लिए थे। अभी तक बैनामा नहीं हुआ था, इसे लेकर दोनों पक्षों में विवाद था। हत्या के बाद पुलिस को शक था कि इन्हीं दोनों का हाथ रहा होगा। राजेंद्र को पकड़ा भी गया। देवेंद्र के फरार होने से शक और बढ़ गया।
भाई बोला- पिता ने छुड़वाई थी बहन की नौकरी
पिता की हत्या में आरोपी बेटी माधुरी थाने में शांत बैठी थी। उससे बात की तो बस इतना कहा कि फर्जी फंसाया गया है। भाई विमल ने बताया कि शक होने पर प्रदीप से घर आने को मना किया था। पिता को संबंधों का पता लगा तो बहन माधुरी की नौकरी छुड़वा दी। ये लोग पहले शहर के एक इंटर कॉलेज में 12वीं में साथ पढ़ते थे और बाद में साथ नौकरी करने लगे।