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कांवड़ ले जाने वाले साबिर को अपनों ने दुत्कारा
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बरेली। देवरनिया थाना क्षेत्र के गांव दोपहरिया निवासी साबिर के अपने ही लोग पराये हो गए हैं। साबिर ने हाल ही में कांवड़ से जल लाकर शिव का जलाभिषेक किया था। उसने मंदिर पर भंडारा भी कराया था। इससे गांव के दूसरे समुदाय में जहां अच्छा संदेश गया, वहीं मुस्लिम समुदाय के कुछ लोगों ने साबिर से बैर ठान लिया। वे उसे मुस्लिम मानने से इंकार कर उसका सामाजिक बहिष्कार करने पर उतारू हैं। साबिर ने देवरनिया पुलिस से उनकी शिकायत की है। एसपी देहात की जानकारी में मामला आया है। उन्होंने भी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
दोपहरिया के साबिर हुसैन ने बताया कि 12 अगस्त को वे अपने गांव के कांवड़ियों के साथ हरिद्वार जाकर कांवड़ लाए थे। गांव के मंदिर पर भगवान शिव का जलाभिषेक किया। मंदिर में ही उसने दूसरे कांवड़ियों के साथ भंडारा भी कराया। खुद प्रसाद खाया और दूसरों को परोसा। बताया कि गांव में काफी अच्छा माहौल है। हिंदू और मुस्लिम दोनों पक्ष के लोग एकदूसरे से मिलकर रहते हैं और त्योहारों में शिरकत करते हैं। इसके बावजूद मुस्लिम समुदाय के ही कुछ लोग उनसे खफा हो गए हैं। वे गांव में घूमकर लोगों को उनके खिलाफ भड़का रहे हैं। उनके सामाजिक बहिष्कार की चेतावनी दे रहे हैं, कह रहे हैं कि साबिर मुसलमान ही नहीं है। इन लोगों ने उसे गांव से भगाने की तैयारी कर ली है। वे उसे रास्ते में मिलते हैं तो गालियां देते हैं और नमाज पढ़ने से भी रोकते हैं। साबिर ने देवरनिया पुलिस से ऐसे लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। 0
पुलिस गांव पहुंची तो भागे आरोपी
- देवरनिया थाना प्रभारी राजकुमार सिंह ने बताया कि बीती रात साबिर ने तहरीर दी थी। मंगलवार को वे उसके गांव गए तो वह नहीं मिल सका। जिन लोगों पर उसने आरोप लगाया है, वे भी घरों से फरार हैं। पुलिस रिपोर्ट लिखकर कार्रवाई करेगी। भेदभाव करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।
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- साबिर का कोई काम अगर दूसरों को अच्छा नहीं लगता तो वे उससे संबंध खत्म करने को स्वतंत्र हैं पर अगर उसे मस्जिद में जाने से रोका गया या उसकी धार्मिक स्वतंत्रता में बाधा डाली गई तो दोषियों पर कार्रवाई होगी। - डॉ. संसार सिंह, एसपी देहात
चुन्ना मियां ने बनवाया था मंदिर
- साबिर जिस बरेली जिले के निवासी हैं वो किसी वक्त में गंगा जामुनी तहजीब के लिए मशहूर रहा है। ये वही बरेली है जहां चुन्ना मियां ने लक्ष्मी नारायण मंदिर बनवाया था। वर्ष 1857 में आजादी की लड़ाई के मतवाले खान बहादुर खान को कमिश्नरी परिसर में 151 लोगों के साथ फांसी पर चढ़ा दिया गया। यहां त्योहारों पर हिंदू मुस्लिम का भेद पता ही नहीं लगता था। कुछ साल से जाने किसकी नजर लगी जो हिंदू मुस्लिम भाईचारे में दरार पड़ती गई। वर्ष 2010 और 2012 में बरेली में हुए दंगों ने बरेली को बदनाम किया।
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दोपहरिया के साबिर हुसैन ने बताया कि 12 अगस्त को वे अपने गांव के कांवड़ियों के साथ हरिद्वार जाकर कांवड़ लाए थे। गांव के मंदिर पर भगवान शिव का जलाभिषेक किया। मंदिर में ही उसने दूसरे कांवड़ियों के साथ भंडारा भी कराया। खुद प्रसाद खाया और दूसरों को परोसा। बताया कि गांव में काफी अच्छा माहौल है। हिंदू और मुस्लिम दोनों पक्ष के लोग एकदूसरे से मिलकर रहते हैं और त्योहारों में शिरकत करते हैं। इसके बावजूद मुस्लिम समुदाय के ही कुछ लोग उनसे खफा हो गए हैं। वे गांव में घूमकर लोगों को उनके खिलाफ भड़का रहे हैं। उनके सामाजिक बहिष्कार की चेतावनी दे रहे हैं, कह रहे हैं कि साबिर मुसलमान ही नहीं है। इन लोगों ने उसे गांव से भगाने की तैयारी कर ली है। वे उसे रास्ते में मिलते हैं तो गालियां देते हैं और नमाज पढ़ने से भी रोकते हैं। साबिर ने देवरनिया पुलिस से ऐसे लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। 0
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पुलिस गांव पहुंची तो भागे आरोपी
- देवरनिया थाना प्रभारी राजकुमार सिंह ने बताया कि बीती रात साबिर ने तहरीर दी थी। मंगलवार को वे उसके गांव गए तो वह नहीं मिल सका। जिन लोगों पर उसने आरोप लगाया है, वे भी घरों से फरार हैं। पुलिस रिपोर्ट लिखकर कार्रवाई करेगी। भेदभाव करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।
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- साबिर का कोई काम अगर दूसरों को अच्छा नहीं लगता तो वे उससे संबंध खत्म करने को स्वतंत्र हैं पर अगर उसे मस्जिद में जाने से रोका गया या उसकी धार्मिक स्वतंत्रता में बाधा डाली गई तो दोषियों पर कार्रवाई होगी। - डॉ. संसार सिंह, एसपी देहात
चुन्ना मियां ने बनवाया था मंदिर
- साबिर जिस बरेली जिले के निवासी हैं वो किसी वक्त में गंगा जामुनी तहजीब के लिए मशहूर रहा है। ये वही बरेली है जहां चुन्ना मियां ने लक्ष्मी नारायण मंदिर बनवाया था। वर्ष 1857 में आजादी की लड़ाई के मतवाले खान बहादुर खान को कमिश्नरी परिसर में 151 लोगों के साथ फांसी पर चढ़ा दिया गया। यहां त्योहारों पर हिंदू मुस्लिम का भेद पता ही नहीं लगता था। कुछ साल से जाने किसकी नजर लगी जो हिंदू मुस्लिम भाईचारे में दरार पड़ती गई। वर्ष 2010 और 2012 में बरेली में हुए दंगों ने बरेली को बदनाम किया।