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‘पराये दर्द अपनाने की आदत ही बचाएगी हकीकत में हम सबको मुहब्बत ही बचाएगी’
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‘पराये दर्द अपनाने की आदत ही बचाएगी हकीकत में हम सबको मुहब्बत ही बचाएगी’
- फोटो : अमर उजाला, बरेली
बरेली। साहित्यिक एवं सामाजिक संस्था अक्षरा फाउंडेशन की ओर से रोटरी भवन में शनिवार को ‘जश्ने अक्षरा एवं वार्षिक समारोह’ का आयोजन हुआ। यहां कवियों और शायरोें ने अपनी रचनाएं सुनाकर मौजूद श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। मुख्य अतिथि केंद्रीय मंत्री संतोष गंगवार ने दीप प्रज्वलित कर शुभारंभ किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता शायर अकील नोमानी और संचालन गजलकार शरद मिश्रा ने किया।
अक्षरा फाउंडेशन के संरक्षक, गजलकार और पीएफ कमिश्नर आलोक यादव और अध्यक्ष डॉ. अवनीश यादव ने अक्षरा फाउंडेशन के गठन के उद्देश्य की जानकारी दी। इसके बाद प्रसिद्ध गीतकार साहित्यभूषण किशन सरोज को अक्षरा साहित्य सम्मान और सरदार जिया स्मृति सम्मान से उस्ताद शायर खयाल खन्ना को नवाजा गया। इसके बाद कवि शायरों ने रचनाएं प्रस्तुत कर श्रोताओं को बांधे रखा। यहां वरिष्ठ गजलकार आलोक यादव ने ‘जरा खुल कर कहो आलोक ये हालात कब से हैं, और इन हालात के पीछे मियां किसका तसब्बुर है’, डॉ. अवनीश यादव ने ‘पराये दर्द अपनाने की आदत ही बचाएगी, हकीकत में हम सबको मुहब्बत ही बचाएगी’, विकास अग्रवाल ने ‘जरा सी बात पे दिल को उदास क्या करते, सफर में धूप थी साया तलाश क्या करते’, शरद मिश्रा ने ‘दिल की दुनिया में तेरा नाम लिए फिरते हैं, हम जमाने में कई काम लिए फिरते हैं’, सिया सचदेव ने ‘दुख जो तुम्हें बताया तो तुम तड़प उठे, वो जो दर्द छुपाया हमने उसका क्या’, शगुफ्ता गजल ने ‘साकी लिखा, शराब लिखा, जाम लिख दिया..’ खयाल खन्ना ने ‘चमन में फूल लगा तो लिए हैं कागज के, सवाल ये है के खुशबू कहां से आएगी’, अकील नोमानी ने ‘ये चमत्कार तो होने से रहा, तू वफादार तो होने से रहा सुनाकर महफिल लूट ली। यहां अपर आयुक्त अरुण कुमार, रमेश विकट, रामकुमार अफरोज समेत गणमान्य नागरिक मौजूद रहे।
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अक्षरा फाउंडेशन के संरक्षक, गजलकार और पीएफ कमिश्नर आलोक यादव और अध्यक्ष डॉ. अवनीश यादव ने अक्षरा फाउंडेशन के गठन के उद्देश्य की जानकारी दी। इसके बाद प्रसिद्ध गीतकार साहित्यभूषण किशन सरोज को अक्षरा साहित्य सम्मान और सरदार जिया स्मृति सम्मान से उस्ताद शायर खयाल खन्ना को नवाजा गया। इसके बाद कवि शायरों ने रचनाएं प्रस्तुत कर श्रोताओं को बांधे रखा। यहां वरिष्ठ गजलकार आलोक यादव ने ‘जरा खुल कर कहो आलोक ये हालात कब से हैं, और इन हालात के पीछे मियां किसका तसब्बुर है’, डॉ. अवनीश यादव ने ‘पराये दर्द अपनाने की आदत ही बचाएगी, हकीकत में हम सबको मुहब्बत ही बचाएगी’, विकास अग्रवाल ने ‘जरा सी बात पे दिल को उदास क्या करते, सफर में धूप थी साया तलाश क्या करते’, शरद मिश्रा ने ‘दिल की दुनिया में तेरा नाम लिए फिरते हैं, हम जमाने में कई काम लिए फिरते हैं’, सिया सचदेव ने ‘दुख जो तुम्हें बताया तो तुम तड़प उठे, वो जो दर्द छुपाया हमने उसका क्या’, शगुफ्ता गजल ने ‘साकी लिखा, शराब लिखा, जाम लिख दिया..’ खयाल खन्ना ने ‘चमन में फूल लगा तो लिए हैं कागज के, सवाल ये है के खुशबू कहां से आएगी’, अकील नोमानी ने ‘ये चमत्कार तो होने से रहा, तू वफादार तो होने से रहा सुनाकर महफिल लूट ली। यहां अपर आयुक्त अरुण कुमार, रमेश विकट, रामकुमार अफरोज समेत गणमान्य नागरिक मौजूद रहे।
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