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गोवंशों को भूख से तड़पता देखा तो टंकी पर चढ़ा सेवादार
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लखीमपुर खीरी। नगर पालिका की अस्थायी गोशाला का हाल खराब होने के कारण यहां गोवंशों की दुर्गति हो रही है। न तो उन्हें खाने के लिए हरा चारा मिल रहा है और न ही दाना। पेट भरने के लिए नादों में सिर्फ सूखा भूसा उड़ेला दिया जाता है। जिम्मेदारों की अनदेखी से आहत गौशाला का एक सेवादार रविवार को पानी की टंकी पर चढ़ गया और सार्वजनिक प्रबंधन की कमियां गिनाईं। इससे नगर पालिका से लेकर पुलिस प्रशासन तक हड़कंप मच गया। मौके पर पहुंची पुलिस के व्यवस्थाएं ठीक होने का आश्वासन दिए जाने पर वह नीचे उतरा।
लोहिया भवन के पीछे स्थित पानी की टंकी के नीचे पालिका की एक अस्थाई गोशाला है। इसी में भंसड़िया निवासी नीरज गोवंशों की देखरेख करते हैं। पिछले कई दिनों से इन्हें हरा चारा और दाना न मिलने से आहत होकर नीरज रविवार दोपहर करीब 12 बजे पानी की टंकी पर चढ़ गया। उसको टंकी पर देख आस पास के दुकानदारों में अफरा तफरा मच गई। सूचना पर पालिका कर्मी और जेल गेट चौकी प्रभारी जयप्रकाश यादव भी पहुंच गए। पूछने पर नीरज ने बताया कि अधिकारी दीपावली की छुट्टियों मनाने में मस्त रहे और बेचारे गोंवंश यहां भूूखे मर रहे हैं। सब लोग घरों में मालपुवा उड़ाते रहे, किसी ने बेजुबानों की सुधि तक नहीं ली। नीरज ने बताया कि सिर्फ सूखा भूसा मौजूद है। दोनो समय गोवंश इसे कैसे खा सकते हैं। न हरा चारा आता है और न ही दाना ही। जेल गेट चौकी प्रभारी के पूछने पर नीरज ने बताया कि साहब गोवंश का तड़पना हमसे नहीं देखा जाता है। कई बार अधिकारियों को बताया। मगर, जब किसी ने नहीं सुना तो टंकी पर चढ़ना मजबूरी हो गया।
गोवंश के खाने के लिए भूसा, हरा चारा और दाना की पर्याप्त है। यदि कर्मचारी लाने में हीलाहवाली करते हैं तो इसकी हमें जानकारी देनी चाहिए थी। इसमें टंकी पर चढ़ने की क्या जरूरत। -आरआर अंबेश, अधिशाषी अधिकारी
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लोहिया भवन के पीछे स्थित पानी की टंकी के नीचे पालिका की एक अस्थाई गोशाला है। इसी में भंसड़िया निवासी नीरज गोवंशों की देखरेख करते हैं। पिछले कई दिनों से इन्हें हरा चारा और दाना न मिलने से आहत होकर नीरज रविवार दोपहर करीब 12 बजे पानी की टंकी पर चढ़ गया। उसको टंकी पर देख आस पास के दुकानदारों में अफरा तफरा मच गई। सूचना पर पालिका कर्मी और जेल गेट चौकी प्रभारी जयप्रकाश यादव भी पहुंच गए। पूछने पर नीरज ने बताया कि अधिकारी दीपावली की छुट्टियों मनाने में मस्त रहे और बेचारे गोंवंश यहां भूूखे मर रहे हैं। सब लोग घरों में मालपुवा उड़ाते रहे, किसी ने बेजुबानों की सुधि तक नहीं ली। नीरज ने बताया कि सिर्फ सूखा भूसा मौजूद है। दोनो समय गोवंश इसे कैसे खा सकते हैं। न हरा चारा आता है और न ही दाना ही। जेल गेट चौकी प्रभारी के पूछने पर नीरज ने बताया कि साहब गोवंश का तड़पना हमसे नहीं देखा जाता है। कई बार अधिकारियों को बताया। मगर, जब किसी ने नहीं सुना तो टंकी पर चढ़ना मजबूरी हो गया।
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गोवंश के खाने के लिए भूसा, हरा चारा और दाना की पर्याप्त है। यदि कर्मचारी लाने में हीलाहवाली करते हैं तो इसकी हमें जानकारी देनी चाहिए थी। इसमें टंकी पर चढ़ने की क्या जरूरत। -आरआर अंबेश, अधिशाषी अधिकारी
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