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टेरर फंडिंग : पांच आरोपियों की जमानत अर्जी खारिज
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लखीमपुर खीरी। टेरर फंडिंग के हाई प्रोफाइल मामले में एडीजे प्रथम कुलदीप सक्सेना ने शुक्रवार को पांच आरोपियों की अलग-अलग पेश हुईं जमानत अर्जियों पर एक साथ सुनवाई करते हुए उन्हें खारिज कर दिया।
मालूम हो कि जमानत अर्जी पेश करते हुए टेरर फंडिंग के आरोपी मुमताज अली और बरेली के परतापुर निवासी सदाकत हुसैन, फहीम और सिराजुद्दीन ने आतंकी नेटवर्क के साथ कोई रिश्ता न होने की बात कहते हुए खुद को निर्दोष बताया था। वहीं जिले तिकुनिया थाना क्षेत्र के आरोपी संजय अग्रवाल ने खुद को इज्जतदार व्यापारी बताया और उन्हें झूठा फंसाने की दलील दी, जबकि नेपाल बॉर्डर के डांगा गांव निवासी मुमताज ने किसी तरह की आतंकी गतिविधियों में शामिल होने से इनकार करते हुए खुद को पूरी तरह से बेगुनाह बताया।
जमानत प्रार्थना पत्रों का विरोध करते हुए जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी अरविंद त्रिपाठी ने कहा कि पाकिस्तान और चीन के आतंकी नेटवर्क का गठजोड़ भारतीय क्षेत्र में अशांति और अव्यवस्था फैलाने में अरसे से लगा है। आतंकी गतिविधियों के बेहतर संचालन के लिए ऑनलाइन धोखाधड़ी के जरिये बैंक सहित विभिन्न वित्तीय संस्थाओं को भी निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने बताया पड़ोसी देश नेपाल के मुख्य बैंक ‘नेपाल राष्ट्र बैंक’ की काठमांडू शाखा की भी वेबसाइट हैक करते हुए 53 लाख रुपये जालसाजी से निकाले गए है। मामले की तफ्तीश के दौरान ही नाइजीरिया देश तक आंतकी नेटवर्क का संचालन की बात सामने आई है। अक्तूबर में मामला सामने आने के बाद जांच कर रही एटीएस ने अब तक की वैज्ञानिक जांच से भी आतंकी नेटवर्क की पुष्टि की हैै।
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सिराजुद्दीन और सदाकत की क्रिमनल हिस्ट्री रखी अदालत में
जहां मुमताज, फहीम, सिराजुद्दीन और सदाकत के साथ संजय अग्रवाल ने खुद को निर्दोष बताते हुए किसी प्रकार की क्रिमनल हिस्ट्री न होने की बात कही, वहीं अभियोजन की ओर से एटीएस ने अभियुक्त सिराजुद्दीन और सदाकत की क्रिमनल हिस्ट्री भी पेश कर दी।
जज ने कहा- देश की सुरक्षा के लिए ठीक नही है जमानत
जमानत अर्जी की सुनवाई के बाद अपने फैसले में जज कुलदीप सक्सेना ने कहा कि प्रकरण विदेशी मुद्रा को अवैधानिक रूप से भारत में लाने और उक्त धनराशि का प्रयोग देश विरोधी क्रियाकलापों में करना प्रथम दृष्टया दर्शित है। अभियुक्तों का कार्य निश्चित रूप से देश की सुरक्षा एवं आर्थिक दृष्टिकोण से हानि पहुंचाने का है। इसलिए जमानत मंजूर करना देश की सुरक्षा के लिए ठीक नहीं है।
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मालूम हो कि जमानत अर्जी पेश करते हुए टेरर फंडिंग के आरोपी मुमताज अली और बरेली के परतापुर निवासी सदाकत हुसैन, फहीम और सिराजुद्दीन ने आतंकी नेटवर्क के साथ कोई रिश्ता न होने की बात कहते हुए खुद को निर्दोष बताया था। वहीं जिले तिकुनिया थाना क्षेत्र के आरोपी संजय अग्रवाल ने खुद को इज्जतदार व्यापारी बताया और उन्हें झूठा फंसाने की दलील दी, जबकि नेपाल बॉर्डर के डांगा गांव निवासी मुमताज ने किसी तरह की आतंकी गतिविधियों में शामिल होने से इनकार करते हुए खुद को पूरी तरह से बेगुनाह बताया।
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जमानत प्रार्थना पत्रों का विरोध करते हुए जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी अरविंद त्रिपाठी ने कहा कि पाकिस्तान और चीन के आतंकी नेटवर्क का गठजोड़ भारतीय क्षेत्र में अशांति और अव्यवस्था फैलाने में अरसे से लगा है। आतंकी गतिविधियों के बेहतर संचालन के लिए ऑनलाइन धोखाधड़ी के जरिये बैंक सहित विभिन्न वित्तीय संस्थाओं को भी निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने बताया पड़ोसी देश नेपाल के मुख्य बैंक ‘नेपाल राष्ट्र बैंक’ की काठमांडू शाखा की भी वेबसाइट हैक करते हुए 53 लाख रुपये जालसाजी से निकाले गए है। मामले की तफ्तीश के दौरान ही नाइजीरिया देश तक आंतकी नेटवर्क का संचालन की बात सामने आई है। अक्तूबर में मामला सामने आने के बाद जांच कर रही एटीएस ने अब तक की वैज्ञानिक जांच से भी आतंकी नेटवर्क की पुष्टि की हैै।
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सिराजुद्दीन और सदाकत की क्रिमनल हिस्ट्री रखी अदालत में
जहां मुमताज, फहीम, सिराजुद्दीन और सदाकत के साथ संजय अग्रवाल ने खुद को निर्दोष बताते हुए किसी प्रकार की क्रिमनल हिस्ट्री न होने की बात कही, वहीं अभियोजन की ओर से एटीएस ने अभियुक्त सिराजुद्दीन और सदाकत की क्रिमनल हिस्ट्री भी पेश कर दी।
जज ने कहा- देश की सुरक्षा के लिए ठीक नही है जमानत
जमानत अर्जी की सुनवाई के बाद अपने फैसले में जज कुलदीप सक्सेना ने कहा कि प्रकरण विदेशी मुद्रा को अवैधानिक रूप से भारत में लाने और उक्त धनराशि का प्रयोग देश विरोधी क्रियाकलापों में करना प्रथम दृष्टया दर्शित है। अभियुक्तों का कार्य निश्चित रूप से देश की सुरक्षा एवं आर्थिक दृष्टिकोण से हानि पहुंचाने का है। इसलिए जमानत मंजूर करना देश की सुरक्षा के लिए ठीक नहीं है।