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Bareilly News: विकास कार्यों में लेटलतीफी पर भड़के पार्षद, नगर आयुक्त को भी सुनाई खरी-खरी

Wed, 04 Sep 2024 07:14 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Wed, 04 Sep 2024 07:14 AM IST
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Councilor angry over delay in development works, also scolded Municipal Commissioner
बोले- टूटी सड़कों, नालियों और मरम्मत के काम टेंडर व कोटेशन में ही फंसे, यही हाल रहा तो जनता को क्या देंगे जवाब
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बरेली। ''गली-मोहल्लों की सड़कों से लेकर मुख्य मार्गों तक की हालत खराब है। कुछ स्थानों पर गड्ढे हादसों की वजह बन रहे हैं। नगर निगम का निर्माण विभाग दावे तो करता है, पर मौके पर काम नहीं दिखता। कई जगह टेंडर हुए, पर काम शुरू नहीं हुए। कहीं गड्ढा भरने के लिए कर्मचारी पहुंचे भी तो खानापूरी करके लौट गए। पार्षद नगर निगम पहुंचते हैं तो निर्माण कार्यों की फाइलें ही नहीं मिलतीं। अपना दर्द बताने के लिए नगर आयुक्त को कॉल करें तो वह रिसीव नहीं होती।''
नगर निगम सभागार में मंगलवार को आयोजित संवाद व समाधान बैठक में पार्षदों ने ये बातें कहीं। चार घंटे 17 मिनट चली इस हंगामेदार बैठक की शुरुआत नगर आयुक्त पर आरोपों की बौछार से हुई। दस मिनट ऐसे रहे जब नगर आयुक्त को पार्षदों ने आरोपों से घेरा। बोले- निर्माण विभाग में कभी बजरी तो कभी सीमेंट नहीं रहता। कर्मचारी मोहल्ले में जाते हैं और बैरंग लौट आते हैं। निर्माण विभाग के स्टोर इंचार्ज सहायक अभियंता मुकेश शाक्य ने बताया कि सीमेंट और टाइल्स हैं, पर मौरंग नहीं है। नगर आयुक्त ने कहा- सामग्री खत्म होने से पहले इंतजाम क्यों नहीं किया? यह शर्म की बात है। तत्काल सामग्री मंगाकर मरम्मत कराएं। उन्होंने कार्रवाई की चेतावनी भी दी।
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मैडम...संवाद तो तब होगा जब आप कॉल रिसीव करें
नगर आयुक्त ने जब समस्याएं बताने के लिए कहा तो पार्षद छंगामल मौर्या बोले- मैडम, संवाद तो तब होगा जब आप कॉल रिसीव करें। जन्माष्टमी पर वार्ड की लाइटें बंद थीं। कर्मचारियों ने नहीं सुना तो आपको कॉल किया, पर आपने बात नहीं की। जब आप हमारी काॅल रिसीव नहीं करतीं तो आम जनता का क्या होता होगा? इससे पहले सपा पार्षद दल के नेता गौरव सक्सेना ने कहा कि लोकसभा चुनाव से पहले 30-30 लाख रुपये लागत के नए कार्य टेंडर निकालकर और कोटेशन के आधार पर तीन-तीन लाख रुपये के मरम्मत कार्य प्रत्येक वार्ड में कराए जाने थे। तब 200 कार्यों के टेंडर निकाले गए। पहली बार में 97 कार्यों के लिए टेंडर नहीं पड़े। दूसरी बार टेंडर निकले तो 17 कार्यों के लिए फिर टेंडर नहीं आए। जो काम शुरू हुए, वे भी अधूरे पड़े हैं। कहा कि इससे पहले जो भी नगर आयुक्त रहे उनसे मिलना आसान था, पर आपसे तो मिलना भी मुश्किल है।
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पार्षद बोले : आप तो आईएएस हैं, फिर नगर निगम के कुछ विभाग बेलगाम क्यों
पार्षद अब्दुल कय्यूम मुन्ना ने कहा कि- मैडम, जब आपको समस्याएं पता हैं तो उनका समाधान कराने के बाद यह बैठक बुलातीं तो हम आपका अभिनंदन करते। मैं तीस साल से पार्षद हूं। तमाम पीसीएस, नगर आयुक्तों की धमक मैंने देखी है। आप तो आईएएस हैं, फिर भी नगर निगम के कुछ विभाग बेलगाम हो रहे हैं। संचालन कर रहीं पार्षद शालिनी जौहरी समेत ज्यादातर ने इस पर सहमति जाहिर की। पार्षद अतुल कपूर बोले, पैचिंग मशीन का भुगतान न होने से गड्ढे भरने का काम ठप है। हादसे हो रहे हैं। सड़कें कब तक गड्ढामुक्त होंगी? नगर आयुक्त ने निर्माण विभाग से जवाब लिया और कहा कि, एक महीने में फिर से काम होगा।



नगर निगम की निधि में पड़े हैं 70 करोड़, फिर क्यों अटक रहे निर्माण कार्य
पाषर्दों ने कहा कि नगर निगम के पास राज्य वित्त आयोग के 70 करोड़ रुपये पड़े हैं, फिर भी निर्माण कार्य अटक रहे हैं। नगर आयुक्त ने लेखाधिकारी से जवाब लेकर बताया कि 70 करो़ड़ नहीं, सिर्फ 57 करोड़ हैं। तीस-तीस लाख रुपये के जो कार्य प्रत्येक वार्ड में होने हैं, उसमें 40 से 42 करोड़ रुपये व्यय होंगे। इसके बाद करीब 15 करोड़ रुपये बचेंगे। उससे जो काम हो सकते हैं, उन्हें कराया जाएगा। अमर उजाला ब्यूरो
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