{"_id":"60a2cad48ebc3e77ad69fe41","slug":"corona-warrior-funeral-with-respect-inspector-donating-wood-bareilly-news-bly446849192","type":"story","status":"publish","title_hn":"कोरोना योद्धा : सम्मान से हो अंतिम संस्कार... लकड़ी दान कर रहे इंस्पेक्टर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कोरोना योद्धा : सम्मान से हो अंतिम संस्कार... लकड़ी दान कर रहे इंस्पेक्टर
विज्ञापन
इंस्पेक्टर शितांशु शर्मा
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
मां की प्रेरणा से बारादरी इंस्पेक्टर निजी तौर पर कर रहे सेवा, सुपुर्देखाक भी करा रहे
विज्ञापन
बरेली। कोरोना महामारी में पुलिस की जिम्मेदारी बढ़ गई है। ऐसे में कई पुलिस वाले कोरोना योद्धा के रूप में बेहतर काम करके समाज को संदेश दे रहे हैं। बारादरी इंस्पेक्टर भी कई दिन से बिना किसी चर्चा के लोगों का अंतिम संस्कार कराने में मदद कर रहे हैं।
इंस्पेक्टर शितांशु शर्मा ने अपनी मां की प्रेरणा से यह पहल शुरू की है। उन्होंने मॉडल टाउन श्मशान भूमि के बाहर अपना मोबाइल नंबर लिखकर पर्चे चस्पा करा दिए हैं। इसमें अपना और थाने के एक सिपाही ओमकार सिंह का मोबाइल नंबर लिखवाया है। लिखा है कि जो लोग तंगी या किसी और वजह से अपने परिजनों की मृत्यु पर लकड़ी या ईधन की व्यवस्था नहीं कर पा रहे हैं, वह इन नंबरों पर संपर्क कर लें। उन्हें निशुल्क रूप से लकड़ी उपलब्ध करा दी जाएगी। इंस्पेक्टर ने इसके लिए थाने के पास की एक टाल वाले से बात कर ली है। जो लोग उन्हें कॉल करते हैं वह उन्हें टाल वाले के पास भेज देते हैं। टाल वाला जरूरत के हिसाब से लकड़ी देता है। जिसका इंस्पेक्टर निजी व्यय से उसे भुगतान कर देते हैं। अब तक वह कई लोगों की इस तरह मदद कर चुके हैं। वहीं एक मुस्लिम शख्स का भी निजी व्यय से सुपुर्देखाक करा चुके हैं।
इंस्पेक्टर शितांशु शर्मा ने अपनी मां की प्रेरणा से यह पहल शुरू की है। उन्होंने मॉडल टाउन श्मशान भूमि के बाहर अपना मोबाइल नंबर लिखकर पर्चे चस्पा करा दिए हैं। इसमें अपना और थाने के एक सिपाही ओमकार सिंह का मोबाइल नंबर लिखवाया है। लिखा है कि जो लोग तंगी या किसी और वजह से अपने परिजनों की मृत्यु पर लकड़ी या ईधन की व्यवस्था नहीं कर पा रहे हैं, वह इन नंबरों पर संपर्क कर लें। उन्हें निशुल्क रूप से लकड़ी उपलब्ध करा दी जाएगी। इंस्पेक्टर ने इसके लिए थाने के पास की एक टाल वाले से बात कर ली है। जो लोग उन्हें कॉल करते हैं वह उन्हें टाल वाले के पास भेज देते हैं। टाल वाला जरूरत के हिसाब से लकड़ी देता है। जिसका इंस्पेक्टर निजी व्यय से उसे भुगतान कर देते हैं। अब तक वह कई लोगों की इस तरह मदद कर चुके हैं। वहीं एक मुस्लिम शख्स का भी निजी व्यय से सुपुर्देखाक करा चुके हैं।
विज्ञापन