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गर्भ में मृत पड़ा रहा शिशु
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बरेली। आईवीआरआई की लैब से कोरोना संदिग्ध मरीजों के सैंपल की समय से रिपोर्ट न मिलने से समस्याएं बढ़ती जा रही हैं। शनिवार को एक ऐसी गर्भवती महिला की जान पर बन आई जिसके गर्भ में मृत शिशु होने के बावजूद महिला अस्पताल की डॉक्टरों ने आईवीआरआई से रिपोर्ट आने के इंतजार में ऑपरेशन नहीं किया। दो दिन बाद जब महिला की हालत गंभीर हो गई तो डॉक्टरों को रिपोर्ट का इंतजार छोड़ ऑपरेशन कर मृत शिशु गर्भ से निकालना पड़ा।
पुराना मोहनपुर में रहने वाले हरीशचंद ने पांच दिन पहले अपनी पत्नी पूजा को प्रसव के लिए जिला महिला अस्पताल में भर्ती कराया था। महिला अस्पताल की डॉक्टर ने पूजा की जांच की तो पाया कि शिशु की गर्भ में ही मृत्यु हो चुकी है। पूजा को सांस लेने में तकलीफ के साथ गले में भी दिक्कत हो रही थी। लिहाजा उसे कोरोना वार्ड में भर्ती करने के बाद 21 मई को उसका सैंपल जांच के लिए आईवीआरआई भेज दिया गया और रिपोर्ट आने तक मृत शिशु को गर्भ से निकालने के लिए उसका ऑपरेशन टाल दिया गया।
आईवीआरआई से दो दिन बाद भी रिपोर्ट नहीं आई। इस बीच पूजा की हालत बिगड़ने लगी। शनिवार को पूजा के परिवार वालों ने महिला अस्पताल की डॉक्टरों पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए हंगामा शुरू कर दिया। इसके बाद शाम को सीएमएस की मौजूदगी में डॉक्टरों ने ऑपरेशन कर गर्भ से मृत शिशु बाहर निकाला। सीएमएस ने बताया कि दो दिन गर्भ में मृत अवस्था में पड़े रहने की वजह से शिशु अंदर ही सड़ने लगा था।
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‘ऑपरेशन में किसी तरह की लापरवाही नहीं की गई है। आरोप निराधार हैं। महिला जब आई थी तभी गर्भ में कोई मूवमेंट नहीं था। कोरोना के संदिग्ध लक्षण मिलने पर सैंपल लेकर उसे कोरोना वार्ड में भर्ती किया गया था। जांच रिपोर्ट अब तक नहीं आई है। फिर भी संक्रमण से बचाव के सभी इंतजाम कर गर्भ से मृत शिशु को बाहर निकाल दिया गया है।’
- डॉ. अलका शर्मा, सीएमएस
कोरोना सैंपल की जांच की रफ्तार धीमी पड़ने से और बढ़ीं दिक्कतें
बरेली। कहा तो यह जा रहा है कि जितनी तेजी से जांच होगी, कोरोना संक्रमण फैलने का खतरा भी उतना कम होता जाएगा लेकिन आईवीआरआई की लैब में जिस तरह की दिक्कतें आ रही हैं, उससे इस उम्मीद पर पानी फिरता नजर आ रहा है। सूत्रों के मुताबिक शनिवार को भी आईवीआरआई ने स्वास्थ्य विभाग को जांच के लिए और सैंपल भेजने की मनाही कर दी गई। हालांकि,आईवीआरआई के अफसरों ने स्वास्थ्य विभाग को ऐसा कोई संदेश भेजने से इनकार किया है।
दो दिनों से आईवीआरआई की ओर से मेसेज भेजकर स्वास्थ्य विभाग को जांच के लिए सैैंपल न भेजने को कहा जा रहा है। शुक्रवार को तो करीब ढाई सौ सैंपल आईवीआरआई भेजे गए थे लेकिन शनिवार को एक भी सैंपल नहीं भेजा गया है। उन 149 सैपल को भी रोक दिया गया जो शुक्रवार को तीन सौ बेड अस्पताल में लिए गए थे। जांच की रफ्तार थमने से अस्पतालों में क्वारंटीन लोगों की तादाद बढ़ती जा रही है।
रफ्तार थमी.. एमएमयू ने लिए सिर्फ 15 सैंपल
शासन के ज्यादा से ज्यादा सैंपल की जांच कराने के निर्देश के बाद डीएम के आदेश पर स्वास्थ्य विभाग ने सैंपल लेने के लिए मेडिकल मोबाइल यूनिट की शुरुआत कराई थी। यह यूनिट दो दिनों से सैंपल लेने का काम नहीं कर रही है। शुक्रवार को टीम ने एक भी सैंपल नहीं लिया और शनिवार को भी सिर्फ 15 सैंपल लिए। इससे पहले करीब महीने भर से यह टीम हर दिन सौ से ज्यादा लोगों के सैंपल ले रही थी। बताया जा रहा है कि आईवीआरआई में पहले भेजे गए कई सैंपल की जांच अब तक न होने की वजह से यूनिट को बेहद जरूरी और कम से कम सैंपल लेने को कहा गया है।
पीलीभीत को कम सैंपल भेजने को कहा गया
आईवीआरआई के नोडल अफसर और संयुक्त निदेशक डॉ. वीके गुप्ता का कहना है कि शनिवार को बदायूं से 96, पीलीभीत से 154 सैंपल जांच के लिए मिले हैं। बरेली से कोई सैंपल नहीं मिला है। डॉ. गुप्ता ने बताया कि लैब पर जांच का कोई दबाव नहीं है। सारा काम सही चल रहा है। पीलीभीत से सैंपल काफी ज्यादा भेजे जा रहे थे, उन्हें बेहद जरूरी सैंपल भेजने को कहा गया है। उन्होंने स्वीकार किया कि शुक्रवार को बरेली से जांच के लिए 250 सैंपल मिले थे, इसमें से कुछ सैंपल की जांच बाकी है जो देर रात तक सौंप दी जाएगी।
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पुराना मोहनपुर में रहने वाले हरीशचंद ने पांच दिन पहले अपनी पत्नी पूजा को प्रसव के लिए जिला महिला अस्पताल में भर्ती कराया था। महिला अस्पताल की डॉक्टर ने पूजा की जांच की तो पाया कि शिशु की गर्भ में ही मृत्यु हो चुकी है। पूजा को सांस लेने में तकलीफ के साथ गले में भी दिक्कत हो रही थी। लिहाजा उसे कोरोना वार्ड में भर्ती करने के बाद 21 मई को उसका सैंपल जांच के लिए आईवीआरआई भेज दिया गया और रिपोर्ट आने तक मृत शिशु को गर्भ से निकालने के लिए उसका ऑपरेशन टाल दिया गया।
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आईवीआरआई से दो दिन बाद भी रिपोर्ट नहीं आई। इस बीच पूजा की हालत बिगड़ने लगी। शनिवार को पूजा के परिवार वालों ने महिला अस्पताल की डॉक्टरों पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए हंगामा शुरू कर दिया। इसके बाद शाम को सीएमएस की मौजूदगी में डॉक्टरों ने ऑपरेशन कर गर्भ से मृत शिशु बाहर निकाला। सीएमएस ने बताया कि दो दिन गर्भ में मृत अवस्था में पड़े रहने की वजह से शिशु अंदर ही सड़ने लगा था।
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‘ऑपरेशन में किसी तरह की लापरवाही नहीं की गई है। आरोप निराधार हैं। महिला जब आई थी तभी गर्भ में कोई मूवमेंट नहीं था। कोरोना के संदिग्ध लक्षण मिलने पर सैंपल लेकर उसे कोरोना वार्ड में भर्ती किया गया था। जांच रिपोर्ट अब तक नहीं आई है। फिर भी संक्रमण से बचाव के सभी इंतजाम कर गर्भ से मृत शिशु को बाहर निकाल दिया गया है।’
- डॉ. अलका शर्मा, सीएमएस
कोरोना सैंपल की जांच की रफ्तार धीमी पड़ने से और बढ़ीं दिक्कतें
बरेली। कहा तो यह जा रहा है कि जितनी तेजी से जांच होगी, कोरोना संक्रमण फैलने का खतरा भी उतना कम होता जाएगा लेकिन आईवीआरआई की लैब में जिस तरह की दिक्कतें आ रही हैं, उससे इस उम्मीद पर पानी फिरता नजर आ रहा है। सूत्रों के मुताबिक शनिवार को भी आईवीआरआई ने स्वास्थ्य विभाग को जांच के लिए और सैंपल भेजने की मनाही कर दी गई। हालांकि,आईवीआरआई के अफसरों ने स्वास्थ्य विभाग को ऐसा कोई संदेश भेजने से इनकार किया है।
दो दिनों से आईवीआरआई की ओर से मेसेज भेजकर स्वास्थ्य विभाग को जांच के लिए सैैंपल न भेजने को कहा जा रहा है। शुक्रवार को तो करीब ढाई सौ सैंपल आईवीआरआई भेजे गए थे लेकिन शनिवार को एक भी सैंपल नहीं भेजा गया है। उन 149 सैपल को भी रोक दिया गया जो शुक्रवार को तीन सौ बेड अस्पताल में लिए गए थे। जांच की रफ्तार थमने से अस्पतालों में क्वारंटीन लोगों की तादाद बढ़ती जा रही है।
रफ्तार थमी.. एमएमयू ने लिए सिर्फ 15 सैंपल
शासन के ज्यादा से ज्यादा सैंपल की जांच कराने के निर्देश के बाद डीएम के आदेश पर स्वास्थ्य विभाग ने सैंपल लेने के लिए मेडिकल मोबाइल यूनिट की शुरुआत कराई थी। यह यूनिट दो दिनों से सैंपल लेने का काम नहीं कर रही है। शुक्रवार को टीम ने एक भी सैंपल नहीं लिया और शनिवार को भी सिर्फ 15 सैंपल लिए। इससे पहले करीब महीने भर से यह टीम हर दिन सौ से ज्यादा लोगों के सैंपल ले रही थी। बताया जा रहा है कि आईवीआरआई में पहले भेजे गए कई सैंपल की जांच अब तक न होने की वजह से यूनिट को बेहद जरूरी और कम से कम सैंपल लेने को कहा गया है।
पीलीभीत को कम सैंपल भेजने को कहा गया
आईवीआरआई के नोडल अफसर और संयुक्त निदेशक डॉ. वीके गुप्ता का कहना है कि शनिवार को बदायूं से 96, पीलीभीत से 154 सैंपल जांच के लिए मिले हैं। बरेली से कोई सैंपल नहीं मिला है। डॉ. गुप्ता ने बताया कि लैब पर जांच का कोई दबाव नहीं है। सारा काम सही चल रहा है। पीलीभीत से सैंपल काफी ज्यादा भेजे जा रहे थे, उन्हें बेहद जरूरी सैंपल भेजने को कहा गया है। उन्होंने स्वीकार किया कि शुक्रवार को बरेली से जांच के लिए 250 सैंपल मिले थे, इसमें से कुछ सैंपल की जांच बाकी है जो देर रात तक सौंप दी जाएगी।