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Bareilly News: गुजरात मॉडल पर विकसित होंगी सहकारी समितियां
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बरेली। जिले की 40 सहकारी समितियों को गुजरात मॉडल पर विकसित किया जाएगा। इन्हें बहुउद्देशीय समितियों में बदलने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। सबसे पहले समितियों का नाम बदलेगा, फिर नए काम जोड़े जाएंगे। समितियां अब सिर्फ खाद-बीज वितरण और कृषि ऋणों तक सीमित नहीं रहेंगी। पेट्रोल पंप और रसोई गैस एजेंसियों का भी संचालन कर सकेंगी। गांव स्तर पर जरूरी सामान की आपूर्ति के लिए आउटलेट भी ले सकेंगी।
गुजरात में अमूल जैसे संस्थान सहकारिता मॉडल से ही सफल हुए हैं। इसी मॉडल से छोटे-बड़े सैकड़ों कारोबार संचालित हो रहे हैं। यूपी में अब तक के तमाम प्रयोग समितियों को घाटे से नहीं उबार पाए। कर्मचारियों का वेतन-मानदेय तक समय पर नहीं मिल रहा है। जबकि गुजरात में सहकारिता के क्षेत्र में तमाम नए प्रयोग हुए हैं।
जिला सहायक निबंधक मित्रसेन वर्मा ने बताया कि सभी समितियों को विकसित किया जाना है। पहले चरण में 40 समितियां चुनी गईं हैं। इन समितियों का कंप्यूटरीकरण कराया जा रहा है। समितियों की आमसभा बुलाकर नई उप विधि बनाने के प्रस्ताव पारित किए गए हैं और नई उप विधि लागू होते ही समितियां बहुउद्देशीय हो जाएंगी। फिर वे अपने क्षेत्र की जरूरत के हिसाब से कोई भी कारोबार कर सकेंगी। मुनाफा कमाएंगी तो सभी सदस्य किसानों को उसका फायदा मिलेगा। आने वाले दिनों में ऑनलाइन बैंकिंग से लेकर तमाम सुविधाएं समितियों के माध्यम से आम जनता को मिल सकेंगी।
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फोटो-
नई सहकारी नीति बनेगी : बीएल वर्मा
बरेली। केंद्रीय राज्यमंत्री सहकारिता एवं पूर्वोत्तर विकास बीएल वर्मा ने कहा कि विभिन्न राज्यों के सहकारिता मंत्रियों, प्रमुख सचिवों के साथ दिल्ली में वह बैठक कर चुके हैं। समितियों के बायलाज में बदलाव किया जाएगा और सभी समितियों को बहुउद्देशीय सहकारी समिति में बदला जाएगा। यूपी में काम शुरू हो चुका है। आगामी दिनों में बदलाव दिखाई उदेगा। अब इसे और विस्तार देने के लिए नई सहकारी नीति बनाई जाएगी। राज्यों के सहकारिता मंत्रियों से इस संबंध में सुझाव लिए जा चुके हैं। प्रधानमंत्री ने पांच ट्रिलियन डॉलर की अर्थ व्यवस्था का लक्ष्य दिया है। इसमें सहकारिता क्षेत्र मजबूत उपस्थिति दर्ज कराएगा। ब्यूरो
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गुजरात में अमूल जैसे संस्थान सहकारिता मॉडल से ही सफल हुए हैं। इसी मॉडल से छोटे-बड़े सैकड़ों कारोबार संचालित हो रहे हैं। यूपी में अब तक के तमाम प्रयोग समितियों को घाटे से नहीं उबार पाए। कर्मचारियों का वेतन-मानदेय तक समय पर नहीं मिल रहा है। जबकि गुजरात में सहकारिता के क्षेत्र में तमाम नए प्रयोग हुए हैं।
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जिला सहायक निबंधक मित्रसेन वर्मा ने बताया कि सभी समितियों को विकसित किया जाना है। पहले चरण में 40 समितियां चुनी गईं हैं। इन समितियों का कंप्यूटरीकरण कराया जा रहा है। समितियों की आमसभा बुलाकर नई उप विधि बनाने के प्रस्ताव पारित किए गए हैं और नई उप विधि लागू होते ही समितियां बहुउद्देशीय हो जाएंगी। फिर वे अपने क्षेत्र की जरूरत के हिसाब से कोई भी कारोबार कर सकेंगी। मुनाफा कमाएंगी तो सभी सदस्य किसानों को उसका फायदा मिलेगा। आने वाले दिनों में ऑनलाइन बैंकिंग से लेकर तमाम सुविधाएं समितियों के माध्यम से आम जनता को मिल सकेंगी।
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नई सहकारी नीति बनेगी : बीएल वर्मा
बरेली। केंद्रीय राज्यमंत्री सहकारिता एवं पूर्वोत्तर विकास बीएल वर्मा ने कहा कि विभिन्न राज्यों के सहकारिता मंत्रियों, प्रमुख सचिवों के साथ दिल्ली में वह बैठक कर चुके हैं। समितियों के बायलाज में बदलाव किया जाएगा और सभी समितियों को बहुउद्देशीय सहकारी समिति में बदला जाएगा। यूपी में काम शुरू हो चुका है। आगामी दिनों में बदलाव दिखाई उदेगा। अब इसे और विस्तार देने के लिए नई सहकारी नीति बनाई जाएगी। राज्यों के सहकारिता मंत्रियों से इस संबंध में सुझाव लिए जा चुके हैं। प्रधानमंत्री ने पांच ट्रिलियन डॉलर की अर्थ व्यवस्था का लक्ष्य दिया है। इसमें सहकारिता क्षेत्र मजबूत उपस्थिति दर्ज कराएगा। ब्यूरो