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एचआईवी पीड़ितों की शादी में शर्तें बनीं रोड़ा
ब्यूरो, अमर उजाला बरेली
Updated Wed, 06 Jul 2016 12:57 AM IST
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एचआईवी पीड़ित मरीजों की शादी के लिए एआरटी (एंटी रेट्रो वायरल थेरेपी) सेंटर ने जिम्मा उठाया है। लेकिन शादी में शर्त आड़े आ रही है। दरअसल, जितने भी लोगाें ने विवाह के लिए एआरटी सेंटर में आवेदन किया है वे अपने ही धर्म और जाति में जीवनसाथी चाहते हैं। इसके चलते एक साल से इनके आवेदन प्रदेश के हर एआरटी सेंटर में नकारे जा रहे हैं।
एआरटी सेंटर में मंडल के करीब 1375 एचआईवी मरीज पंजीकृत हैं। इनमें 426 महिलाएं, 56 बच्चे और 881 पुरुष हैं। इन एचआईवी पीड़ितों में 867 एड्स से पीड़ित हैं। अभी तक एआरटी सेंटर की ओर से पूरे प्रदेश में बरेली से छह पुरुषों के विवाह के लिए आवेदन भेजे गए हैं। लेकिन पिछले एक साल से इनके लिए कोई लड़की नहीं मिल रही है।
बातचीत के बाद भी नहीं तय हुआ रिश्ता
आवेदन करने वालों में हिंदू व मुस्लिम दोनों धर्मों के युवक शामिल हैं। इन्हें अपने धर्म और जाति में ही विवाह करना है। साथ ही लड़की भी कुंवारी होनी चाहिए। जबकि विवाह के लिए कई विधवा महिलाएं तैयार हैं। ये सभी एचआईवी पॉजिटिव हैं।
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एआरटी कराता है शादी
एआरटी सेंटर प्रदेश ही नहीं बल्कि देशभर में आवेदन भेजता है। सिर्फ एचआईवी पीड़िताें के रिश्ते तय होते हैं। लड़के और लड़कियों को मिलवाकर बातचीत भी कराई जाती है।
‘एक साल से आवेदन लंबित पड़े हैं। लड़काें को कुंवारी और अपने ही धर्म जाति में विवाह करना है। ऐसे में दिक्कत आ रही है।’
- डॉ. संजीव मिश्रा, चिकित्सा अधिकारी, एआरटी सेंटर
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एआरटी सेंटर में मंडल के करीब 1375 एचआईवी मरीज पंजीकृत हैं। इनमें 426 महिलाएं, 56 बच्चे और 881 पुरुष हैं। इन एचआईवी पीड़ितों में 867 एड्स से पीड़ित हैं। अभी तक एआरटी सेंटर की ओर से पूरे प्रदेश में बरेली से छह पुरुषों के विवाह के लिए आवेदन भेजे गए हैं। लेकिन पिछले एक साल से इनके लिए कोई लड़की नहीं मिल रही है।
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बातचीत के बाद भी नहीं तय हुआ रिश्ता
आवेदन करने वालों में हिंदू व मुस्लिम दोनों धर्मों के युवक शामिल हैं। इन्हें अपने धर्म और जाति में ही विवाह करना है। साथ ही लड़की भी कुंवारी होनी चाहिए। जबकि विवाह के लिए कई विधवा महिलाएं तैयार हैं। ये सभी एचआईवी पॉजिटिव हैं।
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एआरटी कराता है शादी
एआरटी सेंटर प्रदेश ही नहीं बल्कि देशभर में आवेदन भेजता है। सिर्फ एचआईवी पीड़िताें के रिश्ते तय होते हैं। लड़के और लड़कियों को मिलवाकर बातचीत भी कराई जाती है।
‘एक साल से आवेदन लंबित पड़े हैं। लड़काें को कुंवारी और अपने ही धर्म जाति में विवाह करना है। ऐसे में दिक्कत आ रही है।’
- डॉ. संजीव मिश्रा, चिकित्सा अधिकारी, एआरटी सेंटर