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Bareilly News: जटिल प्रक्रिया... धान खरीद पड़ी धीमी
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आंवला। मंडी समिति परिसर में क्रय केंद्र शुरू हुए एक माह होने को है, लेकिन जटिल प्रक्रियाओं के कारण धान बेचने के लिए अब भी किसान नाम मात्र ही पहुंच रहे हैं। सरकारी खरीद केंद्रों पर अब तक लक्ष्य के मुकाबले काफी कम धान की खरीद हो पाई है। किसानों का कहना है कि रजिस्ट्रेशन की जटिल प्रक्रिया के कारण वे मंडी के बजाय कम रेट पर बाजार में धान बेचने को मजबूर हैं। इससे किसानों को आर्थिक नुकसान हो रहा है और सरकार का खरीद लक्ष्य भी पिछड़ रहा है।
मार्केटिंग इंस्पेक्टर मुकेश कुमार ने बताया कि मंडी परिसर में खाद्य विभाग के चार, यूपीएसएस के पांच व पीसीएफ के तीन सेंटर सहित कुल 12 धान खरीद केंद्र बनाए गए हैं। इन सभी केंद्रों पर बृहस्पतिवार तक करीब 3385 क्विंटल धान की ही खरीद हो सकी है, जबकि लक्ष्य 27,400 मीट्रिक टन निर्धारित है। खरीद की धीमी रफ्तार से विभागीय अधिकारी भी चिंतित हैं। 15 अक्तूबर से आंवला मंडी में धान क्रय केंद्र शुरू है।
किसानों ने बताया कि धान की खरीद के लिए रजिस्ट्रेशन कराने में उन्हें काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कागजातों की कमी और प्रक्रिया की जटिलता के कारण कई किसान रजिस्ट्रेशन ही नहीं करा पा रहे हैं। कुछ किसानों का कहना है कि मंडी में धान बेचने में समय अधिक लगता है, जबकि बाजार में तुरंत भुगतान मिल जाता है। किसान एसपी सिंह, राजन सक्सेना, धर्मेंद्र सिंह, हरीश कुमार, अनेक कुमार, उमेश और टिकुरी ने बताया कि सरकारी केंद्रों पर धान में नमी बताकर किसानों को लौटा दिया जाता है। इसके अलावा रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया में जटिलता, फार्मर आईडी से जुड़ी दिक्कतें, सर्वे के दौरान दर्ज धान की वेरायटी और ऑनलाइन में दर्शाई गई वेरायटी में भिन्नता जैसी समस्याएं भी सामने आ रही हैं। यही वजह है कि वे कम दाम पर भी बाजार में धान बेच रहे हैं। किसानों का कहना है कि यदि रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया सरल बनाई जाए और खरीद केंद्रों पर पर्याप्त व्यवस्था की जाए, तो अधिक किसान मंडी में धान बेचने आएंगे।
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मजदूरों की कमी से दो केंद्रों पर खरीद शुरू नहीं
मंडी परिसर में संचालित यूपीएसएस के प्रथम व द्वितीय क्रय केंद्रों पर मजदूरों की व्यवस्था न होने के कारण खरीद ही शुरू नहीं हो सकी है। इससे भी किसानों को परेशानी हो रही है। सेंटर प्रभारियों ने खरीद में तेजी लाने और लक्ष्य पूरा करने के लिए गांव जाकर किसानों से संपर्क करने की बात कही है। मार्केटिंग इंस्पेक्टर मुकेश कुमार ने बताया कि मजदूरों की कमी को दूर कर जल्द दो केंद्रों को शुरू कराएंगे। धान खरीद पर कहा कि रजिस्ट्रेशन में आ रही दिक्कतों को दूर करने का प्रयास किया जा रहा है और किसानों को जागरूक कर मंडी में धान बेचने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
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मार्केटिंग इंस्पेक्टर मुकेश कुमार ने बताया कि मंडी परिसर में खाद्य विभाग के चार, यूपीएसएस के पांच व पीसीएफ के तीन सेंटर सहित कुल 12 धान खरीद केंद्र बनाए गए हैं। इन सभी केंद्रों पर बृहस्पतिवार तक करीब 3385 क्विंटल धान की ही खरीद हो सकी है, जबकि लक्ष्य 27,400 मीट्रिक टन निर्धारित है। खरीद की धीमी रफ्तार से विभागीय अधिकारी भी चिंतित हैं। 15 अक्तूबर से आंवला मंडी में धान क्रय केंद्र शुरू है।
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किसानों ने बताया कि धान की खरीद के लिए रजिस्ट्रेशन कराने में उन्हें काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कागजातों की कमी और प्रक्रिया की जटिलता के कारण कई किसान रजिस्ट्रेशन ही नहीं करा पा रहे हैं। कुछ किसानों का कहना है कि मंडी में धान बेचने में समय अधिक लगता है, जबकि बाजार में तुरंत भुगतान मिल जाता है। किसान एसपी सिंह, राजन सक्सेना, धर्मेंद्र सिंह, हरीश कुमार, अनेक कुमार, उमेश और टिकुरी ने बताया कि सरकारी केंद्रों पर धान में नमी बताकर किसानों को लौटा दिया जाता है। इसके अलावा रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया में जटिलता, फार्मर आईडी से जुड़ी दिक्कतें, सर्वे के दौरान दर्ज धान की वेरायटी और ऑनलाइन में दर्शाई गई वेरायटी में भिन्नता जैसी समस्याएं भी सामने आ रही हैं। यही वजह है कि वे कम दाम पर भी बाजार में धान बेच रहे हैं। किसानों का कहना है कि यदि रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया सरल बनाई जाए और खरीद केंद्रों पर पर्याप्त व्यवस्था की जाए, तो अधिक किसान मंडी में धान बेचने आएंगे।
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मजदूरों की कमी से दो केंद्रों पर खरीद शुरू नहीं
मंडी परिसर में संचालित यूपीएसएस के प्रथम व द्वितीय क्रय केंद्रों पर मजदूरों की व्यवस्था न होने के कारण खरीद ही शुरू नहीं हो सकी है। इससे भी किसानों को परेशानी हो रही है। सेंटर प्रभारियों ने खरीद में तेजी लाने और लक्ष्य पूरा करने के लिए गांव जाकर किसानों से संपर्क करने की बात कही है। मार्केटिंग इंस्पेक्टर मुकेश कुमार ने बताया कि मजदूरों की कमी को दूर कर जल्द दो केंद्रों को शुरू कराएंगे। धान खरीद पर कहा कि रजिस्ट्रेशन में आ रही दिक्कतों को दूर करने का प्रयास किया जा रहा है और किसानों को जागरूक कर मंडी में धान बेचने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।