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कंट्रोल रूम में शिकायतों की भरमार, स्कूल वसूल रहे मनमानी फीस

Tue, 24 Apr 2018 06:54 PM IST
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,बरेली
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,बरेली Updated Tue, 24 Apr 2018 06:54 PM IST
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Complaints increasing against schools
सांकेतिक तस्वीर
फीस संबंधी अध्यादेश जारी होने के बाद भी कांवेंट स्कूल मनमानी फीस वसूलने से बाज नहीं आ रहे। डीआईओएस कार्यालय पर खुले कंट्रोल रूम के पहले दिन सबसे अधिक शिकायतें फीस ज्यादा वसूलने संबंधी आईं। पचास से ज्यादा अभिभावकों ने फोन करके अपनी समस्याएं सुनाईं। हालांकि नाम सहित 17 अभिभावकों ने ही शिकायतें दर्ज कराईं। ज्यादातर अभिभावक अपनी पहचान छिपाना चाहते थे। इसलिए उन्होंने नाम सहित शिकायत दर्ज नहीं कराई। जिला समिति के सचिव डीआईओएस अचल कुमार मिश्रा ने बताया कि शिकायतें दर्ज की जा रही हैं। इनको समिति के सामने रखा जाएगा।
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कुछ इस तरह की आईं शिकायतें 
- एक अभिभावक ने जीडीएम पब्लिक स्कूल की शिकायत की, स्कूल में ज्यादा फीस ली जा रही है। बच्चे को स्कूल आने से मना कर दिया गया।
- चाइल्ड केयर बिशप कोनरॉड हरूनगला की शिकायत में कहा गया पूरे साल की फीस एकसाथ ले रहे हैं।
- सोबती पब्लिक स्कूल में ज्यादा फीस ली जा रही है। 
- राम भरोसे गर्ल्स इंटर कॉलेज की शिकायत, यहां कंप्यूटर साइंस के नाम पर मनमानी फीस वसूली जा रही है।
- हार्टमन कॉलेज की शिकायत, फीस बुक के रुपये लिए जा रहे हैं।
- इनके अलावा सेक्रेड हार्ट संजय नगर, बीबीएल, जीआरएम, गिरीश प्रसाद मैमोरियल स्कूल, द गुरु और माधव राव सिंधिया स्कूल की शिकायतें पहुंची। सभी शिकायतें फीस ज्यादा लेने की थी।
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स्कूलों की फीस कहां जमा हो, अब तक यह तय ही नहीं 
बड़ी हैरान करने वाली बात है कि कांवेंट स्कूलों की फीस कहां जमा हो, अब तक इसका कोई नियम ही नहीं बना। अभिभावक कामकाज छोड़कर घंटों बैंक की लाइन में लगकर फीस जमा करते हैं। पिछले दिनों आरटीआई कार्यकर्ता नवनीत शुक्ला ने सीएम के ऑनलाइन पोर्टल पर इस संबंध में शिकायत दर्ज कराई। दरअसल उनके एक मिलने वाले बुजुर्ग को अपने पोते की फीस जमा करने के लिए बैंक की लाइन में काफी देर लगना पड़ा। फीस जमा करने के चक्कर में उनकी तबीयत तक खराब हो गई। उनके जैसे सैकड़ों दादा-दादी अपने पोते पोतियों की फीस बैंक में जमा करने जाते हैं और परेशान होते हैं। मुख्य मंत्री कार्यालय से शिकायत डीएम तक पहुंची। डीआईओएस से इस बाबत रिपोर्ट मांगी गई। डीआईओएस ने इस बाबत अपनी रिपोर्ट प्रभारी अधिकारी कलक्ट्रेट को भेजी जो हैरान करने वाली थी। उनका कहना है कि फीस स्कूल में जमा हो या बैंक में इसकी कोई गाइडलाइन नहीं है। इसके लिए शासन स्तर से निर्देश जारी कराए जाएं।
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