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ठंडी रातें और तपते दिन.. ये मौसम भी कोरोना का
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मौसम
- फोटो : amar ujala
डॉक्टरों के मुताबिक दिन-रात के तापमान में 19 डिग्री तक का अंतर प्रभावित कर रहा है रोग प्रतिरोधक क्षमता
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वायरल रोगों की चपेट में आने वालों के लिए और घातक हो सकता है कोरोना
बरेली। हफ्ते भर से रात और दिन के तापमान में 19 डिग्री सेल्सियस का रिकॉर्ड अंतर नई चिंता जगा रहा है। चिकित्सकों का मानना है कि तापमान में इस कदर उतार-चढ़ाव सीधे तौर पर लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता को प्रभावित करने वाला है। लिहाजा यह मौसम कोरोना के लिए भी काफी हद तक अनुकूल है। एक और पहलू यह भी है कि इस मौसम की वजह से वायरल रोगों से ग्रसित होने वाले लोगों पर कोरोना का हमला और भी घातक हो सकता है।
मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक पिछले दो-तीन हफ्ते में तापमान में तेजी से उतार-चढ़ाव तो हुआ मगर न्यूनतम और अधिकतम तापमान में 10-12 डिग्री सेल्सियस तक का अंतर ही रिकॉर्ड हो रहा था लेकिन अब तापमान का अंतर काफी बढ़ गया है। पिछले एक हफ्ते में अधिकतम तापमान औसतन 34 और न्यूनतम 15 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड हुआ है। दिन और रात के तापमान के बीच औसतन 19 डिग्री सेल्सियस का अंतर रहा है जो चिकित्सकों के मुताबिक मानव शरीर पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रहा है।
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चिकित्सकों का कहना है कि दोपहर में गर्मी और रात में ठंड का एहसास होने से शरीर का थर्मोस्टेट (तापमान नियंत्रण प्रक्रिया) प्रभावित हो रहा है। इसका सीधा असर लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता पर पड़ रहा है। संक्रामक बीमारियाें की एकाएक रफ्तार बढ़ने का यही प्रमुख कारण है। ज्यादातर लोग बगैर चिकित्सीय परामर्श के एंटीबॉयोटिक और बुखार, सिर दर्द, जुकाम और खांसी की दवाएं ले लेते हैं, यह और भी घातक है।
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हर बीमारी को वायरल न समझें फौरन अपना कोविड टेस्ट कराएं
विशेषज्ञों का कहना है कि रोग प्रतिरोधक क्षमता कोरोना के खिलाफ ढाल की तरह काम करती है और मौसम का असर रोग प्रतिरोधक क्षमता पर ही सबसे ज्यादा पड़ रहा है। कोविड अस्पताल के सीएमएस डॉ. वागीश वैश के मुताबिक वायरल रोगों और कोरोना संक्रमण के लक्षण लगभग एक जैसे होते हैं। कोई चिकित्सक ही इनमें अंतर कर सकता है लिहाजा अगर कोई बगैर परामर्श दवा खा रहा है तो जाने-अनजाने जोखिम मोल ले रहा है। जरूरी है कि कोरोना जैसे लक्षण का एहसास होते ही कोरोना की जांच करा ली जाए क्योंकि कोरोना संक्रमण को पहचानने का यही सटीक विकल्प है।
बीमार शरीर कोरोना का आसान शिकार
फिजिशियन डॉ. सुदीप सरन ने बताया कि कोई व्यक्ति वायरल रोग से तभी ग्रसित होता है जब उसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो। ऐसा व्यक्ति किसी संक्रमित के चंद सेकंड भी संपर्क में आने पर खुद भी संक्रमित हो सकता है। कोरोना वायरस से रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होने पर बचा जा सकता है। इसलिए लोगों को पौष्टिक आहार लेने के साथ अपनी जीवनशैली को दुरुस्त रखना चाहिए। नशे से भी बचना चाहिए। संक्रमण से बचने के लिए मास्क और दो गज की दूरी रखना भी बेहद जरूरी है।
एहतियात रखेंगे तो वायरल रोगों से बचेंगे और कोरोना से भी
डॉ. वागीश ने बताया कि सर्दी-जुकाम के साथ एलर्जी के मरीज बढ़ रहे हैं। मौसम में बदलाव की वजह से शरीर पर दाने निकलने के भी केस आ रहे हैं। उन मरीजों को खासतौरपर सतर्कता बरतनी चाहिए जो ब्लड प्रेशर और डायबिटीज से पीड़ित हैं। रात के वक्त लापरवाही भारी पड़ सकती है। बीमारियों से बचाव के लिए पूरी बांह के कपड़े पहनना, गुनगुना पानी पीना और बाहर की खाने-पीने की चीजों से बचना जरूरी है। इसके साथ हाथों को लगातार धोने या सैनिटाइज करने, भीड़भाड़ वाली जगहों और सामूहिक आयोजनों से से दूर रहने से भी बीमारियों से बचा जा सकता है।
तापमान के रिकॉर्ड अंतर ने बढ़ाए बुखार के मरीज
दिन और रात के तापमान के अंतर से बीमारियां बढ़ रही हैं। बुखार के मरीजों की संख्या में एकाएक दोगुनी बढ़ोत्तरी हुई है। जिला अस्पताल की ओपीडी में आने वाला हर चौथा मरीज बुखार से पीड़ित है। वरिष्ठ चेस्ट फिजिशियन डॉ. पुनीत अग्रवाल ने बताया कि यह मौसम अस्थमा के मरीजों को भी परेशान करने वाला है। नए लोगों में भी अस्थमा उभर सकता है। तीन दिन से ज्यादा खांसी होने पर तुरंत जांच करानी चाहिए।
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वायरल रोगों की चपेट में आने वालों के लिए और घातक हो सकता है कोरोना बरेली। हफ्ते भर से रात और दिन के तापमान में 19 डिग्री सेल्सियस का रिकॉर्ड अंतर नई चिंता जगा रहा है। चिकित्सकों का मानना है कि तापमान में इस कदर उतार-चढ़ाव सीधे तौर पर लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता को प्रभावित करने वाला है। लिहाजा यह मौसम कोरोना के लिए भी काफी हद तक अनुकूल है। एक और पहलू यह भी है कि इस मौसम की वजह से वायरल रोगों से ग्रसित होने वाले लोगों पर कोरोना का हमला और भी घातक हो सकता है।
मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक पिछले दो-तीन हफ्ते में तापमान में तेजी से उतार-चढ़ाव तो हुआ मगर न्यूनतम और अधिकतम तापमान में 10-12 डिग्री सेल्सियस तक का अंतर ही रिकॉर्ड हो रहा था लेकिन अब तापमान का अंतर काफी बढ़ गया है। पिछले एक हफ्ते में अधिकतम तापमान औसतन 34 और न्यूनतम 15 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड हुआ है। दिन और रात के तापमान के बीच औसतन 19 डिग्री सेल्सियस का अंतर रहा है जो चिकित्सकों के मुताबिक मानव शरीर पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रहा है।
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चिकित्सकों का कहना है कि दोपहर में गर्मी और रात में ठंड का एहसास होने से शरीर का थर्मोस्टेट (तापमान नियंत्रण प्रक्रिया) प्रभावित हो रहा है। इसका सीधा असर लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता पर पड़ रहा है। संक्रामक बीमारियाें की एकाएक रफ्तार बढ़ने का यही प्रमुख कारण है। ज्यादातर लोग बगैर चिकित्सीय परामर्श के एंटीबॉयोटिक और बुखार, सिर दर्द, जुकाम और खांसी की दवाएं ले लेते हैं, यह और भी घातक है।
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