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Bareilly News: बादल बने कवच, कम रहा पराबैंगनी किरणों का प्रकोप

Tue, 29 Aug 2023 02:07 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Tue, 29 Aug 2023 02:07 AM IST
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Clouds became armor, outbreak of ultraviolet rays decreased
बरेली। घातक पराबैंगनी किरणों (यूवी रेज) का प्रकोप अबकी साल कम रहा। बादल रक्षा कवच बनकर डटे रहे। रिपोर्ट के मुताबिक बीते साल जून-जुलाई में 47 दिनों तक पराबैंगनी किरणों का प्रकोप रहा था। इस साल महज 13 दिन ही यूवी रेज लोगों कों झुलसा सकीं।
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आंचलिक मौसम विज्ञान केंद्र के विशेषज्ञ अतुल कुमार ने बताया कि बीते दो वर्षों में गर्मी के महीनों में पारा 40-43 डिग्री सेल्सियस के बीच रहा। आसमान साफ होने से औसत यूवी इंडेक्स 6-8 के बीच पहुंच रहा था। दोपहर 12 से तीन बजे इंडेक्स 9-11 के बीच पहुंच रहा था। इस साल अधिकतम औसत तापमान 38 डिग्री सेल्सियस रहा। यूवी इंडेक्स भी न्यूनतम शून्य और अधिकतम पांच तक दर्ज हुआ। इसकी वजह लगातार बादल मंडराने को माना जा रहा है। वहीं, पश्चिमी विक्षोभ की सक्रियता से बारिश भी 22 फीसदी ज्यादा रही। अधिकतम तापमान भी सामान्य से औसतन तीन डिग्री सेल्सियस कम दर्ज हुआ।
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प्रभावित रही थी प्रकाश संश्लेषण क्रिया, सूख गए पौधे
बरेली कॉलेज के बॉटनी विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. आलोक खरे ने भी इस साल जीव-जंतुओं समेत पेड़-पौधों पर पराबैंगनी किरणों का प्रकोप कम रहने की संभावना जताई। बताया कि बीते वर्षों में इन किरणों की तीव्रता से पौधों में कार्बन चक्र प्रभावित हुआ था। प्रकाश संश्लेषण की क्रिया भी मंद पड़ गई थी। यूवी रेज से डीएनए, प्रोटीन, लिपिड और झिल्लियों को नुकसान पहुंचता है। लिहाजा, पौधों की वृद्धि प्रभावित रही। कहा कि घास और छोटे पौधों के सूखने से जीव-जंतुओं की खाद्य शृंखला बाधित रहने की आशंका से इन्कार नहीं कर सकते।
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33 फीसदी तक कम रही त्वचा रोगियों की संख्या
स्वास्थ्य विभाग की ओर से आयोजित हो रहे आरोग्य मेले की रिपोर्ट के मुताबिक साल 2022 के जून-जुलाई में 5,400 त्वचा रोगी सामने आए थे। 2021 के जून-जुलाई में यह तादाद छह हजार रही। इस साल जून-जुलाई में त्वचा रोगियों की संख्या सिर्फ चार हजार रही। त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ. त्रिभुवन प्रसाद के मुताबिक इस साल जून-जुलाई में लगातार बादल मंडराए, बारिश होती रही। लिहाजा, त्वचा संंबंधी गंभीर रोगों के मरीज कम रहे।

यूवी इंडेक्स श्रेणी ये बरतें सावधानी
0-2 निम्न कोई खतरा नहीं।
3-5 मध्य सामान्य सुरक्षा जरूरी।
6-8 उच्च दोपहर 12 से तीन बजे तक धूप से बचें।
9-11 अति उच्च सुबह नौ से शाम पांच बजे तक धूप से बचें।
12 या ज्यादा खतरनाक सुबह सात से शाम छह बजे तक धूप से बचें।

ये होता है पराबैंगनी किरणों का असर
- सनबर्न, त्वचा का कैंसर, आंखों की रोशनी कम होना।
- रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होने से घावों में इंफेक्शन।
- चिड़चिड़ापन, भ्रम, गुस्सा, मानसिक तनाव, बेचैनी, उत्तेजित होना।
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