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Bareilly News: क्लीनिकल सायकोलॉजिस्ट ने की जांच, जारी हुए 12 प्रमाणपत्र
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बरेली। दिव्यांगता पुष्टि के लिए अब मानसिक रूप से कमजोर बच्चों और बड़ों को जिला अस्पताल से मानसिक चिकित्सालय तक चक्कर काटने की जरूरत नहीं है। सोमवार को क्लीनिकल सायकोलॉजिस्ट डॉ. आकांक्षा ने मनकक्ष में संदिग्ध की जांच की। पुष्टि पर 12 प्रमाणपत्र जारी किए।
सीएमओ स्तर से गठित दिव्यांग शिविर के मेडिकल बोर्ड में विशेषज्ञ समेत जांच उपकरण न होने से लोगों को चक्कर काटने पड़ रहे थे। मामले को अमर उजाला ने प्रमुखता से प्रकाशित किया तो जिलाधिकारी ने सीएमओ से व्यवस्था के लिए कहा।
शासन स्तर से तैनाती न होने से विकल्प के तौर पर मानसिक चिकित्सालय की क्लीनिकल सायकोलॉजिस्ट को दिव्यांग शिविर में जांच के लिए भेजने के लिए निदेशक को संबोधित पत्र भेजा गया। करीब माह भर क्रमवार पत्राचार के बाद प्रत्येक सोमवार शिविर में जांच के लिए क्लीनिकल सायकोलॉजिस्ट को भेजने पर मंजूरी मिली।
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बेवजह आवाजाही की परेशानी से मिलेगी राहत
नई व्यवस्था से पूर्व जिला अस्पताल में जांच के लिए पहुंच रहे संदिग्ध मानसिक दिव्यांग लोगों की जांच के लिए पहले शिविर में डॉक्टर से परामर्श के लिए पर्चा बनवाना पड़ता था। रेफर के बाद मानसिक चिकित्सालय में पर्चा बनवाकर कतार में लगकर जांच करानी पड़ती थी। देरी होने पर उन्हें फिर से आवाजाही करनी पड़ती थी। इस वजह से कई आवेदक दोबारा लौटकर ही नहीं आते थे।
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बारिश में त्वचा और वायरल बुखार, खांसी मरीजों की कतार
बरेली। सोमवार सुबह से हो रही बारिश के चलते पिछले सोमवार की तुलना में इस बार ओपीडी पहुंचने वाले मरीजों की संख्या करीब 60 फीसदी कम रही। इलाज के लिए पहुंचे मरीजों में ज्यादातर वायरल बुखार, सर्दी, खांसी और त्वचा रोग के रहे। इन्हें जांच के बाद दवा दी गई और बचाव का सुझाव भी दिया।
वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. एमएल अग्रवाल के मुताबिक, बारिश में नमी की अधिकता से फेफड़ों में संक्रमण से सांस के रोगियों की तकलीफ बढ़ जाती है। इसके अलावा तापमान में उतार-चढ़ाव से कमजोरी, थकान और जरा सी अनदेखी से विडाल यानी संक्रमण की आशंका भी रहती है। जो मरीज आ रहे हैं, उनमें ज्यादातर टाइफाइड, डायरिया के लक्षण वाले हैं। इसके अलावा तीन सौ बेड अस्पताल की नेत्र रोग ओपीडी में भी मरीजों की कतार रही। आंखों में खुजली, लालपन की समस्या सबसे अधिक रही। सावधानी बरतने समेत संक्रमण से बचाव को ड्रॉप दिए गए।
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सीएमओ स्तर से गठित दिव्यांग शिविर के मेडिकल बोर्ड में विशेषज्ञ समेत जांच उपकरण न होने से लोगों को चक्कर काटने पड़ रहे थे। मामले को अमर उजाला ने प्रमुखता से प्रकाशित किया तो जिलाधिकारी ने सीएमओ से व्यवस्था के लिए कहा।
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शासन स्तर से तैनाती न होने से विकल्प के तौर पर मानसिक चिकित्सालय की क्लीनिकल सायकोलॉजिस्ट को दिव्यांग शिविर में जांच के लिए भेजने के लिए निदेशक को संबोधित पत्र भेजा गया। करीब माह भर क्रमवार पत्राचार के बाद प्रत्येक सोमवार शिविर में जांच के लिए क्लीनिकल सायकोलॉजिस्ट को भेजने पर मंजूरी मिली।
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बेवजह आवाजाही की परेशानी से मिलेगी राहत
नई व्यवस्था से पूर्व जिला अस्पताल में जांच के लिए पहुंच रहे संदिग्ध मानसिक दिव्यांग लोगों की जांच के लिए पहले शिविर में डॉक्टर से परामर्श के लिए पर्चा बनवाना पड़ता था। रेफर के बाद मानसिक चिकित्सालय में पर्चा बनवाकर कतार में लगकर जांच करानी पड़ती थी। देरी होने पर उन्हें फिर से आवाजाही करनी पड़ती थी। इस वजह से कई आवेदक दोबारा लौटकर ही नहीं आते थे।
बारिश में त्वचा और वायरल बुखार, खांसी मरीजों की कतार
बरेली। सोमवार सुबह से हो रही बारिश के चलते पिछले सोमवार की तुलना में इस बार ओपीडी पहुंचने वाले मरीजों की संख्या करीब 60 फीसदी कम रही। इलाज के लिए पहुंचे मरीजों में ज्यादातर वायरल बुखार, सर्दी, खांसी और त्वचा रोग के रहे। इन्हें जांच के बाद दवा दी गई और बचाव का सुझाव भी दिया।
वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. एमएल अग्रवाल के मुताबिक, बारिश में नमी की अधिकता से फेफड़ों में संक्रमण से सांस के रोगियों की तकलीफ बढ़ जाती है। इसके अलावा तापमान में उतार-चढ़ाव से कमजोरी, थकान और जरा सी अनदेखी से विडाल यानी संक्रमण की आशंका भी रहती है। जो मरीज आ रहे हैं, उनमें ज्यादातर टाइफाइड, डायरिया के लक्षण वाले हैं। इसके अलावा तीन सौ बेड अस्पताल की नेत्र रोग ओपीडी में भी मरीजों की कतार रही। आंखों में खुजली, लालपन की समस्या सबसे अधिक रही। सावधानी बरतने समेत संक्रमण से बचाव को ड्रॉप दिए गए।