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बहादुर बिटिया ने 20 मिनट तक किया शोहदे से संघर्ष

Fri, 27 Dec 2019 02:01 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Fri, 27 Dec 2019 02:01 AM IST
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सूचना देने के तीन घंटे बाद तक न जीआरपी पहुंची और न थाना पुलिस
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फरीदपुुर। शोहदे द्वारा युवती को चलती ट्रेन से फेंकने की घटना ने जहां लोगों को झकझोर दिया है, वहीं कार्रवाई के लिए जिम्मेदारों की उदासीनता ने मानवता को भी शर्मसार कर दिया है। बहादुर बिटिया के संघर्ष को लोगों ने जरूर सलाम किया, जिसने खाली बोगी में करीब 20 मिनट तक शोहदे से मोर्चा लिया।
ट्रेन का सफर यूं तो काफी सुरक्षित माना जाता है। ट्रेन चलने से पहले जीआरपी और आरपीएफ निरीक्षण करती है। गारद भी साथ चलती है। बावजूद इसके इस घटना में रेलवे सुरक्षा बलों की कोई चुस्ती नजर नहीं आई। बिटिया बरेली से ट्रेन चलने के बाद फरीदपुर की द्वारिकेश चीनी मिल तक करीब 20 मिनट तक शोहदे से संघर्ष करती रही पर कोई सुरक्षाकर्मी नहीं पहुंचा। यहां तक कि घटना महिला बोगी में होना बताई जा रही है, लेकिन उसमें सुरक्षा का कोई प्रबंध न होना व्यवस्था पर सवाल उठा रहा है। बहादुर बेटी को जब कोई मदद नहीं मिली तो उसने मोबाइल से कॉल करने की कोशिश की, तभी शोहदे ने उसे चलती ट्रेन से फेंक दिया। ट्रैक के पत्थरों से टकराकर उसका सिर फट गया। पीठ में भी काफी चोट आई। होश आने पर खुद ही लड़खड़ाती हुई सहायता के लिए आगे बढ़ी और ग्रामीणों के जरिये 112 नंबर पर कॉल करके पुलिस की मदद ली। पीआरवी से मदद लेने का मामला फतेहगंज पूर्वी इंस्पेक्टर अश्विनी कुमार की जानकारी में था, लेकिन उन्होंने इस घटना को जीआरपी का मामला बताकर टाल दिया। पुलिस से लेकर जीआरपी तक ने न तो युवती की मदद की और न ही शोहदे को पकड़ने की कोई कोशिश की। अगर जीआरपी सक्रिय हो जाती तो शोहदे को ट्रेन में ही दबोचा जा सकता था। जीआरपी इंस्पेक्टर तो घटना के तीन घंटे बाद भी जानकारी न होने की बात कह रहे हैं।
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सिर में आए छह टांके
112 नंबर पुलिस जैसे ही बिटिया को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लेकर पहुंची, वहां मौजूद केंद्र अधीक्षक डॉ. वासित अली ने टीम के साथ लगकर बहादुर बेटी के सिर में छह टांके लगाए। प्राथमिक उपचार से बेटी को आराम मिला। डॉ. वासित अली ने दूसरे डॉक्टरों की तरह बेटी को बरेली रेफर नहीं किया, बल्कि उसके परिवार को फोन कराकर सूचना दिलाई। डॉ. अली ने वर्ष 2010 में लाइन किनारे घायल अवस्था में पड़े गोला के युवक को अमर उजाला टीम द्वारा सीएचसी में भर्ती कराने पर उसकी भी जान बचाई थी।
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