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फॉस्टर केयर: अनाथों के लिए चाहिए नाथ.. आप भी बढ़ाएं हाथ
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अनाथ बच्चों की परवरिश के लिए अफसरों को रहमदिल परिवारों की तलाश
नर्सिंग होम, आईवीएफ सेंटर और एनजीओ से भी लेंगे सहयोग
बरेली। समेकित बाल संरक्षण के तहत फॉस्टर केयर स्कीम यानी पालक देखभाल योजना को धरातल पर उतारने की कवायद शुरू हो रही है। इसके लिए गायनी, नर्सिंग होम संचालक, आईवीएफ सेंटर समेत बाल संरक्षण के लिए कार्य कर रहीं संस्थाओं का सहयोग लिया जाएगा। इस संबंध में छह जनवरी को विकास भवन सभागार में बैठक होगी। इसमें सभी को अपने स्तर से अनाथ बच्चों की परवरिश के लिए परिवार खोजने की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। शुक्रवार को सीडीओ ने डीपीओ को बैठक का एजेंडा तय करने के निर्देश दिए हैं।
अनाथ और निराश्रित बच्चों की देखरेख के लिए बाल कल्याण समिति सर्वे कर परिवारों का चयन करेगी। किसी बच्चे को गोद लेने की तमन्ना रखने वाले नि:संतान दंपती इस योजना का लाभ ले सकेंगे। अनाथ बच्चों को उन लोगों को ही गोद दिया जाएगा, जो उनकी देखरेख करने के योग्य होंगे। इसके लिए थानों से संबंधित परिवारों के बारे में कैरेक्टर सर्टिफिकेट और मेडिकल ऑफिसर से मेडिकल रिपोर्ट ली जाएगी। सीडीओ सत्येंद्र कुमार ने बताया कि इस योजना में छह माह से लेकर तीन साल तक के ही बच्चे गोद दिए जाएंगे। फॉस्टर केयर के तहत दंपती को तीन साल तक बच्चे को पास रखकर उसका संरक्षण करना होगा। इसके बाद अगर बच्चे को रखने से परिवार को कोई परहेज नहीं होगा और बच्चा भी खुश रहेगा तभी बच्चे को गोद देने की विधिक कार्रवाई होगी। हालांकि, इस दौरान अगर परिवार बच्चे को साथ नहीं रखना चाहेगा तो बच्चे को उससे वापस लेकर बाल कल्याण समिति को सौंप दिया जाएग। हालांकि अभी निर्धारित आयुवर्ग के सापेक्ष कितने बच्चे गोद लेने के लिए पात्र हैं, उनका चयन करना बाकी है।
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नर्सिंग होम, आईवीएफ सेंटर और एनजीओ से भी लेंगे सहयोग
बरेली। समेकित बाल संरक्षण के तहत फॉस्टर केयर स्कीम यानी पालक देखभाल योजना को धरातल पर उतारने की कवायद शुरू हो रही है। इसके लिए गायनी, नर्सिंग होम संचालक, आईवीएफ सेंटर समेत बाल संरक्षण के लिए कार्य कर रहीं संस्थाओं का सहयोग लिया जाएगा। इस संबंध में छह जनवरी को विकास भवन सभागार में बैठक होगी। इसमें सभी को अपने स्तर से अनाथ बच्चों की परवरिश के लिए परिवार खोजने की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। शुक्रवार को सीडीओ ने डीपीओ को बैठक का एजेंडा तय करने के निर्देश दिए हैं।
अनाथ और निराश्रित बच्चों की देखरेख के लिए बाल कल्याण समिति सर्वे कर परिवारों का चयन करेगी। किसी बच्चे को गोद लेने की तमन्ना रखने वाले नि:संतान दंपती इस योजना का लाभ ले सकेंगे। अनाथ बच्चों को उन लोगों को ही गोद दिया जाएगा, जो उनकी देखरेख करने के योग्य होंगे। इसके लिए थानों से संबंधित परिवारों के बारे में कैरेक्टर सर्टिफिकेट और मेडिकल ऑफिसर से मेडिकल रिपोर्ट ली जाएगी। सीडीओ सत्येंद्र कुमार ने बताया कि इस योजना में छह माह से लेकर तीन साल तक के ही बच्चे गोद दिए जाएंगे। फॉस्टर केयर के तहत दंपती को तीन साल तक बच्चे को पास रखकर उसका संरक्षण करना होगा। इसके बाद अगर बच्चे को रखने से परिवार को कोई परहेज नहीं होगा और बच्चा भी खुश रहेगा तभी बच्चे को गोद देने की विधिक कार्रवाई होगी। हालांकि, इस दौरान अगर परिवार बच्चे को साथ नहीं रखना चाहेगा तो बच्चे को उससे वापस लेकर बाल कल्याण समिति को सौंप दिया जाएग। हालांकि अभी निर्धारित आयुवर्ग के सापेक्ष कितने बच्चे गोद लेने के लिए पात्र हैं, उनका चयन करना बाकी है।
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