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खुद सरकारी आवास कब्जाए, अपने मकान किराए पर उठाए
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बरेली। तमाम कर्मचारियों ने शहर में बने अपने निजी आवासों को किराए पर उठा रखा है, जबकि वह खुद राजेंद्रनगर में पीडब्लयूडी कॉलोनी के क्वार्टरों में रह रहे हैं। इनमें तमाम ऐसे कर्मचारी भी हैं, जिनका यहां से तबादला हुए दो से पांच साल हो गए हैं, लेकिन उनसे अब तक आवास खाली नहीं कराए गए हैं। भाजपा नेता प्रदीप कुमार शर्मा ने ऐसे कर्मचारियों का चिट्ठा तैयार कर डीएम नितीश कुमार को सौंप दिया है। इसमें यह खुलासा भी किया गया है कि किन कर्मचारियों के निजी आवास कहां बने हैं, फिर भी किस नंबर के सरकारी आवास में रह रहे हैं। इसके अलावा ट्रांसफर हो चुके कर्मचारियों की लिस्ट भी शामिल की गई है। डीएम ने सरकारी आवासों के आवंटन को लेकर चल रही इस गड़बड़ी की जांच शुरू करा दी है।
डीएम से यह शिकायत की गई है कि राजेंद्रनगर की पीडब्ल्यूडी कॉलोनी में विभिन्न विभागों के करीब चार दर्जन ऐसे कर्मचारी हैं, जिनके शहर में निजी आवास भी हैं, जबकि तीन दर्जन ऐसे कर्मचारी हैं, जिनका यहां से स्थानांतरण हुए दो से पांच साल तक हो गए हैं। अब वे दूसरे जिलों में कार्यरत हैं। शिकायतकर्ता ने डीएम को ऐसे कर्मचारियों की सूची देते हुए यह खुलासा किया है कि एक कर्मचारी का संजयनगर में दोमंजिला आवास है, फिर भी वह सरकारी आवास में रह रहा है। इसी तरह बहेड़ी में कार्यरत एक कर्मचारी का कुंवरपुर में आवास है। यह मकान उन्होंने किराए पर उठा रखा है। एक सरकारी आवास को तो कर्मचारी ने ग्राम पंचायत के एक जनप्रतिनिधि को किराए पर दे रखा है। इसी तरह शिक्षा विभाग के एक कर्मचारी ने सौफुटा रोड पर तीन साल पहले मकान खरीदा था। उसे किराए पर दे रखा है। तहसील जजी के एक लिपिक ने भी सरकारी आवास को व्यावसायिक काम के लिए किराए पर उठा दिया है। इसी तरह एक कर्मचारी ने सौफुटा रोड पर मकान दो साल पहले खरीदा था। दिवाली पर गृह प्रवेश भी किया, लेकिन सरकारी आवास खाली नहीं किया है।
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डीएम से यह शिकायत की गई है कि राजेंद्रनगर की पीडब्ल्यूडी कॉलोनी में विभिन्न विभागों के करीब चार दर्जन ऐसे कर्मचारी हैं, जिनके शहर में निजी आवास भी हैं, जबकि तीन दर्जन ऐसे कर्मचारी हैं, जिनका यहां से स्थानांतरण हुए दो से पांच साल तक हो गए हैं। अब वे दूसरे जिलों में कार्यरत हैं। शिकायतकर्ता ने डीएम को ऐसे कर्मचारियों की सूची देते हुए यह खुलासा किया है कि एक कर्मचारी का संजयनगर में दोमंजिला आवास है, फिर भी वह सरकारी आवास में रह रहा है। इसी तरह बहेड़ी में कार्यरत एक कर्मचारी का कुंवरपुर में आवास है। यह मकान उन्होंने किराए पर उठा रखा है। एक सरकारी आवास को तो कर्मचारी ने ग्राम पंचायत के एक जनप्रतिनिधि को किराए पर दे रखा है। इसी तरह शिक्षा विभाग के एक कर्मचारी ने सौफुटा रोड पर तीन साल पहले मकान खरीदा था। उसे किराए पर दे रखा है। तहसील जजी के एक लिपिक ने भी सरकारी आवास को व्यावसायिक काम के लिए किराए पर उठा दिया है। इसी तरह एक कर्मचारी ने सौफुटा रोड पर मकान दो साल पहले खरीदा था। दिवाली पर गृह प्रवेश भी किया, लेकिन सरकारी आवास खाली नहीं किया है।
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