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कोरोना महामारी में एकजुट था परिवार पर बुजुर्गों से दूर रहे परिजन

Wed, 15 Jun 2022 02:36 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Wed, 15 Jun 2022 02:36 AM IST
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children make distance from old parents
बरेली। उम्र के अलग-अलग पड़ाव में सभी को बुजुर्ग होना तय है। इस उम्र में पहुंचने पर व्यक्ति को धन, पद का लोभ नहीं रहता सिर्फ अपनों के प्यार भरे दो बोल और सेवाभाव की जरूरत होती है, लेकिन मनकक्ष का रिकॉर्ड बताता है कि बुजुर्गों को सबसे ज्यादा तकलीफ उस दौर में हुई जब परिवार साथ था। उन्होंने साथी खोए। उनके गम से उबरने के लिए सांत्वना के बजाय ताने मिले। वह दौर कोरोना महामारी का था।
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जिला अस्पताल मनकक्ष के मनोचिकित्सक डॉ. आशीष के मुताबिक कोरोना महामारी में बुजुर्गों की स्थिति के आकलन के लिए हेल्प एज इंडिया ने सर्वे किया है। सर्वे रिपोर्ट के मुताबिक कोरोना महामारी ने बुजुर्गों को दूसरों पर वित्तीय निर्भरता को बढ़ा दिया है। उनकी देखभाल करने वालों की आय में कमी आई है। उनके साथ दुर्व्यवहार के मामले बढ़े हैं। 58 फीसदी बुजुर्गों के परिवार के सदस्य कोरोना की वजह से वर्क फ्रॉम होम कर रहे थे। दिन भर इतने पास रहते हुए भी बुजुर्गों से बात करने के लिए कोई उनके पास नहीं ठहरता था। वे खुद को फंसा और निराश महसूस करते थे। साथ ही, उनके सुझावों को तत्काल दरकिनार कर देते थे।
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रिपोर्ट के अनुसार 75 से 89 वर्ष आयुवर्ग के 40 फीसदी बुजुर्ग अपने खर्च के लिए परिवार के सदस्यों पर निर्भर थे। उनकी देखभाल करने वालों की या तो नौकरी चली गई थी या फिर वेतन में कटौती हुई। लिहाजा, कोई मांग करना बुजुर्गों के लिए दुर्व्यवहार की वजह बनती गई। 77 फीसदी के साथ मौखिक रूप से दुर्व्यवहार हुआ था तो 23 फीसदी के साथ मारपीट हुई थी। कोरोना थमने के बाद भी यह मामले थमे नहीं हैं।
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बेटों ने किया दुर्व्यवहार, बेटियां बनीं मददगार
डॉ. आशीष के मुताबिक बुजुर्गों के साथ दुर्व्यवहार के मामलों में अब तक जो मामले सामने आए हैं, उनमें करीब 75 फीसदी मामलों में बेटों ने मारपीट अथवा मौखिक दुर्व्यवहार अपने बुजुर्ग पिता के साथ किया। 25 फीसदी मामलों में बहुओं द्वारा उत्पीड़ित किए जाने के मामले पहुंचे। बेटियों द्वारा प्रताड़ित करने का कोई मामला सामने नहीं आया। सर्वे के मुताबिक कोरोना महामारी के दौर में घर में रहते हुए बेटे जब उनकी बात अनसुनी कर ताने मारते थे या हृदय विदारक शब्दों का प्रयोग करते थे, उस दौरान भी ससुराल में रह रही बेटियां फोन कर उनसे हालचाल पूछती थीं। हरसंभव मदद को तैयार थीं।
चिकित्सकों ने बेटे को लगाई कड़ी फटकार
बताया कि साल 2020 में महामारी के दौरान एक बुजुर्ग गंभीर हालत में जिला अस्पताल में भर्ती हुए थे। उनका चार माह तक इलाज चला। परिवार का कोई सदस्य न होने से स्टाफ उनकी मदद करता था। एक दिन पता चला कि कोई व्यक्ति देर रात आया था और कुछ ही देर में चला गया। बुजुर्ग से पूछा पर कोई जवाब नहीं मिला। ऐसे में निगरानी कर उसे रात एक बजे पकड़ा गया। पता चला कि वह उनका बेटा है। जो पिता की पेंशन के लिए हस्ताक्षर कराने हर माह की दस तारीख को चुपचाप आकर चला जाता था। पिता को फटकार कर उसने चुप रहने को कहा था। जानकारी पर जमकर फटकार लगाई और पिता को साथ भेजा।

बच्चे जो देखेंगे वही आपके साथ भी करेंगे
मनोचिकित्सक के मुताबिक वर्तमान समय में बच्चों की परवरिश पर बेहद ध्यान देने की जरूरत है। संभव हो तो दादा दादी को साथ रखें। मुमकिन न हो तो बच्चों को दादा दादी के साथ गुजारे अच्छे पलों को बच्चों के साथ साझा करें। क्योंकि बच्चे जो सुनेंगे, देखेंगे वहीं बाद में आपके साथ करेंगे। सुझाव दिया है कि कई बुजुर्ग डिमेंशिया (याद्दाश्त कमजोर होने) से ग्रसित होते हैं। उनका ध्यान रखें, ताने न मारें। बीमार होने पर ख्याल रखें, जैसे उन्होंने बचपन, जवानी में आपका ख्याल रखा था। अकेलापन एहसास न होने दें। कार्य संबंधी सुझाव मांगे। डिजिटल युग में उन्हें अनुभवहीन न मानें, बल्कि सिखाएं।
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