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Bareilly News: ई-गेमिंग की आभासी दुनिया में उलझे बच्चे, बदल रहा व्यवहार

Sat, 17 Jan 2026 03:21 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sat, 17 Jan 2026 03:21 AM IST
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Children entangled in the virtual world of e-gaming, their behavior is changing.Children entangled in the virtual world of e-gaming, their behavior is changing.
इस तरह के मामलों में हो रहा इजाफा, हार्मोनल समस्याओं का भी हो रहे शिकार
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बरेली। डिजिटल युग में ई-गेमिंग बच्चों और युवाओं की दिनचर्या का अहम हिस्सा बन चुकी है। मोबाइल फोन, टैबलेट और कंप्यूटर पर खेले जाने वाले ऑनलाइन गेम्स ने मनोरंजन के साथ-साथ कई नई चुनौतियां भी खड़ी कर दी हैं। मनोवैज्ञानिकों और काउंसलरों का कहना है कि हाल के वर्षों में बच्चों के व्यवहार में अचानक आए बदलाव के पीछे ई-गेमिंग बड़ा कारण है।
काफी समय तक गेम खेलने से बच्चे आभासी दुनिया में इतने डूब जाते हैं कि वास्तविक जीवन की परिस्थितियों से तालमेल बैठाने में उन्हें परेशानी होने लगती है। विशेषज्ञ डॉ. सुविधा शर्मा ने बताया कि समय रहते पहचान होने पर ध्यान और थेरेपी से उनको राहत मिल सकती है।
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ग्रामीण क्षेत्र का एक 10 वर्षीय बालक अत्यधिक ऑनलाइन गेम खेलने के कारण गंभीर परेशानियों से जूझने लगा था। लगातार हेडफोन लगाकर गेम खेलने से उसके मस्तिष्क पर असर पड़ा और वह अजीब-अजीब आवाजें निकालने लगा। साथ ही बेचैनी और छटपटाहट भी होने लगी। परिजन उसे मनोवैज्ञानिक के पास ले गए। जांच में पता चला कि लगातार तेज आवाज और लंबे समय तक गेमिंग ने उसके तंत्रिका तंत्र को प्रभावित किया है। इसके बाद ध्यान और काउंसलिंग से उसकी स्थिति में धीरे-धीरे सुधार हुआ। संवाद
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कॉग्निटिव बिहेवियर थेरेपी से आया सुधार
सीबीगंज क्षेत्र के 20 वर्षीय युवक को ऑनलाइन बाइक रेसिंग गेम खेलने की लत लग गई। अभिभावकों ने उसकी जिद पर उसे बाइक दिला दी। इसके बाद उसकी गेमिंग की आदत और बढ़ गई। वह बाइक और कार रेसिंग गेम्स में इतना डूब गया कि वास्तविक जीवन में भी वही रोमांच तलाशने लगा। नई गाड़ी की जिद, आक्रामक व्यवहार और जिद्दी स्वभाव परिवार की परेशानी की वजह बन गया। तब परिजनों ने कॉग्निटिव बिहेवियर थेरेपी का सहारा लिया गया।
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