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अमृतसर घूमने घर से भागे थे बिहार के बच्चे पहुंच गए बरेली
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बरेली। जेब में सिर्फ सौ रुपये का नोट और आंखों में अमृतसर घूमने का ख्वाब। बिहार के रक्सौल में रहने वाले 10 साल के युवराज और 12 साल के अवतार को घर से स्कूल भेजा गया था लेकिन वे रेलवे स्टेशन जाकर ट्रेन में बैठ गए। हालांकि अमृतसर घूमने का उनका ख्वाब पूरा नहीं हो पाया। बरेली में उन्हें ट्रेन से उतारकर उनके मां-बाप के सुपुर्द कर दिया गया। इस बीच पांच दिन उन्हें अनाथालय में जरूर रहना पड़ा।
युवराज और अवतार को उनकी मां ने रोज की तरह मंगलवार को स्कूल जाने के लिए तैयार किया था लेकिन स्कूल जाने के बजाय दोनों ट्रेन में जाकर बैठ गए। दोनों को मम्मी-पापा से इजाजत मिलने की उम्मीद नहीं थी लिहाजा दोनों ने उन्हें बताए बगैर अमृतसर घूमने की योजना बना रखी थी और इसके लिए सौ रुपये का इंतजाम भी किया था। ट्रेन में बैठने के बाद दोनों को ख्याल आया कि मां उनके लिए परेशान हो रही होगी। इस पर पड़ोस की सीट पर बैठे युवक से मांगकर अपनी मां को फोन लगाया।
युवक के मुताबिक बच्चों ने मां को बताया कि वह उनके लिए परेशान न हों, वे दोनों ठीक हैं और अमृतसर घूमने जा रहे हैं। मां ने पूछा कि फोन किसका है तो बताया कि पास में एक अंकल बैठे हैं, उन्ही का है। मां के कहने पर युवराज और अवतार ने उनकी बात भी पड़ोस में बैठे युवक से करा दी। बकौल युवक, बच्चों की मां ने उन्हें पूरा वाकया बताते हुए आग्रह किया कि वह उन्हें किसी भी स्टेशन पर पुलिस की सुपुर्दगी में छोड़ दें और पुलिस से उनकी बात भी करा दें।
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युवक ने दोनों बच्चों को बुधवार को बरेली जंक्शन पर जीआरपी के सुपुर्द किया। इसके बाद जीआरपी ने बाल कल्याण समिति को इस मामले की जानकारी दी और समिति के आदेश पर बच्चों के माता-पिता के आने तक उन्हें अनाथालय भेज दिया। शनिवार को बच्चों के माता-पिता यहां पहुंच गए लेकिन शनिवार और रविवार दो दिन छुट्टी में निकल गए। सोमवार को बच्चों के बाल कल्याण समिति में पेश करने के बाद उनके माता-पिता के सुपुर्द कर दिया गया।
ट्रेन में बैठ गए, यह भी नहीं पूछा, कहां जाएगी
बाल कल्याण समिति ने बच्चों को उनके माता-पिता को सुपुर्द करने से पहले उनसे तफसील से पूरा वाकया पूछा। बच्चों ने बताया कि वे रक्सौल में रेलवे स्टेशन पहुंचने के बाद जो ट्रेन खड़ी मिली, उसी में बैठ गए थे। उन्हें नहीं पता था कि ट्रेन अमृतसर नहीं जाएगी। समिति की सदस्य राखी चौहान ने माता-पिता को बच्चों के साथ तस्वीर और उनके दूसरे कागजात दिखाने को कहा। गहन छानबीन करने के बाद समिति ने बच्चों को उनके माता-पिता को सौंप दिया।
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युवराज और अवतार को उनकी मां ने रोज की तरह मंगलवार को स्कूल जाने के लिए तैयार किया था लेकिन स्कूल जाने के बजाय दोनों ट्रेन में जाकर बैठ गए। दोनों को मम्मी-पापा से इजाजत मिलने की उम्मीद नहीं थी लिहाजा दोनों ने उन्हें बताए बगैर अमृतसर घूमने की योजना बना रखी थी और इसके लिए सौ रुपये का इंतजाम भी किया था। ट्रेन में बैठने के बाद दोनों को ख्याल आया कि मां उनके लिए परेशान हो रही होगी। इस पर पड़ोस की सीट पर बैठे युवक से मांगकर अपनी मां को फोन लगाया।
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युवक के मुताबिक बच्चों ने मां को बताया कि वह उनके लिए परेशान न हों, वे दोनों ठीक हैं और अमृतसर घूमने जा रहे हैं। मां ने पूछा कि फोन किसका है तो बताया कि पास में एक अंकल बैठे हैं, उन्ही का है। मां के कहने पर युवराज और अवतार ने उनकी बात भी पड़ोस में बैठे युवक से करा दी। बकौल युवक, बच्चों की मां ने उन्हें पूरा वाकया बताते हुए आग्रह किया कि वह उन्हें किसी भी स्टेशन पर पुलिस की सुपुर्दगी में छोड़ दें और पुलिस से उनकी बात भी करा दें।
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युवक ने दोनों बच्चों को बुधवार को बरेली जंक्शन पर जीआरपी के सुपुर्द किया। इसके बाद जीआरपी ने बाल कल्याण समिति को इस मामले की जानकारी दी और समिति के आदेश पर बच्चों के माता-पिता के आने तक उन्हें अनाथालय भेज दिया। शनिवार को बच्चों के माता-पिता यहां पहुंच गए लेकिन शनिवार और रविवार दो दिन छुट्टी में निकल गए। सोमवार को बच्चों के बाल कल्याण समिति में पेश करने के बाद उनके माता-पिता के सुपुर्द कर दिया गया।
ट्रेन में बैठ गए, यह भी नहीं पूछा, कहां जाएगी
बाल कल्याण समिति ने बच्चों को उनके माता-पिता को सुपुर्द करने से पहले उनसे तफसील से पूरा वाकया पूछा। बच्चों ने बताया कि वे रक्सौल में रेलवे स्टेशन पहुंचने के बाद जो ट्रेन खड़ी मिली, उसी में बैठ गए थे। उन्हें नहीं पता था कि ट्रेन अमृतसर नहीं जाएगी। समिति की सदस्य राखी चौहान ने माता-पिता को बच्चों के साथ तस्वीर और उनके दूसरे कागजात दिखाने को कहा। गहन छानबीन करने के बाद समिति ने बच्चों को उनके माता-पिता को सौंप दिया।