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कैंसर समेत इन बीमारियों से लड़ने में कारगर साबित हो रहा ढिंगरी मशरूम, बेहद आसान है इसका उत्पादन
Fri, 01 Jan 2021 01:38 AM IST
बरेली ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
Published by: बरेली ब्यूरो
Updated Fri, 01 Jan 2021 01:38 AM IST
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मशरूम
- फोटो : अमर उजाला (फाइल फोटो)
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ढिंगरी मशरूम की खेती का प्रचलन तेजी से बढ़ रहा है। यह प्रजाति गुलाबी सर्दी का मशरूम भी कहलाती है। इसे ऑस्टर मशरूम भी कहा जाता है। इसे उगाने के लिए बहुत कम स्थान की आवश्यकता होती है और यह बहुत जल्द ही फसल देना प्रारंभ कर देता है। इससे एक बार में लगभग तीन महीने तक फसल प्राप्त की जा सकती है। राष्ट्रीय पशु चिकित्सा एवं अनुसंधान संस्थान (आईवीआरआई) में कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) के वैज्ञानिक डॉ. रंजीत सिंह का कहना है कि इस मशरूम को फसलों के अवशेष जैसे भूसा, पुआल आदि के ऊपर आसानी से उगाया जा सकता है।
ऑस्टर मशरूम सामान्य रूप से उगाए जाने वाले अन्य मशरूम की तुलना में बहुत ज्यादा स्वास्थ्य वर्धक होता है। इसमें विटामिन बी, डी, के, ई के साथ ही आवश्यक खनिज तत्व सेलेनियम और जिंक भी पाए जाते हैं। ढिंगरी मशरूम में प्लूरोटिन नामक रसायन पाया जाता है, जो कैंसररोधी होता है। इसमें प्रोटीन लगभग पांच प्रतिशत होता है, इसलिए यह कुपोषण दूर करने में भी सक्षम है। कार्बोहाइड्रेट और वसा न के बराबर होती है, इसलिए मधुमेह और उच्च रक्तचाप के रोगियों के लिए भी यह उचित आहार है।
बहुत ही आसान है ढिंगरी मशरूम का उत्पादन
ढिंगरी मशरूम उगाना बहुत आसान है। इसके लिए दो विधियां प्रचलित हैं। पहली विधि में 10 किलो भूसे को 12 घंटे तक भिगोते हैं। इसके बाद भाप देने के बाद मशरूम का बीज मिलाकर थैलियों में पैक कर देते हैं। दूसरी विधि रसायन से शोधन की विधि है। इसमें 10 किलो भूसे को 90 लीटर पानी में 18 घंटे के लिए भिगोने के लिए एक ड्रम में रख देते हैं। साथ ही इसमें 10 लीटर पानी में 7.5 ग्राम कार्बेंडाजिम, 125 मिली फार्मलीन मिला देते हैं। 18 घंटे बाद भूसे को ड्रम से निकालकर चार घंटे के लिए पानी में रख देते हैं।
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उसके बाद दो प्रतिशत की दर से उसमें बीज मिलाते हैं। इसके बाद भूसे को 45 गुणा 25 सेंटीमीटर आकार की सफेद पॉलीथिन के थैलों में भरकर अंधेरे कमरे में टांग देते हैं। थैलियों में हर 10 सेंटीमीटर की दूरी पर छिद्र कर देते हैं। कमरे का तापमान 20 से 30 डिग्री सेंटीग्रेड और आर्द्रता 75 से 85 प्रतिशत रखते हैं । इस प्रकार दो हफ्ते बाद जब मशरूम जाल पूरी तरह से फैल जाता है। तब उसमें मशरूम निकलना प्रारंभ हो जाते हैं। तैयार मशरूम को तोड़कर धोकर पॉलीथिन में पैक करके बिक्री करते हैं।
साल भर में एक लाख रुपये तक की कर सकते हैं आमदनी
वैज्ञानिक डॉ. रंजीत सिंह ने बताया कि ढिंगरी मशरूम के उत्पादन का प्रशिक्षण आईवीआरआई के कृषि विज्ञान केंद्र में समय-समय पर दिया जाता है। बिना प्रशिक्षण के मशरूम की खेती नहीं करनी चाहिए। एक थैले से लगभग पांच किलोग्राम तक मशरूम प्राप्त होता है। इस प्रकार यदि 10 क्विंटल भूसे से मशरूम उगाया जाए तो 30 से 40 हजार तक की आय तीन महीने में संभव है। इस प्रकार पूरे वर्ष मशरूम को उगा कर एक लाख रुपये की आमदनी आसानी से की जा सकती है।
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ऑस्टर मशरूम सामान्य रूप से उगाए जाने वाले अन्य मशरूम की तुलना में बहुत ज्यादा स्वास्थ्य वर्धक होता है। इसमें विटामिन बी, डी, के, ई के साथ ही आवश्यक खनिज तत्व सेलेनियम और जिंक भी पाए जाते हैं। ढिंगरी मशरूम में प्लूरोटिन नामक रसायन पाया जाता है, जो कैंसररोधी होता है। इसमें प्रोटीन लगभग पांच प्रतिशत होता है, इसलिए यह कुपोषण दूर करने में भी सक्षम है। कार्बोहाइड्रेट और वसा न के बराबर होती है, इसलिए मधुमेह और उच्च रक्तचाप के रोगियों के लिए भी यह उचित आहार है।
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बहुत ही आसान है ढिंगरी मशरूम का उत्पादन
ढिंगरी मशरूम उगाना बहुत आसान है। इसके लिए दो विधियां प्रचलित हैं। पहली विधि में 10 किलो भूसे को 12 घंटे तक भिगोते हैं। इसके बाद भाप देने के बाद मशरूम का बीज मिलाकर थैलियों में पैक कर देते हैं। दूसरी विधि रसायन से शोधन की विधि है। इसमें 10 किलो भूसे को 90 लीटर पानी में 18 घंटे के लिए भिगोने के लिए एक ड्रम में रख देते हैं। साथ ही इसमें 10 लीटर पानी में 7.5 ग्राम कार्बेंडाजिम, 125 मिली फार्मलीन मिला देते हैं। 18 घंटे बाद भूसे को ड्रम से निकालकर चार घंटे के लिए पानी में रख देते हैं।
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उसके बाद दो प्रतिशत की दर से उसमें बीज मिलाते हैं। इसके बाद भूसे को 45 गुणा 25 सेंटीमीटर आकार की सफेद पॉलीथिन के थैलों में भरकर अंधेरे कमरे में टांग देते हैं। थैलियों में हर 10 सेंटीमीटर की दूरी पर छिद्र कर देते हैं। कमरे का तापमान 20 से 30 डिग्री सेंटीग्रेड और आर्द्रता 75 से 85 प्रतिशत रखते हैं । इस प्रकार दो हफ्ते बाद जब मशरूम जाल पूरी तरह से फैल जाता है। तब उसमें मशरूम निकलना प्रारंभ हो जाते हैं। तैयार मशरूम को तोड़कर धोकर पॉलीथिन में पैक करके बिक्री करते हैं।
साल भर में एक लाख रुपये तक की कर सकते हैं आमदनी
वैज्ञानिक डॉ. रंजीत सिंह ने बताया कि ढिंगरी मशरूम के उत्पादन का प्रशिक्षण आईवीआरआई के कृषि विज्ञान केंद्र में समय-समय पर दिया जाता है। बिना प्रशिक्षण के मशरूम की खेती नहीं करनी चाहिए। एक थैले से लगभग पांच किलोग्राम तक मशरूम प्राप्त होता है। इस प्रकार यदि 10 क्विंटल भूसे से मशरूम उगाया जाए तो 30 से 40 हजार तक की आय तीन महीने में संभव है। इस प्रकार पूरे वर्ष मशरूम को उगा कर एक लाख रुपये की आमदनी आसानी से की जा सकती है।