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ट्रेनों का बोझ नहीं ढो पा रहीं अंग्रेजों के जमाने की पटरियां
बरेली।
Updated Fri, 24 Nov 2017 01:44 AM IST
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ट्रेन की पटिररियां
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अंग्रेजों के जमाने की पटरियां अब ट्रेनों का बोझ ढोने लायक नहीं रह गई हैं। लखनऊ-मुरादाबाद के बीच 345 किमी के रेलखंड में लगातार पटरी चटकने की घटनाएं सामने आ रही है। सिर्फ एक शिफ्ट में रेल लाइनों की जांच होने की वजह से चटकी पटरियों से ट्रेनें भी गुजर जाती हैं। सर्दियों में अमूमन पटरी चटकती हैं, लेकिन ऐसा पहली बार हुआ कि कोहरा पड़ने से पहले ही पटरी टूट रही हैं।
रेलवे के इंजीनियरों के मुताबिक, पटरियों के चटकने की वजह सिर्फ दिन और रात के तापमान में भारी अंतर ही नहीं है, पटरियों केे वर्षों पुरानी होने और कम वजन भी बड़ी वजह है। अधिकांश पटरियां अपनी उम्र पूरी कर चुकी हैं। पटरियों को सपोर्ट देने के लिए बिछाई जाने वाली पत्थर की गिट्टियां भी समय के साथ मानक साढ़े तीन इंच के आकार से छोटी हो जाती हैं। इससे पटरी पर दबाव बढ़ जाता है। रेलवे प्रशासन अब 52 किलोग्राम (प्रति मीटर) वजन की पुरानी पटरियां हटाकर उनकी जगह 60 किलोग्राम वजन की पटरी बिछा रहा है। नई लाइन पर गिट्टियां भी बिछाई जा रही हैं।
अपलाइन पर 50, डाउन पर 70 फीसदी काम पूरा
बरेली डिवीजन में अप लाइन (दिल्ली की तरफ जाने वाली) पर पचास फीसदी काम पूरा हो चुका है, जबकि लखनऊ की ओर जाने वाली डाउन लाइन का 70 फीसदी ट्रैक बदला जा चुका है। बचा काम रेलवे बोर्ड ब्लॉक देकर तेजी से पूरा करा रहा है।
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दो महीने की दिक्कत फिर सौ की रफ्तार
रविवार और शनिवार को मेगा ब्लॉक देकर रेलवे बोर्ड पटरियां बदलने का काम तेजी से पूरा करा रहा है। हालांकि अभी दो महीने तक रेल यात्रा में मुश्किलें बनी रहेंगी। दो महीने में सभी डिवीजन पटरी बदलने का काम पूरा कर लेंगे। इसके बाद योजना 100 किमी प्रतिघंटा की रफ्तार से गाड़ियों को दौड़ाने की है।
पटरी चटकने की घटनाओं पर एक नजर
22 नवंबर पुरैनी स्टेशन यार्ड की लाइन संख्या दो चटक गई।
22 नवंबर सहारनपुर के पास पटरी चटक गई। लिहाजा ट्रेनों का संचालन बंद कर दिया गया।
22 नवंबर रहीमाबाद के पास सुबह आठ बजे लाइन चटक गई, सूचना मिलते ही तकनीकी टीम मौके पर पहुंच गई।
21 नवंबर नगरिया सादात के पास अपलाइन पर पटरी चटकी। जब पता चला उससे पहलेे पद्मावत और हरिहर एक्सप्रेस गुजर चुकी थी।
21 नवंबर रोजा-शाहजहांपुर के बीच एक मालगाड़ी के ड्राइवर को झटका लगा तो निरीक्षण में पटरी चटकी मिली।
21 नवंबर हापुड़ और पिलखुवा के बीच भी पटरी चटक गई। सुहेलदेव, पद्मावत, काशी विश्वनाथ एक्सप्रेस सहित कई गाड़ियों को रोकना पड़ा।
17 नवंबर सियालदाह एक्सप्रेस चूड़ियाला-इकबालपुर के बीच टूटी लाइन से गुजर गई थी।
14 नवंबर दलपतपुर के पास पटरी टूटी। कीमैन की सतर्कता से दून एक्सप्रेस दुर्घटनाग्रस्त होने से बची थी।
3 नवंबर अमरोहा स्टेशन के पास महामना एक्सप्रेस टूटी पटरी से गुजर गई थी।
31 अक्टूबर कांठ स्टेशन पर मेमू ट्रेन चटकी पटरी से गुजर गई।
रेलवे के इंजीनियरों के मुताबिक, पटरियों के चटकने की वजह सिर्फ दिन और रात के तापमान में भारी अंतर ही नहीं है, पटरियों केे वर्षों पुरानी होने और कम वजन भी बड़ी वजह है। अधिकांश पटरियां अपनी उम्र पूरी कर चुकी हैं। पटरियों को सपोर्ट देने के लिए बिछाई जाने वाली पत्थर की गिट्टियां भी समय के साथ मानक साढ़े तीन इंच के आकार से छोटी हो जाती हैं। इससे पटरी पर दबाव बढ़ जाता है। रेलवे प्रशासन अब 52 किलोग्राम (प्रति मीटर) वजन की पुरानी पटरियां हटाकर उनकी जगह 60 किलोग्राम वजन की पटरी बिछा रहा है। नई लाइन पर गिट्टियां भी बिछाई जा रही हैं।
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अपलाइन पर 50, डाउन पर 70 फीसदी काम पूरा
बरेली डिवीजन में अप लाइन (दिल्ली की तरफ जाने वाली) पर पचास फीसदी काम पूरा हो चुका है, जबकि लखनऊ की ओर जाने वाली डाउन लाइन का 70 फीसदी ट्रैक बदला जा चुका है। बचा काम रेलवे बोर्ड ब्लॉक देकर तेजी से पूरा करा रहा है।
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दो महीने की दिक्कत फिर सौ की रफ्तार
रविवार और शनिवार को मेगा ब्लॉक देकर रेलवे बोर्ड पटरियां बदलने का काम तेजी से पूरा करा रहा है। हालांकि अभी दो महीने तक रेल यात्रा में मुश्किलें बनी रहेंगी। दो महीने में सभी डिवीजन पटरी बदलने का काम पूरा कर लेंगे। इसके बाद योजना 100 किमी प्रतिघंटा की रफ्तार से गाड़ियों को दौड़ाने की है।
पटरी चटकने की घटनाओं पर एक नजर
22 नवंबर पुरैनी स्टेशन यार्ड की लाइन संख्या दो चटक गई।
22 नवंबर सहारनपुर के पास पटरी चटक गई। लिहाजा ट्रेनों का संचालन बंद कर दिया गया।
22 नवंबर रहीमाबाद के पास सुबह आठ बजे लाइन चटक गई, सूचना मिलते ही तकनीकी टीम मौके पर पहुंच गई।
21 नवंबर नगरिया सादात के पास अपलाइन पर पटरी चटकी। जब पता चला उससे पहलेे पद्मावत और हरिहर एक्सप्रेस गुजर चुकी थी।
21 नवंबर रोजा-शाहजहांपुर के बीच एक मालगाड़ी के ड्राइवर को झटका लगा तो निरीक्षण में पटरी चटकी मिली।
21 नवंबर हापुड़ और पिलखुवा के बीच भी पटरी चटक गई। सुहेलदेव, पद्मावत, काशी विश्वनाथ एक्सप्रेस सहित कई गाड़ियों को रोकना पड़ा।
17 नवंबर सियालदाह एक्सप्रेस चूड़ियाला-इकबालपुर के बीच टूटी लाइन से गुजर गई थी।
14 नवंबर दलपतपुर के पास पटरी टूटी। कीमैन की सतर्कता से दून एक्सप्रेस दुर्घटनाग्रस्त होने से बची थी।
3 नवंबर अमरोहा स्टेशन के पास महामना एक्सप्रेस टूटी पटरी से गुजर गई थी।
31 अक्टूबर कांठ स्टेशन पर मेमू ट्रेन चटकी पटरी से गुजर गई।