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Bareilly: मायावती का पुतला फूंकने के मामले में कैबिनेट मंत्री धर्मपाल सिंह बरी, 14 साल पहले दर्ज हुआ था मुकदमा

Tue, 23 Jan 2024 11:09 PM IST
आकाश दुबे संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली Published by: आकाश दुबे Updated Tue, 23 Jan 2024 11:09 PM IST
सार

2 जून, 2010 को गांव गैनी शिवनगर के रहने वाले ओमपाल की ओर से थाना अलीगंज में रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। रिपोर्ट में कहा गया था कि गौरी शंकर गुलड़िया के रहने वाले धर्मपाल सिंह गैनी शिवनगर में सुबह 9 बजे सभा करने आए थे। वहां उनके इशारे पर बड़ी संख्या में मौजूद गांव के लोगों ने मुख्यमंत्री मायावती का पुतला बनाया था।

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Cabinet Minister Dharampal Singh acquitted in case of burning effigy of Mayawati
पशुधन एवं दुग्ध विकास मंत्री धर्मपाल सिंह - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कैबिनेट मंत्री धर्मपाल सिंह और तीन अन्य के खिलाफ करीब 14 वर्ष पहले तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती का पुतला फूंकने के आरोप में दर्ज मुकदमा अदालत ने समाप्त कर दिया। यह आदेश विशेष मजिस्ट्रेट एमपी एमएलए कोर्ट शाम्भवी ने किया। शासन ने इस मुकदमे को वापस लेने का निर्देश दिया था और उच्च न्यायालय ने भी इसकी अनुमति दे दी थी।

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मामले में 2 जून, 2010 को गांव गैनी शिवनगर के रहने वाले ओमपाल की ओर से थाना अलीगंज में रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। रिपोर्ट में कहा गया था कि गौरी शंकर गुलड़िया के रहने वाले धर्मपाल सिंह गैनी शिवनगर में सुबह 9 बजे सभा करने आए थे। वहां उनके इशारे पर बड़ी संख्या में मौजूद गांव के लोगों ने मुख्यमंत्री मायावती का पुतला बनाया। पुतले में सचिन, सूर्य प्रकाश व ओमकार शर्मा ने धर्मपाल सिंह के कहने पर आग लगाई। वहां मौजूद कई लोगों ने मना किया लेकिन ये लोग नहीं माने। वादी ने कहा कि पुतला जलाने की जगह पर उनके बच्चे भी मौजूद थे। उन्होंने घर आकर बताया तो वह लोग मौके पर पहुंचे। वहां जला हुआ पुतला मौजूद था। टोकने पर सभी लोग लड़ने पर आमादा हो गए।

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ओमपाल की मांग पर मामले में धर्मपाल सिंह और सचिन व ओमकार वर्मा के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया। इनमें ओमकार वर्मा की मौत हो चुकी है। मुकदमा अब अंतिम चरण में था और अभियुक्तों के बयान होने थे। इसी बीच कोर्ट में विशेष लोक अभियोजक एमपी-एमएलए कोर्ट अचिंत्य द्विवेदी की ओर से अर्जी देकर कहा गया कि शासन की ओर से इस मुकदमे को वापस लेने का फैसला किया गया है। इस बारे में जिलाधिकारी को पत्र भी शासन की ओर से भेजा गया है। हाईकोर्ट ने भी 29 अगस्त 2023 को अभियोग वापस लेने की अनुमति दे दी है। इसलिए मुकदमे को वापस लेने का आदेश पारित किया जाए। कोर्ट ने अर्जी को स्वीकार करते हुए भाजपा विधायक व मंत्री धर्मपाल सिंह और सचिन को मामले से दोषमुक्त कर दिया है।

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