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बीटीसी नहीं, अब शिक्षक  बनना है तो बीएलएड करें

Fri, 24 Feb 2017 01:23 AM IST
बरेली।  
बरेली।   Updated Fri, 24 Feb 2017 01:23 AM IST
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BTC No longer teacher Do you want to be Bielad
BTC No longer teacher Do you want to be Bielad - फोटो : अमर उजाला
प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षक बनने के लिए अब बेसिक ट्रेनिंग कोर्स (बीटीसी) करने की जरूरत नहीं होगी। इसकी जगह अब अभ्यर्थियों को चार वर्षीय बैचलर ऑफ एलीमेंट्री एजूकेशन (बीएलएड) करना होगा। 
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सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर गठित नेशनल काउंसिल फार टीचर एजूकेशन (एनसीटीई) की समिति की स्वीकृति के बाद बीएलएड को अप्रूवल देने के लिए गठित अस्थायी बोर्ड ऑफ स्ट्डीज ने भी हरी झंडी दे दी है। इसका सिलेबस भी पास कर दिया गया है। इसमें रुहेलखंड विश्वविद्यालय के शिक्षा एवं संबद्ध विज्ञान के डीन प्रोफेसर एनपी सिंह कनवीनर की भूमिका में थे। उन्होंने बताया कि अब बीटीसी की जगह बीएलएड कोर्स होगा और कोर्स कराने वाले कॉलेजों को डायट से नहीं, बल्कि परिक्षेत्र में आने वाले विश्वविद्यालय से संबद्धता लेनी होगी। बारहवीं के बाद यह कोर्स किया जा सकेगा, जबकि दो वर्षीय बीटीसी करने के लिए अर्हता स्नातक निर्धारित थी। उन्होंने बताया कि इसके लिए कॉलेजों को पचास की जगह 70 सीटें आवंटित की जाएंगी।
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कॉलेजों पर नियंत्रण रखेगा शिक्षा एवं संबद्ध विज्ञान विभाग 
बीएलएड कोर्स विश्वविद्यालय के शिक्षा एवं संबद्ध विज्ञान विभाग के अंतर्गत कराया जाएगा। कॉलेज पर नियंत्रण भी इसी विभाग का होगा। बोर्ड ऑफ स्ट्डीज ने इस पर मुहर लगा दी है। राजभवन से मंजूरी के लिए इसका प्रस्ताव भेजा गया है। यह कोर्स विश्वविद्यालय परिसर में भी संचालित करने पर भी विचार चल रहा है। 
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नेशनल काउंसिल फार टीचर एजूकेशन ने बीटीसी की जगह चार वर्षीय कोर्स बीएलएड शुरू करने का आदेश जारी किया है। इसके लिए एक अस्थायी बोर्ड ऑफ स्ट्डीज बनी थी, जिसने इस पर मुहर लगा दी है। बारहवीं के बाद यह कोर्स होगा और परिक्षेत्र के विश्वविद्यालय से संबद्धता लेनी होगी।
-प्रो. एनपी सिंह, कनवीनर अस्थायी बोर्ड ऑफ स्ट्डीज बीएलएड कोर्स और डीन शिक्षा एवं संबद्ध विज्ञान रुहेलखंड विश्वविद्यालय
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