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बसपा ने दरगाह से मांगी ताकत
बरेली
Updated Wed, 16 Dec 2015 01:32 AM IST
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बरेली। देश भर में हो रहे मुसलमानों के गुस्से के इजहार के बीच बसपा के खास सिपाहसलार के तौर पर बरेली पहुंचे राष्ट्रीय महासचिव नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने मंगलवार को दरगाह-ए-आला हजरत के कुछ नुमाइंदों को आदर पूर्वक एक होटल में बुलाकर बसपा की ओर से दोस्ती की हाथ बढ़ाया। आल इंडिया जमात रजा-ए-मुस्तफा के राष्ट्रीय महासचिव मौलाना शहाबुद्दीन रजवी के नेतृत्व में सिद्दीकी से मिले उलमाओं के बीच करीब एक घंटे तक गुफ्तगू चली। इसमें बाबरी प्रकरण पर कोर्ट के फैसले से लेकर देश और प्रदेश के सियासी हालात पर चर्चा हुई। यह तय हुआ कि शीघ्र ही देश के कुछ खास उलमा लखनऊ में जाएंगे और बसपा सुप्रीमो मायावती से भी उनकी मुलाकात होगी। भाजपा और सपा के रिश्तों पर हो रही चर्चा और विधानसभा चुनाव के समीकरणों के मद्देनजर इस मुलाकात को सियासी हलकों में अहम माना जा रहा है।
इस मुलाकात के दौरान मौजूद रहे मौलाना शहाबुद्दीन, मौलाना नूर अहमद, मौलाना फरियाद अली, बरकात रजा खां, मौलाना फारूख, दानिस रजा आदि से नसीमुद्दीन ने काफी फीड बैक लिया। मुलाकात करने वालों ने बताया कि यह एक व्यक्तिगत मुलाकात थी। सिद्दीकी के बहनोई अली हसन और उनकी बहन हाल ही में दरगाह से मुरीद हुए हैं। इस नाते नसीमुद्दीन का दरगाह से नाता है। हालांकि वे किसी सियासी मसले पर बातचीत से इनकार करते रहे लेकिन बाद में इतना स्वीकार किया कि बहुत जल्द लखनऊ में मिलना तय हुआ है। बसपा के लीडर देश के बड़े उलमाओं से बात करना चाहते हैं। नसीमुद्दीन ने उनकी बसपा सुप्रीमो मायावती से मुलाकात कराने की भी इच्छा जताई है, जिस पर इधर से भी रजामंदी थी। इस मसले पर अभी दरगाह के बड़े लोगों का भी परामर्श लिया जाएगा।
उल्लेखनीय है कि दरगाह अक्सर मुसलमानों की नुमाइंदगी को लेकर प्रदेश सरकार से सवाल करती रही है। मौलाना तौकीर रजा दो बार सपा सरकार से जुड़ कर नाता तोड़ चुके हैं और दरगाह के नाम पर लालबत्ती धारी आबिद खां को दरगाह के खास लोग ही पसंद नहीं करते हैं। तौकीर रजा ने जितने भी सवाल उठाए उन पर सरकार कोई स्टैंड नहीं ले पाई। लोकसभा चुनाव में प्रदेश से एक भी मुसलमान का न चुना जाना भी मुसलमानों के बीच नाराजगी का एक सबब रहा है।
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इस मुलाकात के दौरान मौजूद रहे मौलाना शहाबुद्दीन, मौलाना नूर अहमद, मौलाना फरियाद अली, बरकात रजा खां, मौलाना फारूख, दानिस रजा आदि से नसीमुद्दीन ने काफी फीड बैक लिया। मुलाकात करने वालों ने बताया कि यह एक व्यक्तिगत मुलाकात थी। सिद्दीकी के बहनोई अली हसन और उनकी बहन हाल ही में दरगाह से मुरीद हुए हैं। इस नाते नसीमुद्दीन का दरगाह से नाता है। हालांकि वे किसी सियासी मसले पर बातचीत से इनकार करते रहे लेकिन बाद में इतना स्वीकार किया कि बहुत जल्द लखनऊ में मिलना तय हुआ है। बसपा के लीडर देश के बड़े उलमाओं से बात करना चाहते हैं। नसीमुद्दीन ने उनकी बसपा सुप्रीमो मायावती से मुलाकात कराने की भी इच्छा जताई है, जिस पर इधर से भी रजामंदी थी। इस मसले पर अभी दरगाह के बड़े लोगों का भी परामर्श लिया जाएगा।
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उल्लेखनीय है कि दरगाह अक्सर मुसलमानों की नुमाइंदगी को लेकर प्रदेश सरकार से सवाल करती रही है। मौलाना तौकीर रजा दो बार सपा सरकार से जुड़ कर नाता तोड़ चुके हैं और दरगाह के नाम पर लालबत्ती धारी आबिद खां को दरगाह के खास लोग ही पसंद नहीं करते हैं। तौकीर रजा ने जितने भी सवाल उठाए उन पर सरकार कोई स्टैंड नहीं ले पाई। लोकसभा चुनाव में प्रदेश से एक भी मुसलमान का न चुना जाना भी मुसलमानों के बीच नाराजगी का एक सबब रहा है।
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