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जनधन के पैसे पर भी दलालों की नजर

Tue, 14 Apr 2020 12:16 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Tue, 14 Apr 2020 12:16 AM IST
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Brokers keep an eye on public money
बैंक के बाहर लगी ग्राहकों की भीड़। - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, बरेली

महिलाओं से 50-100 रुपये तक मांगी जा रही रकम, बैंकों के ग्राहक सुविधा केंद्रों से ज्यादा शिकायतें

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बरेली। लॉकडाउन में सरकार ने मदद के लिए महिलाओं के खातों में पांच-पांच सौ रुपये जमा किए हैं, लेकिन इस रकम पर भी दलालों की नजर लग गई है। पहले ये अफवाह उड़ाई कि जनधन खाते से जल्द रकम न निकालने पर वह वापस चली जाएगी। इसलिए रकम निकालने की आपाधापी में तमाम दलालों के चंगुल में फंसकर महिलाओं को 50 से 100 रुपये तक कमीशन देना पड़ रहा है।
जनधन खातों से रकम निकालने के लिए इन दिनों बैंकों में काफी भीड़ लग रही है। बताते हैं कि रकम निकलने में देरी से परेशान होकर तमाम महिलाएं दलालों का सहारा ले रही हैं। बैंक अधिकारियों का कहना है कि ऐसे ज्यादातर मामले बैंकों के ग्राहक सुविधा केंद्रों से आ रहे हैं। अफसरों का कहना है कि मुख्य बैंकशाखा में तो कमीशनखोरी संभव नहीं है, मगर सुविधा केंद्रों पर जल्द कैश निकालने के नाम पर पचास से लेकर सौ रुपये तक का कमीशन वसूल किया जा रहा है। ऐसे मामलों की लिखित शिकायत न होने पर कोई कार्रवाई भी नहीं हो रही। इधर, दो दिन की छुट्टी के बाद सोमवार को बैंकों के बाहर जनधन खाते से रकम निकालने के लिए काफी भीड़ लग रही। कुतुबखाना में इलाहाबाद बैंक, सिविल लाइंस में यूको बैंक में सुबह से ही ग्राहकों की लंबी लाइनें लग रहीं। मॉडल टाउन चौकी के पास स्टेडियम रोड पर केनरा बैंक और स्टेट बैंक के बाहर भी खाते से पैसा निकालने के लिए लोग भीड़ लगाए खड़े रहे। इसके अलावा सिठौरा में बैंक आफ बड़ौदा से बीसी सेंटर और मढ़ीनाथ शाखा में भी ग्राहक एक दूसरे से उचित दूरी बनाए खड़े हुए थे।
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निक्रिष्य खाते से 500 निकालने के लिए उससे ज्यादा का चार्ज

वर्ष 2014-15 में लाखों की संख्या में जनधन खाते खुलवाए गए थे, लेकिन उसमें लंबे समय से लेनदेन न होने की वजह से बड़ी संख्या में खाते निष्क्रिय हो गए। बताते हैं कि 40 से 50 फीसद तक निष्क्रिय खाते हैं। खाताधारकों को दिक्कत यह आ रही है कि वे अगर इसमें आए 500 रुपये निकालते हैँ तो खाते सक्रिय करने के लिए उससे ज्यादा चार्ज देना पड़ेगा। ऐसे वे पैसा नहीं निकला पा रहे हैं। ग्राहकों की शिकायत के बावजूद बैंक अफसर कोई रास्ता नहीं बना पा रहे हैं।
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