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Bareilly News: टुकड़ों में अधिसूचना जारी होने से दलालों और खरीदारों को मिला मौका

Mon, 16 Sep 2024 07:43 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Mon, 16 Sep 2024 07:43 AM IST
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Brokers and buyers got opportunity due to issuance of notification in pieces
पहली अधिसूचना जारी होने के बाद और दूसरी से पहले हुआ जमीन की खरीद-फरोख्त और भू उपयोग बदलवाने का खेल
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बरेली। बरेली-सितारगंज हाईवे के दूसरे पैकेज में पीलीभीत और ऊधमसिंह नगर में कुछ अधिकारियों और दलालों के नेटवर्क ने घोटाले की नींव रखी थी। जांच रिपोर्ट में इसके संकेत मिलने के बाद भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया पर ही सवाल उठ रहे हैं। अधिग्रहण की अधिसूचना एक के बजाय दो बार में जारी की गई। पहली और दूसरी अधिसूचना के बीच दस महीने से लेकर एक साल तक का अंतर रहा। इसी दौरान कौड़ियों के भाव जमीन खरीदकर खेल रचा गया।
सूत्रों का कहना है कि पीलीभीत जिले के 22 और ऊधमसिंह नगर के 11 गांवों में विस्तृत छानबीन में ऐसे मामले सामने आ सकते हैं। अब तक हुई जांच में यह तो स्पष्ट हो चुका है कि प्रस्तावित एलाइनमेंट लीक होने के बाद कई स्थानों पर जमीन की खरीद-फरोख्त हुई है। इन पर अस्थायी निर्माण करके पक्के निर्माण का मुआवजा भी हड़पा गया है।
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जांच समिति भी उजागर कर चुकी है इस तरह के तथ्य
बरेली मंडल की अपर आयुक्त प्रीति जायसवाल की अध्यक्षता वाली जांच समिति ने ने भी पाया गया कि पहली अधिसूचना के बाद बरेली, लखनऊ, नोएडा, ऊधमसिंह नगर व दिल्ली आदि स्थानों के निवासियों ने जमीन खरीदी। इसके बाद आधे-अधूरे व निम्न गुणवत्ता के निर्माण कराए और भू-उपयोग बदलवाया गया। इससे स्पष्ट है कि उनको प्रस्तावित एलाइनमेंट की जानकारी थी और उन्होंने इसका लाभ उठाया।
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उदाहरण एक
हाईवे के चौड़ीकरण के लिए पीलीभीत में 106.57 हेक्टेयर भूमि के अधिग्रहण की पहली विस्तृत अधिसूचना 23 जुलाई 2021 को जारी की गई थी। इसके बाद दूसरी अधिसूचना 43.97 हेक्टेयर भूमि के लिए एक जुलाई 2022 को जारी की गई। यह स्थिति तब है, जबकि एलाइनमेंट तय होते ही स्पष्ट हो गया था कि कुल कितनी जमीन की जरूरत है? फिर अधिग्रहण की अधिसूचना दो हिस्सों में क्यों जारी की गई? यह अहम सवाल है।

उदाहरण दो
ऊधमसिंह नगर में 50.75 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहण के लिए पहली अधिसूचना 28 सितंबर 2021 और 13.16 हेक्टेयर भूमि के लिए 27 जुलाई 2022 को दूसरी अधिसूचना जारी हुई। दोनों में करीब 10 महीने का अंतर रहा। जानकारों का कहना है कि जब भी अधिग्रहण होता है, पहली अधिसूचना में ही अधिकतर भूमि के नंबर और रकबे को स्पष्ट कर दिया जाता है, ताकि एलाइनमेंट तय होने के बाद लोगों को जमीन की खरीद-फरोख्त और भू-उपयोग में बदलाव का मौका न मिले, लेकिन पीलीभीत और ऊधमसिंह नगर में ऐसा नहीं हो सका। अमर उजाला ब्यूरो
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