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Bareilly News: पं. दीनदयाल के अर्थ चिंतन पर किया मंथन
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बरेली। रुहेलखंड विश्वविद्यालय और पंडित दीनदयाल उपाध्याय शोधपीठ के तत्वावधान में शनिवार को ‘संवदध्वं : दीनदयाल शनिवासरीय व्याख्यानमाला’ का आयोजन हुआ। इसमें वर्तमान में आर्थिक परिदृश्य और पंडित दीनदयाल उपाध्याय के अर्थ चिंतन पर छात्रों और शिक्षकों ने मंथन किया। उन्होंने अब अर्थ व्यवहार को अशुभ-लाभ बताते हुए शुभ-लाभ की ओर ले जाने का सुझाव दिया।
वर्तमान आर्थिक चुनौतियों के संदर्भ में पंडित दीनदयाल जी का अर्थ चिंतन विषय पर आधारित संगोष्ठी में समन्वयक डॉ. प्रवीण कुमार तिवारी ने व्यक्ति, समाज, राष्ट्र के अर्थ व्यवहार में परिवर्तन की जानकारी देते हुए ज्यादा लाभ अर्जित करने के चिंतन को घातक बताया। कहा कि पं. दीनदयाल ने जिस अर्थ चिंतन की बात की, वह शुभ-लाभ केंद्रित है, क्योंकि यह सहजीवन के सिद्धांत पर चलता है।
लाभ अर्जन और कर के संबंध में भारत का चिंतन वत्स-सिद्धांत, मधु-सिद्धांत अन्य लोक कल्याणकारी सिद्धांतों के बारे में है। अर्थशास्त्र विभाग की सहायक आचार्य डॉ. रुचि द्विवेदी अर्थनीति को अंत्योदय से उन्नति की बात कही। विकसित राष्ट्र बनाने के लिए स्वदेशी केंद्रित विकास पर जोर दिया। कीर्ति राजे बजाज ने उत्पादन बढ़ाना, समाज में वितरण और तब स्वयं उपभोग विचार के बारे में बताया।
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यहां विद्यार्थी संयोजक दीपाली गुप्ता, महेश शुक्ल रहे। संचालन हर्ष शुक्ला ने किया। सीमा रस्तोगी, मनीषा यादव, किरन देवी, सीमा राजपूत ने सरस्वती वंदना व कुलगीत, ज्योति गंगवार, प्रज्ञा गंगवार व पलक चंद्रा ने राष्ट्रगान प्रस्तुत किया। धन्यवाद ज्ञापन रश्मि रंजन ने किया।
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वर्तमान आर्थिक चुनौतियों के संदर्भ में पंडित दीनदयाल जी का अर्थ चिंतन विषय पर आधारित संगोष्ठी में समन्वयक डॉ. प्रवीण कुमार तिवारी ने व्यक्ति, समाज, राष्ट्र के अर्थ व्यवहार में परिवर्तन की जानकारी देते हुए ज्यादा लाभ अर्जित करने के चिंतन को घातक बताया। कहा कि पं. दीनदयाल ने जिस अर्थ चिंतन की बात की, वह शुभ-लाभ केंद्रित है, क्योंकि यह सहजीवन के सिद्धांत पर चलता है।
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लाभ अर्जन और कर के संबंध में भारत का चिंतन वत्स-सिद्धांत, मधु-सिद्धांत अन्य लोक कल्याणकारी सिद्धांतों के बारे में है। अर्थशास्त्र विभाग की सहायक आचार्य डॉ. रुचि द्विवेदी अर्थनीति को अंत्योदय से उन्नति की बात कही। विकसित राष्ट्र बनाने के लिए स्वदेशी केंद्रित विकास पर जोर दिया। कीर्ति राजे बजाज ने उत्पादन बढ़ाना, समाज में वितरण और तब स्वयं उपभोग विचार के बारे में बताया।
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यहां विद्यार्थी संयोजक दीपाली गुप्ता, महेश शुक्ल रहे। संचालन हर्ष शुक्ला ने किया। सीमा रस्तोगी, मनीषा यादव, किरन देवी, सीमा राजपूत ने सरस्वती वंदना व कुलगीत, ज्योति गंगवार, प्रज्ञा गंगवार व पलक चंद्रा ने राष्ट्रगान प्रस्तुत किया। धन्यवाद ज्ञापन रश्मि रंजन ने किया।